Monday, January 19, 2026
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह व पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की मुलाकात के मायने! तो क्या कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व में है टूट की संभावना।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह व पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की मुलाकात के मायने! तो क्या कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व में है टूट की संभावना।

(मनोज इष्टवाल/ सम्पादकीय)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने ट्वीट किया- “No Farmers No food” वहीं कांग्रेस इस मुलाकात से ज्यादा बेचैन दिखी व उन्होंने अमरिंदर सिंह व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की इस मुलाकात को दलित विरोधी करार दिया है।

पंजाब के ज्यादात्तर किसानों के आंदोलनरत होने, अमरिंदर सिंह का मुख्यमंत्री पद छोड़ने, चरणजीत सिंह चन्नी का मुख्यमंत्री बनने, सिद्धू का पंजाब प्रदेश कांग्रेस पद छोड़ने व वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल व गुलाम नबी आजाद द्वारा कांग्रेस में परिवारवाद व बिना अध्यक्ष पार्टी जैसे मुद्दों के बाद जहाँ कांग्रेस बैकफुट पर है वहीं मानों भाजपा संगठन ने तय कर लिया है कि कांग्रेस में कांग्रेस का नामलेवा भी कोई न बचे क्योंकि सूत्र कहते हैं कि कपिल सिब्बल व गुलाम नबी आजाद के अलावा कांग्रेस के “ग्रुप 23” नेता प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर सकते हैं। तो क्या देहरादून में विगत दिनों मीडिया को दिए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी के उस बयान को यकीन में बदला समझा जाए जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस से इतने नेता भाजपा में सम्मिलित होने जा रहे हैं कि अब हमें हॉउसफुल का बोर्ड लगाना पड़ेगा।

ज्ञात हो कि विगत दिवस कांग्रेस हाईकमान से नाराज चल रहे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर लगभग 45 मिनट तक मुलाकात चली। सूत्र तो इसे भी एक वजह मानते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुलाकात को लेकर अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिये थे लेकिन सच तो यह है कि चीन भारत सीमा पर बढ़ते तनाव को देखकर अमित शाह द्वारा दिन भर के कार्यक्रमों को रद्द किया जाना वजह मानी जा रही है।
इस मुलाकात के बाद अब  सवाल यह  उठ रहे हैं कि क्या अमरिंदर सिंह बीजेपी में शामिल होंगे? भले ही  कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद #NoFarmers NoFood के साथ ट्वीट कर कहा कि उन्होंने अमित शाह से आग्रह किया कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करके और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देकर पिछले 10 महीनों से चल रहे किसानों के आंदोलन के मुद्दे का समाधान किया जाए और 10 माह से आंदोलनरत किसान घर वापसी करें।

दूसरी ओर कांग्रेस ने कैप्टेन अमरिंदर सिंह व अमित शाह की इस मुलाकात पर बहुत करीबी नजर रखते हुये भाजपा व कैप्टेन पर आरोप लगाया कि पंजाब में दलित समुदाय के एक व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाना कुछ लोगों को हजम नहीं हो रहा है और शाह का निवास दलित विरोधी राजनीति का केंद्र बन गया है।  कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने #NoFarmers NoFood के साथ ट्वीट कर कहा, ”सत्ता में बैठे मठाधीशों के अहंकार को ठेस पहुँची है। क्योंकि एक दलित को मुख्यमंत्री बना दिया तो वो पूछते हैं कि कांग्रेस में फ़ैसले कौन ले रहा है? दलित को सर्वोच्च पद दिया जाना उन्हें रास नहीं आ रहा है, दलित विरोधी राजनीति का केंद्र और कहीं नहीं, अमित शाह का निवास बना हुआ है।”

सुरजेवाला यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि ”अमित शाह व पीएम मोदी पंजाब से प्रतिशोध की आग में जल रहे हैं।  वे पंजाब से बदला लेना चाहते हैं, क्योंकि वे किसान विरोधी काले कानूनों से अपने पूँजीपति साथियों का हित साधने में अब तक नाकाम रहे हैं। बीजेपी का किसान विरोधी षड्यंत्र सफल नहीं होगा।”

वहीं उन्होंने इस मुलाकात को दलित विरोधी माना है व कहा कि चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब में दलित चेहरा हैं व उन्हें मुख्यमंत्री बनता देख भाजपा यह पचा नहीं पा रही है कि एक दलित कैसे सर्वोच्च पद पर बैठ सकता है।

ज्ञात हो कि अमरिंदर सिंह ने 18 सितंबर को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।  इसके बाद कांग्रेस ने दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया। और दो दिन बाद ही  चन्नी ने 20 सितंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर पंजाब में अपने नए मंत्रिमंडल का विस्तार किया। मंत्रिमंडल के विस्तार में प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की नापसन्द के नेताओं के शामिल होने पर नाराज सिद्धू ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

बहरहाल अमित शाह व अमरिंदर सिंह के बीच हुई  इस मुलाकात के मायने में भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद सिंह ने अपने पत्ते नहीं खोले थे, लेकिन दावा किया था कि उन्होंने राजनीति नहीं छोड़ी है और वह अंत तक लड़ते रहेंगे। उन्होंने त्यागपत्र देने के बाद कांग्रेस में अपने कट्टर विरोधी नवजोत सिंह सिद्धू पर भी तीखा हमला किया था, जिन्हें पिछले दिनों पार्टी की पंजाब इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने सिद्धू को पाक़िस्तान का एजेंट तक करार दिया था। अपने राजनीतिक भविष्य के संबंध में सिंह ने कहा था कि उनके सामने कई विकल्प हैं। अमित शाह के साथ सिंह की मुलाकात को पंजाब की राजनीति में नये आयाम के तौर पर देखा जा रहा है जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होना है।

क्या भाजपा में शामिल होंगे अमरिंदर सिंह!

अमित शाह से लम्बी मुलाकात के बाद दोनों के चेहरों में खिली मुस्कराहट के कुछ भी मायने लगाए जा सकते हैं क्योंकि राजनीति में कूटनीति के तहत कब हंसना है कब रोना है, कब झगड़ना है व कब गले मिलना है …ये सभी अभिनय के महत्वपूर्ण अंग होते हैं लेकिन कई भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि अमरिंदर सिंह के भाजपा में शामिल होने की  सम्भावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। और अगर सचमुच यह मुलाकात कृषि कानून को लेकर हुई है तब अमरिंदर सिंह के भाजपा में शामिल होना इस बात पर निर्भर करता है कि केंद्रीय कृषि कानूनों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार झुकती है या नहीं!

वहीं यह भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान व चीन सीमा पर तनाव के मध्यनजर भी पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने गृह मंत्री के साथ पंजाब की आंतरिक सुरक्षा की स्थिति पर भी चर्चा की होगी। क्योंकि खबर तो यह भी गृह मंत्री कर बाद अब अमरिंदर सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर सकते हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

वहीं बिशेष सूत्रों का कहना है कि अमरिंदर गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल समेत कांग्रेस के ‘ग्रुप 23’ के कुछ नेताओं से भी गृहमंत्री व प्रधानमंत्री से मुलाकात सकते हैं, और अगर ऐसा हुआ तो यकीन मानिए कांग्रेस के अंदर का शीर्ष नेतृत्व छिन्न-भिन्न हो जाएगा व कांग्रेस को आगामी राज्यों के चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उसका सबसे बड़ा कारण कपिल सिब्बल द्वारा दिया गया यह बयान है जिसमें उन्होंने कांग्रेस को बिना अध्यक्ष की पार्टी देते हुए इशारों इशारों में सोनिया गांधी व राहुल गांधी पर निशाना साधा है। इससे तो साफ यही जाहिर हो रहा है कि आगामी समय में अगर कांग्रेसी मातहतों ने स्थिति को नहीं संभाला तो कांग्रेस को बड़ी टूट से कोई नहीं बचा सकता। और  इसका असर उत्तराखंड में कुछ ही महीनों में होने वाले विधान सभा चुनाव व एक साल बाद पंजाब विधान सभा में भी दिखने को मिल सकता है, क्योंकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत वर्तमान में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हैं। लगता है मोटा भाई जेठा भाई (अमित शाह व नरेंद्र मोदी) राजनीति की बिसात में शतरंज के वो मोहरे हैं जिनकी काट अभी किसी के पास नहीं हैं क्योंकि वे कब ढाई चाल चलकर बाजी पलट दें कोई नहीं जानता।

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