देहरादून (हि. डिस्कवर)।
जिनकी परवरिश करने वाले हाथों ने ही बुलंदियों के झंडे गाड़े हों तो स्वाभविक है उस घर के होनहार भी आगे चलकर उन्ही कदमों के निशां ढूढते क्षितिज की ऊंचाइयों तक अपना नाम रोशन करते हैं। डॉ राजकुमारी चौहान को बर्ष 2021 के लिए शिक्षा के क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए “वीरांगना तीलू रौतेली सम्मान” दिया जा रहा है। वह दो संस्कृतियों की ध्वजवाहक अर्थात गढ़वाल की ढियांटुड़ी (बेटी) व जौनसार की रियांटुड़ी/रईंण (बहु) हैं।
आखिर शिक्षा के क्षेत्र में डॉ राजकुमारी चौहान ने कर क्या दिया जो उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है? यह प्रश्न आम व्यक्ति की जुबान पर जरूर आएगा और विशेषत: उन महिलाओं के जो सामाजिक क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं। आपको बता दें कि डॉ राजकुमारी चौहान के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महिलाओं की भूमिका, जौनसार बावर में तीर्थाटन पर्यटन आदि सहित चार पुस्तकों का प्रकाशन किया है।
पारिवारिक पृष्टभूमि।
डॉ राजकुमारी चौहान का मायका रुद्रप्रयाग जनपद के परकंडी गांव से है। उनके दादा जी स्व. दयाल सिंह भंडारी स्वतंत्रता संग्राम सैनानी, पिता जी महेंद्र सिंह भंडारी आर्मी में व माता जी श्रीमती लक्ष्मी भंडारी राज्य आंदोलनकारी हैं। उनकी ससुराल देहरादून जनपद के जौनसार क्षेत्र के बाढ़ो गांव में है व उनके पति भारत सिंह चौहान ‘गढ़ वैराट’ अखबार के सम्पादक व वर्तमान में विधान सभा अध्यक्ष के पीआरओ हैं।
दो संस्कृतियों से सामंजस्य।
डॉ राजकुमारी बताती हैं कि उनकी शादी के 11 साल हो गये हैं और जब भी वह अपनी ससुराल जाती हैं तब वह कालसी से ही जौनसार को परम्पराओं की संवाहक “घाघरा, कुर्ती, ढांटू” इत्यादि पहनकर जाती हैं और उन्हें गर्व भी होता है कि उन्हे यह सब पहने देख क्षेत्रीय लोग व ग्रामीण उन्हें बहुत स्नेह व सम्मान देते हैं। वह जब अपने मायके जाती हैं तो वहां की सभी परम्पराओं का निर्वहन करती हैं।
रूढ़िवादी विचारधारा।
आज से 10 बर्ष पूर्व ही नहीं वरन अब भी यदा-कदा गढ़वाल क्षेत्र के ठेठ ग्रामीण इलाकों में जौनसार बावर की लोकसंस्कृति व परम्पराओं पर जब चर्चा होती है तब जादू-टोने जैसे शब्द सामने आते हैं। इस पर डॉ राजकुमारी का कहना है कि जब तक हम दूसरी लोक सभ्यता, लोक समाज व लोक संस्कृति को अंगीकार नहीं करते तब तक ऐसे ही रहस्यपूर्ण बातें होती रहती हैं लेकिन उन्होंने जितने समय भी अपनी ससुराल पक्ष को जिया है, ये जादू टोने जैसी सभी बातें उन्हें निरर्थक ही लगी हैं।
क्या करना चाहती हैं क्षेत्र के लिए।
वह कहती हैं यों तो जौनसार बावर अब शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणीय है लेकिन फिर भी वह चाहती हैं कि ग्रामीण समाज के महिलाओं के लिए कोई ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार हो जो उन्हें लाभान्वित कर सके। उनकी इच्छा है कि वह अपनी पुरस्कार राशि ग्रामीण समाज की महिलाओं को भेंट करे ताकि उसका न्यायोचित सम्मान हो सके।
प्रदेश में महिलाओं के क्षेत्र में दिए जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित तीलू रौतेली पुरस्कार इस बार 8 अगस्त को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रदेश की 22 महिलाओं को दिया जाएगा जिसमें देहरादून जनपद से जौनसार बावर क्षेत्र की डॉ राजकुमारी चौहान को यह पुरस्कार मुख्यमंत्री पुष्कर धामी एवं महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य भेंट करेगी।
वीरांगना तीलू रौतेली के नाम से प्रदेश में दिए जाने वाला यह पुरस्कार महिलाओं के क्षेत्र में साहसी एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को दिया जाता है इस वर्ष इस पुरस्कार के लिए विभिन्न जनपदों से 22 वीरांगनाओं को चयनित किया गया । इस पुरस्कार में प्रशस्ति पत्र एवं 31 हजारों रुपए का चेक भेंट किया जाता है ।
देहरादून जनपद से जौनसार बावर में पहली बार यह पुरस्कार डॉ राजकुमारी चौहान ने को दिया जाएगा । डॉ राजकुमार चौहान वीर शहीद केसरी चंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर में राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्ष है उन्हें इससे पूर्व टीचर ऑफ द ईयर, उत्कृष्ट सेवा सम्मान, रूम टू रीड इंडिया आदि सहित अनेक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है ।
कोरोना काल के दौरान हुए लॉकडाउन मे डॉक्टर राजकुमारी चौहान ने विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र छात्राओं को ऑनलाइन पठन-पाठन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिससे पर्वतीय क्षेत्रों के हजारों छात्र लाभान्वित हुए । डॉ राजकुमार चौहान ने दूरदर्शन में वार्ताए आकाशवाणी लोकसभा चैनल, कथा सागर के अंतर्गत विभिन्न चर्चा वार्ताओं के माध्यम से महिलाओं और छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई के प्रति जागरूक करने करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
प्रदेश का सबसे उत्कृष्ट सम्मान तीलू रौतेली पुरस्कार मिलने से जौनसार बावर में खुशी की लहर है । डॉ .राजकुमारी चौहान ने इस पुरस्कार को उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली महिलाओं को समर्पित किया।
डॉ राजकुमारी चौहान को शुभकामनाएं। शायद वह जौनसार बावर की ऐसी पहली बहु हैं जिन्हें “वीरांगना तीलू रौतेली सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा।




