Tuesday, January 20, 2026
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ऋषिगंगा तपोवन जलप्रलय में कई गरीब लोग बहे, अब परिवार को चिन्ता, आलम पुंडीर की चार बेटियां ढूंढ रही हैं अपने पिता की राह।

(वरिष्ठ पत्रकार शीशपाल गुसाईं की कलम से)

ऋत्विक कंपनी में इलेक्ट्रिशियन आलम सिंह पुंडीर,
ग्राम लोयल, पट्टी दोगी, नरेंद्रनगर, टिहरी गढ़वाल की डेड बॉडी 8 दिन बाद उस अभागी सुरंग से मिली थी। उसका शव घर लाया गया और अंत्येष्टि की गई। अब परिवार को चिंता है कि कैसे बढ़ेगी जिंदगी ? परिवार की जिम्मेदारी आलम के ही कंधों पर थी आलम के तीन और बड़े भाई हैं वह भी अलग अलग रहते हैं आलम के साथ उसकी मां और उसकी पत्नी और चार बेटियां रहती थीं। वही एक सहारा था, सहारा चमोली जल प्रलय ने छीन लिया।

चमोली जल प्रलय में करीब 206 लोग लापता है जिनमें साठ से लेकर 70 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। अकेले हिमाचल के 10 लोग लापता हैं कुछ के शव बरामद हो गए हैं। कुछ की स्थिति मध्यम वर्गीय है ज्यादातर के परिजनों की हालात बहुत गरीब हैं।

आलम पुंडीर की चार बेटियां हैं
1- आंचल( 14)
2-अंतरा (11)
3- काजल 08
4- अनन्या (02 )

तपोवन में कौन क्या काम करता है यह जानना भी जरूरी है।
एनटीपीसी के तपोवन चमोली में निर्माणाधीन 400 MW की जल विद्युत परियोजना में हैदराबाद की ऋत्विक कंपनी डैम कंस्ट्रक्शन का सिविल वर्क करती है, पटेल कंपनी ने इसका पावर हाउस बनाया है और हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी एचआरटी हेड रेस्ट टनल बना रही है।

आलम सिंह पुंडीर ऋत्विक कंपनी में 4 साल से इलेक्ट्रीशियन था उस अभागे रविवार 7 तारीख को आलम छुट्टी पर था लेकिन बड़े अधिकारी ने उसे बुलावा भेजा और वह टनल के अंदर आकर काम करें। छुट्टी कभी दूसरे दिन ले लेना। आलम ने आदेश का पालन किया वह उस टनल में नित्य की तरह काम पर चला गया। और कभी नहीं लौटा, प्रकृति के दैत्य ने उसे मार दिया, उसके साथियों को भी मार दिया। शायद उस अधिकारी को भी मार दिया जिसने आदेश दिया था।

आलम की घर की स्थिति गरीब है।निश्चित रूप से और लोगों की भी होगी। प्रकृति के इस भीषण तांडव से जो भी निर्दोष लोग मजदूर, कर्मचारी मरे हैं उनके परिवार आपके आसपास हैं तो, ऐसे परिवारो की मदद करनी चाहिए। यदि सक्षम हैं।

आलम की पत्नी
Sarojani Devi SBI , Goolar Dogi, Tehri Garhwal
Ac – 33534053698
IFSC – SBIN0006567

2019 में एक घटना घटी थीं। चापड़ा कटखेत में बबीता जगूड़ी के पिता ज्योति प्रसाद जगूड़ी और तारा देवी की 15 अप्रैल तारीख को सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। वह लोग बबीता की शादी 28 अप्रैल के सामान के लिए पीपल मंडी चिन्यालीसौड़ जा रहे थे। उसकी शादी कैसे होती ? और उसके दो भाई कैसे आगे पढ़ते हैं इसके लिए मैंने फेसबुक पर एक मार्मिक खबर लिखी थी। फिर देखते देखते लोगों की मदद के लिए हाथ उठे और बबीता की शादी हो कर रही उसके लिए लोगों ने उसके बैंक के अकाउंट में ढाई से ₹300000 जमा किए और उसके दो छोटे भाई प्रदीप और दीपक जो कक्षा 6 और 3 में पढ़ रहे थे उन्हें गांव में कौन पढ़ाता था ? इस तरह की कई भावुक खबर के बाद उन्हें टीएचडीसी के बोर्डिंग स्कूल में भागीरथी पुरम टिहरी गढ़वाल में पढ़ाने के लिए आगे आया। आज बबीता की जिंदगी सही ढंग से व्यतीत हो रही हैं। उसके छोटे भाई पढ़ रहे हैं।

इस घटना के बाद के कई लोगों के मेरे पास फोन कॉल आई कि, फलां फलां घटना को प्रकाश में ला कर मदद करें। मुझे कोई घटना दिल से क्लिक नहीं की थी। तपोवन की घटना और वहां से निकल रही लाशों ने सबको झकझोर दिया है।

इलेक्ट्रिशियन आलम सिंह पुंडीर की नौकरी और परिवार पर पूरा तीन-चार दिन तक शोध किया गया जिसमें वह दिल का राजा निकला लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है
छोटे-छोटे बच्चे छूट गए हैं उसके। गांव का हर बच्चा आलम को प्यार करता था। आज उसके बच्चों को कौन प्यार करेगा।

उनके बच्चों परिवार के लिए यदि कोई सक्षम व्यक्ति मदद करना चाहते हैं। तो आलम जी की पत्नी सरोजनी देवी के गांव के नजदीक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया गूलर दोगी के सीधे खाते में डाल दे।अन्य किसी को देने की जरूरत नहीं है।

 

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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