Tuesday, January 20, 2026
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एनडी तिवारी सरकार की अघोषित शेडो सीएम इंदिरा हृदयेश खुद को उत्तराखंड में एक मास लीडर के तौर पर स्थापित नहीं कर पाईं।

(राहुल सिंह शेखावत की कलम से)

बेशक डॉ इंदिरा हृदयेश सियासत के कतिपय गुण-दोषों से अछूती ना रही हों। लेकिन मातृशक्ति एक राजनेता के तौर पर उनका नाम लेकर जरूर इतरा सकती थी। इंदिरा के अंदाज-ए-सियासत से उनके साथ काम करने वाले पुरुष नेता मन भी मसोसते नजर आए। बहैसियत कांग्रेस नेता वह उत्तराखंड की सियासत का अमिट हस्ताक्षर हैं।

बतौर पत्रकार उनके साथ कमोबेश दो दशक के कई खट्टे मीठे अनुभव रहे। उनमें एक किस्सा 2007 विधानसभा चुनावों का है। जब तत्कालीन चैनल की ‘इलेक्शन डेस्क’ की दी एक असाइनमेंट पर था। जिसे पूरा करने के बाद बैठकर बतियाना शुरू ही हुआ था।

तभी Suryakant Dhasmana (तत्कालीन #NCP नेता) का इंदिरा हृदयेश के पास फोन आया। उस बीच वह बोली ‘अरे ये बताओ कि तुम चुनाव जीत रहे हो कि नहीं’। जब फोन कट गया तो मैंने पूछ लिया क्या आप स्योरली चुनाव जीत रही हो? जिस पर वह हल्का सा भड़कते हुए बोली शेखावत आपकी उम्र कितनी है।

मैंने अपने चिरपरिचित बेफट अंदाज में कहा कि पत्रकार और #नेता उम्र का मोहताज नहीं होता। मेरे आंकलन से आप डेंजर जोन में हो और #इलेक्शन लूज हो सकता है। तब तक चाय आ चुकी थी। मैं सॉरी कहते हुए बोला कि आपके जीतने के बाद में खुद फोन करके चाय पीने आऊंगा। खैर..!

दरअसल, इंदिरा हृदयेश तत्कालीन #नारायणदत्ततिवारी की सरकार में ‘शेडो CM’ हुआ करती थी। चूंकि सूचना मंत्री भी थी लिहाजा अखबारी वाहवाही में मदमस्त रही। लेकिन ‘#रामोजीराव’ के तत्कालीन चैनल का इंटरनल ‘इको सिस्टम’ उनके रौब से बेअसर था। लिहाजा, उस दौर में तल्ख खबरों से उनका जायका भी खराब रहता था।

ये इत्तेफाक था कि उस दौरान ही भाजपा के राष्ट्रीय नेता #रविशंकर_प्रसाद नैनीताल आए। उन्होंने अनौपचारिक चर्चा में पूछा कि हमारी क्या स्थिति है। मैंने अपना वही आंकलन उनसे शेयर किया। प्रसाद ने अपने वर्करों से फीडबैक लिया।

अगले रोज रविशंकर ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि ‘मैं बड़ी जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि इंदिरा जी चुनाव हार रही हैं’। खैर, अपने निर्वाचन क्षेत्र हल्द्वानी में असाधारण विकास की नई इबारत लिखने के बावजूद चुनाव #हार गईं।

मैं कॉउंटिंग के रोज रुद्रपुर था। जिसके अगले रोज वापस लौट रहा था। तभी एक मोबाइल पर कॉल आई मैडम बात करेंगी। इससे पहले कि मैं ‘हार्ड लक’ कहता, बोलीं शेखावत तुम सही थे’….। खैर #नैनीताल जाते वक्त रास्ते उनसे मिलने रुका और बातचीत हुई। उस दौरान अपनी कराए काम गिनाते हुए इंदिरा हृदयेश की आंखो में नमी थी।

सच कहूं तो बहुत बुरा भी लगा क्योंकि इंदिरा को हमेशा रौबदार या ठहाके के साथ हंसते हुए ही देखा। वैसे उनका उपलब्धियों के नाते तो हारना बनता भी नहीं था। अजीब इत्तेफाक था कि उन्हें दूसरी बार 2012 में गमगीन देखा। दरअसल, चुनाव प्रचार के दौरान उनके पति हृदयेश जी की मृत्यु हो गई थी।

इंदिरा बंपर मार्जिन से #हल्द्वानी विधानसभा से चुनाव जीतने के बाद निर्वाचन का सर्टिफिकेट लेने कॉउंटिंग सेंटर पहुंची थी। मुझे लगता है कि ऊपर वाले ने इंदिरा मायूस दिखने के लिए नहीं बनाया था। इसके इतर शरीर छोड़ने के बाद उनके फोटो देखकर लगता है मानो अपने चिरपरिचित अंदाज का अहसास करा रही हों।

#हरीश_रावत से सियासी प्यार-मुहब्बत पर ‘ऑफ द रिकॉर्ड’ पूछने पर इंदिरा हंसते हुए कह दिया करती थी ‘ऑन द रिकॉर्ड’ ही बोल देती हूं। मुख्यमंत्री रहते रावत के खिलाफ 2016 में #बगाबत हुई थी। उस दौरान कुछ पूछने पर मजाकिया लहजे में बोली इनकी भी दीदी हूं औऱ बागियों की भी, दोनों कुछ ज्यादा ही दुलार कर रहे हैं।

#इंदिरा_हृदयेश के संसदीय ज्ञान और प्रशासनिक दक्षता सत्ता पक्ष औऱ विपक्ष दोनों कायल रहे। मुझे विधानसभा का एक वाकया याद आ रहा है। तत्कालीन सत्र से पहले प्रश्नकाल के मद्देनजर जवाब तैयार हो रहे थे। किसी एक अधिकारी ने उन्हें उत्तर पढ़ाया। वह फौरन बोली कोर्ट में नपवाओगे! फिर जवाब खुद डिक्टेट किया।

इंदिरा हृदयेश के व्यक्तित्व में अमूमन ठहाकेदार हंसी और यदा-कदा बदमिजाजी दोनों का ही अद्भुद समागम रहा। गौरतलब है कि इंदिरा उत्तर प्रदेश में शिक्षक कोटे से कई बार #MLC रही। लेकिन उत्तराखंड बनने के बाद वह कांग्रेस की प्रत्यक्ष राजनीति में आगे बढ़ती गईं।

अगर ‘लंगड़ा-लूला’ सरीखे उनके सियासी #पूर्वाग्रह युक्त वाले बयान छोड़ दें, तो अमूमन मर्यादा नहीं लांघी। तीन दशक #UP जैसे बड़े सूबे की राजनीति का असर उनके व्यक्तित्व में हमेशा रहा। #उत्तराखंड की सियासी बिरादरी में क्षेत्रगत स्तर पर थोड़ा तंगदिली देखने को मिलती है। मेरा व्यक्तिगत विचार है कि वह इससे काफी हद तक दूर रही।

दिग्गज ND तिवारी की करीबी के चलते इंदिरा उनकी सरकार में अघोषित शेडो CM तो कहलाई। उन्होंने एनडी की विकासपरक सोच को आगे बढ़ाया। वह खुद को उत्तराखंड में एक मास लीडर के तौर पर स्थापित नहीं कर पाईं। वरना एक सफल #मुख्यमंत्री बनने की हर क्वालिटी उनमें मौजूद थी। इंदिरा हृदयेश के गुजरने से सूबे की सियासत में एक खालीपन नजर आएगा।

#DrIndiraHridesh #INC #HarishRawat

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