Tuesday, January 20, 2026
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कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का जोरदार स्वागत। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से कांग्रेस कार्यालय तक उमडा कांग्रेसियों का हुजूम।

(मनोज इष्टवाल)

वैसे प्रीतम सिंह भी कांग्रेस के लिए बुरे नहीं थे लेकिन गणेश गोदियाल जैसा साफ छवि का नेता मानो कांग्रेसियों को मन की मुराद मिल गयी हो। क्षेत्रीय जनता के बीच ठेठ गढ़वाली में संवाद के लिए मशहूर गणेश गोदियाल मुम्बई से अपने व्यवसाय के साथ जब अपने पैतृक क्षेत्र राठ में उतरे तब यह किसी ने नहीं सोचा था कि एक व्यवसायी क्षेत्रीय राजनीति में उतरेगा व एक ऐसा राजनैतिक चेहरे को पटकनी देगा जिसके सितारे सातवें आसमान हैं।


जिस तरह राठ क्षेत्र के सदाबहार नेता शिवानन्द नौटियाल को चुनाव में पटकनी देकर एकाएक राजनीतिक बुलन्दियों को छूने वाले डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का नाम गढ़वाल से उत्तर प्रदेश के विधान सभा में गूंजा ठीक उसी तर्ज पर ‘निशंक’ को चुनाव में पटकनी देकर एकाएक उभरे इस जन नेता का नाम भी सम्पूर्ण उत्तराखंड की राजनीति में गूंजायमान हुआ। गणेश गोदियाल के चुनाव जीतने का उतना फर्क नहीं है जितना उस काल में राठ में डॉ निशंक द्वारा किये गए विकास का फर्क है क्योंकि गोदियाल ने डॉ निशंक को उस दौर में चुनाव में हराया जब वह राजनीति के चरम पर थे व कोई सोच भी नहीं सकता था कि डॉ निशंक को चुनाव हराया जा सकता है। उस दौर में राठ क्षेत्र में डॉ निशंक ने सड़कों का जाल बिछा दिया था।
अब जबकि कांग्रेस राष्ट्रीय व प्रादेशिक राजनीति में हाशिये पर जा चुकी है व उसे मृत संजीवनी की बहुत आवश्यकता है, ऐसे में एकाएक उत्तराखंड में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष में हुई उनकी ताजपोशी कहीं न कहीं भाजपा व आप की पेशानी में बल डालने का काम कर रही है, क्योंकि जिस जोश के साथ कांग्रेसियों द्वारा उनका झंडा बुलंद किया गया वह उत्तराखंड में बर्षों बाद दिखने को मिला।
अपने नाम पर मोहर तो गणेश गोदियाल तभी लगा चुके थे जब उन्होंने गैरसैण में एक नारा बुलंद किया था वह भी ठेठ गढ़वाली में….! नारा था – ‘त्रिवेंद्र भैजी कख च तुमारी, उत्तराखंड सरकार।”
मुझे आज भी अच्छे से याद है, 18 मार्च 2016 का विधान सभा का वह बजट सत्र जब अचानक कांग्रेस के 9 विधायकों ने हरीश रावत सरकार से समर्थन वापस ले लिया। मैं तब बजट सत्र की कार्यवाही कवर करने सदन के अंदर ही था। यह पटाक्षेप डॉ हरक सिंह रावत द्वारा एकाएक किया गया क्योंकि उनका मानना था कि हरीश रावत सरकार ने उन्हें बहुत ज्यादा उपेक्षित कर दिया था। कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेता सतपाल महाराज पहले ही कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में चले गए थे ऐसे में अचानक हरक सिंह रावत, उमेश शर्मा काउ, सुबोध उनियाल, कुंवर प्रणव सिंह, श्रीमति अमृता रावत, शैलेन्द्र सिंघल, विजय बहुगुणा, शैला रानी रावत और प्रदीप बत्रा ने अपनी ही सरकार के विरुद्ध जाकर हरीश रावत सरकार अल्पमत में ला दी ।
मुझे लगा अब डॉ अनुसुया प्रसाद मैखुरी व गणेश गोदियाल की बारी है क्योंकि दोनों को ही सतपाल महाराज राजनीति में लाये थे व उन्हें ये दोनों ही अपना राजनीतिक संरक्षक भी मानते थे। तब मैं दौड़कर गणेश गोदियाल जी के कार्यालय में गया और उन्हें अंदर क्या हो गया वह जानकारी दी। गणेश गोदियाल यह सुनकर सन्न रह गए और बोले- इष्टवाल जी, यह पार्टी के विरुद्ध विश्वासघात है। जिस पार्टी ने मुझे यहां तक पहुंचाया उसके साथ बना रहूंगा। मैंने कहा- पहले महाराज और अब अमृता जी ने भी गुड़ बाय कर दिया क्या ऐसे में आपको नहीं लगता कि आप व मैखुरी जी पर ज्यादा बोझ है।
उन्होंने कुछ पल सोचा। अचानक फोन की घण्टी घनघनाई …शायद महाराज का फोन था। उनके माथे पर पसीने की बूंदों के साथ चिंता की रेखाएं भी थी। वे बोले- मामला बिगड़ने वाला है। अब सरकार रहे न रहे। सभी कांग्रेसी चाहे भाजपा में शामिल हो जाएं मैं कांग्रेस नहीं छोड़ सकता। क्योंकि कांग्रेस से ही मेरी पहचान है। उन्होंने गाड़ी निकलवाई और बिना देर किए फुर्र हो गए।
यकीन मानिए तब मुझे बुरा लगा था कि ये सरकार गिरने के बाद भी भाजपा जॉइन नहीं कर रहे । वह बुरा पल भर का था फिर उनकी खुद्दारी पर नाज हुआ। और आज पार्टी ने उसी खुद्दारी की कीमत अदा कर भी दी उन्हें पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बनाकर।

उनके स्वागत के लिए वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं में कांग्रेस उत्तराखंड प्रभारी देवेंद्र यादव, हरीश रावत, प्रीतम सिंह, तिलकराज बेहड़, रंजीत रावत, करण माहरा सहित दर्जनों लोग फूल मालाओं के साथ दिखे। वहीं पार्टी की महिला नेत्रियां ठेठ उत्तराखंडी पोशाक व गहनों में प्रदेश कार्यालय में उनके आगमन का इंतजार करती दिखाई दी।
जौलीग्रांट से देहरादून तक का सफर जहां बमुश्किल आधा घंटे का है, वहीं यह विशाल हुजूम पूरे तीन घण्टे में शहर पहुंचा।
बहरहाल आज के इस जुलूस को देखकर तो यही लग रहा था कि पुरानी कांग्रेस में फिर से ताजगी आ गयी है व फिर झुकी कमर सीधी हो गयी है लेकिन हरीश रावत जिंदाबाद, गणेश गोदियाल जिंदाबाद के नारों की प्रतिस्पर्द्धा ने यह भी जतला दिया है कि अभी भी पार्टी के अंदर सब कुछ सही नहीं है, क्योंकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह अपना अलग ही जुलूस लेकर निकले जबकि एक अन्य पूर्व अध्यक्ष भीड़ में कहीं गायब नजर आए।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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