(अवधेश नौटियाल)
सियासत में वक़्क्त हमेशा एक सा नहीं रहता है। कभी किसी का सिक्का चलता है तो कभी किसी का। वक्त के अर्थ बदलते रहते हैं। इसके मुताबिक अपनों का नजरिया भी। सियासत में रिश्तों का आंकड़ा कब छत्तीस हो जाए, कहा नहीं जा सकता। ऐसा ही कुछ देखने को मिला कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के साथ। पिछली सरकार में हरक ने अपने तेवरों में काफी तल्खी झलकाई, मगर उस वक्त के मुखियाजी के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। हरक हर बार इशारों-इशारों में कहते रहे मगर कभी खुलकर कुछ नहीं कहा।
वक्त बदला, निजाम बदला और बदल गई हरक की किस्मत। जी हाँ हरक अब खुलकर बैटिंग करते हुए नज़र आ रहे हैं। मीडिया के एक सवाल के जवाब में हरक बोले हम कौन होते हैं किसी को कोई नुकसान पहुंचाने वाले। समय सबसे बड़ा बलवान है। घमंड तो रावण का भी नहीं रहा। यदि किसी में घमंड आ जाए तो वह बेवकूफी है। पद कोई घमंड करने के लिए नहीं है। यदि हम मंत्री बन गए तो घमंड करने के लिए नहीं बने, जनता की सेवा के लिए बने हैं।
मंत्री बनने के बाद हमारा व्यवहार और अच्छा होना चाहिए। जो भी व्यक्ति अपनी पीड़ा लेकर आता है तो उसे अपनी पीड़ा समझकर हम कार्य करेंगे, तभी उसके साथ न्याय कर पाएंगे। हरक बोले घमंड तो पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का भी नहीं रहा। मुख्यमंत्री रहते हुए जनता ने उन्हें दो-दो जगह से सबक सिखाया था। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रकृति के न्याय को नहीं समझ रहा है तो क्या किया जा सकता है।
बदले वक़्क्त में हरक अपने मन मुताबिक फैसले ले रहे हैं। अपनी विधानसभा में मेडिकल कॉलेज के लिए फंड भी ले गए, लालढांग सड़क का काम भी शुरू करवा दिया, कर्मकार बोर्ड में कर्मचारियों की नोकरी भी वापिस दिलवा दी, अधिकारी भी अपने मनमुताबिक नियुक्त कर दिए।
श्रममंत्री डा. हरक सिह रावत ने उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड से पिछले साल हटाए गए 38 कर्मचारियों को बहाल करने के आदेश दिए हैं। डा. रावत के अनुसार उन्होंने इस संबंध में सचिव श्रम को आदेश दिए हैं कि बोर्ड से जिन कर्मचारियों को हटाया गया था, उन्हें उसी तिथि से बहाल कर दिया जाए, जब से उन्हें हटाया गया था। उन्होंने कहा कि हमारा पहला दायित्व रोजगार देने पर होना चाहिए, न कि बेवजह किसी को हटाने पर। इसी के दृष्टिगत उन्होंने यह आदेश दिए हैं।
गौरतलब है कि त्रिवेंद्र सरकार के कार्यकाल में पिछले साल अक्टूबर में श्रम मंत्री डा. रावत को बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाते हुए शमशेर सिंह सत्याल को अध्यक्ष बना दिया गया था। तब डा. रावत ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई थी। हालांकि, सरकार ने तुरंत ही समूचे बोर्ड का नए सिरे से गठन कर तब सचिव का दायित्व देख रहीं दमयंती रावत को उनके मूल विभाग में भेजकर श्रमायुक्त दीप्ति सिंह को सचिव का जिम्मा सौंपा था।
यही नहीं, तब नए बोर्ड ने पिछले बोर्ड के तमाम फैसलों को भी पलट दिया था। अब सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के बाद एक रोज पहले ही बोर्ड के सचिव पद पर उपश्रमायुक्त मधु चौहान को नियुक्ति दे दी गई थी। यही नहीं, अब बोर्ड के अध्यक्ष की छुट्टी होने के बाद पूर्व में बोर्ड द्वारा हटाए गए कर्मचारियों की बहाली के आदेश श्रम मंत्री ने दिए हैं।


