(मनोज इष्टवाल)
पिछले कुछ दिन से एक वीडियो सोशल साइट पर वायरल हो रहा था। सोचा हो सकता है यह कोरोना काल में बेरोजगार हुये लोगों के लिए या फिर मजदूरों के लिए नमकीन चिप्स व पानी मुफ्त मुहैय्या करवा रही होंगी। लेकिन आज जब अपने गांव के ग्रुप में इस वीडियो को देखा तो स्तब्ध रह गया।
मैंने दिलराज कौर को अंतराष्ट्रीय फलक की सीढियाँ चढ़ते देखा है। मैंने गुरदीप कौर को कांग्रेस की नेता के रूप में बहुत सहृदयी देखा है लेकिन आज वही गुरदीप कौर जो समाज के लिए भूखी प्यासी हर दम अग्रिम पांत पर खड़ी होकर उनके सुख दुःख बांटा करती थी। चौराहे पर बैठी मजबूरी के आंसूं बहा रही हैं। आखिर ये फेडरेशन व इनके चौधरी करते क्या हैं। क्या ये आंखों के अंधे व कानों के बहरे लोग हैं।
गुरदीप की बेटी दिलराज कौर विकलांग होते हुए भी अपनी जीवटता के साथ अंतरराष्ट्रीय फलक पर देश का नाम पैरालंपिक शूटिंग प्रतियोगिता में रोशन कर चुकी हैं। दिलराज कौर ने व उनके पति ने कभी यह महसूस होने ही नहीं दिया कि दिलराज विकलांग है। उन्होंने दिलराज की इच्छाओं के लिए हर सम्भव यत्न किये व उसके हर सपने को पूरा किया।
दिलराज अभी तक पैरालंपिक शूटिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक रजत और राष्ट्रीय स्तर पर 24 स्वर्ण समेत कई पदक अपने नाम कर चुकी हैं। इसके अलावा वह वर्ल्ड पैरा स्पोर्ट्स में पहली सर्टिफाइड कोच, स्पोर्ट्स एजुकेटर जैसी कई उपलब्धियां उनके साथ जुड़ी हुई हैं। इन दिनों उनके लिए हालात बेहद खराब हैं।
दिलराज की कहानी दिल झकझोर देने वाली है। अचानक पिता गम्भीर रूप से बीमार हो गए। उनके उपचार पर लाखों रुपये खर्च हुए । गुरदीप कौर ने अपने पति की बीमारी पर पैसा पानी की तरह बहाया लेकिन लम्बे समय तक पति की बीमारी ने उन्हें अंदर से तोड़ कर रख दिया। गुरदीप अपने पति व दिलराज अपने पिता को बचा नहीं पाई।
अभी दिलराज के लिए और आघात सहने का समय था। काल को कुछ और मंजूर था। एक दिन एक दुर्घटना में उनका भाई गम्भीर रूप से घायल हो गया। पति के इलाज पर लाखों खर्च करने के बाद गुरदीप कौर पाई पाई के लिए मोहताज हो गयी। बेटे की जान बचाने के लिए गुरदीप ने पता नहीं कितनों के आगे हाथ जोड़े होंगे, लाखों उधार लिए लेकिन फिर भी अपने बेटे की जिंदगी नहीं बचा पाए। अब रह गए सिर्फ पैरालम्पिक की रजत पदक विजेता दलजीत कौर व उसकी माँ गुरदीप कौर…। मुफलिसी ऐसी आई कि सबने मुंह फेरना शुरू कर दिया।
कई बर्ष पूर्व मैंने गुरदीप कौर से दलजीत कौर पर आर्टिकल लिखने के लिए पेपर्स मांगे, लेकिन कांग्रेस कार्यालय में उन्हें उपलब्ध न पाकर वापस लौट आया। इस बात का कभी खयाल न आया कि एक बार गुरदीप कौर को फोन करके कुशल क्षेम पूछ लूं।
दलजीत कौर भी पिता व भाई की मौत से अंदर से बुरी तरह टूट गयी। उनके रिकार्ड्स की न ओलंपिक फेडरेशन ने कोई सुध ली न प्रदेश के खेल मंत्रालय ने। पिता व भाई की मृत्यु के बाद जरूर तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से भी उनकी मदद की गई थी। लेकिन वह मदद नाकाफी साबित हुई क्योंकि अभी तक गुरदीप कौर लोगों का कर्ज ही चुकाने में लगी है।
पेट की भूख देखिये कि कांग्रेस नेता व जानी मानी समाजसेविका गुरदीप कौर को अपनी पैरालम्पिक बेटी दिलराज कौर के साथ राजधानी स्थित गांधी पार्क के गेट के पास चारपाई डालकर चिप्स व नमकीन के पैकेट बेचने पड़ रहे हैं ताकि वे अपना जीवन यापन कर सकें। यह सिख कौम ही है जिन्हें गिरकर उठने का तरीका आता है वरना आम लोग अगर इस परिस्थिति में आ जाएं तो जीवन शून्य हो जाये ।
मेरा प्रश्न है कि क्या गुरदीप कौर व दलजीत कौर की मदद के लिए #गुरुद्वाराप्रबंधककमेटी #PMO #मुख्यमंत्रीउत्तराखंडसरकार #ओलम्पिकफेडरेशनऑफइंडिया #खेलमंत्रालयउत्तराखंड इत्यादि आगे आएंगे?
दिलराज हिंदुस्तान की पहली विकलांग अंतराष्ट्रीय पिस्टल शूटर हैं। एम ए एलएलबी हैं लेकिन उनके लिए सरकार के पास नौकरी नहीं है। उनकी गुरदीप कौर कहती हैं कि वक्त उन्हें किराये के मकान में ले आया है, जीवन यापन तो करना ही है इसलिए यह सब कर रही हैं।
आप जरूर यह वीडियो देखिये व अगर सक्षम हैं तो दिल खोलकर जो जितनी सम्भव हो इन माँ बेटी को मदद कीजिये। शायद हम सबकी मदद इस मातृशक्ति के काम आ जाये । शायद इनके बहते आंसू सुन्दर मोती बन जाएं। शायद हमें फिर से वही गुरदीप कौर दिख जाए जो हंसते हुए मानव सेवा के लिए आगे कदम बढ़ाती हैं।
