● जलविद्युत योजनायें बनाने से पूर्व ग्लेशियरों का हो बारीकी से अध्ययन।
● सरकार ने तत्परता तो दिखाई लेकिन मशीनें समय पर मंगाई जानी आवश्यक थी।
देहरादून (हि. डिस्कवर)
उत्तराखण्ड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा है कि ऋषिगंगा फ्लड आने से मारे गए व्यक्तियों के परिजनों को एनटीपीसी नौकरी दे ताकि उनकी आगामी दिनचर्या व पीड़ा में हम कुछ सहयोगी साबित हो सकें। उन्होंने कहा कि यह आपदा हमारे लिए आगे के लिए सबक है कि हम जलविद्युत योजनाओं पर दीर्घकालीन सोच के साथ काम करें व योजनाएं क्रियान्वयन में लाने से पूर्व ग्लेशियरों का व्यापक अध्ययन करें।
उन्होंने सरकार की तत्परता पर अप्रत्यक्ष वार करते हुए कहा कि सरकार ने तत्परता तो दिखाई लेकिन जिन मशीनों को अब चिनूक हैलीकॉप्टर से मंगवाया गया है वह बहुत पहले मंगवा दी जानी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि यह दुर्घटना हैंगिंग ग्लेशियर के कारण हुई है। यह कितना सच है यह कहना तो ठीक नहीं रहेगा लेकिन मैंने जो भी अनुभव इस दौरान वहां जाकर किये हैं उससे मेरा मत है कि भविष्य में कोई भी सरकार क्यों न हो उन्हें जलविद्युत परियोजनाओं के लिए स्वीकृत देने से पूर्व पूरी तरह से उस नदी घाटी व ग्लेशियर की रिसर्च करनी चाहिए।
ज्ञात हो कि आज पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह एक कांग्रेस शिष्ट मंडल को लेकर मुख्यमंत्री से मिले व उन्होंने 6 सूत्रीय मांग का ज्ञापन उन्हें सौंपा है। जो इस प्रकार हैं:-
1- जलविद्युत परियोजनाओं का सुरक्षा की दृष्टि से कराया जाय ऑडिट।
2-जल विद्युत परियोजनाओं में सेफ्टी पॉइंट का रखा जाए ध्यान।
3-रैणी, धापा गांव का किया जाय विस्थापन।
4-जलवायु परिवर्तन तथा विस्थापन जैसे मुद्दों पर सर्वदलीय सहमति के आधार पर सुझाव के साथ केंद्र से मिलकर किया जाय समस्या का समाधान।
5- चमोली आपदा में मारे गए लोगों के परिजनों को एनटीपीसी दे नौकरी।
6-ग्लेशियरों के व्यवहार में आ रहे परिवर्तन के अध्ययन विश्लेषण के लिए वैज्ञानिक संस्थानों की बनाई जाए समिति।

