देहरादून (हि. डिस्कवर)
उत्तराखंड आपदा न्यूनीकरण प्रबन्धन केंद्र के अधिशासी निदेशक डॉ. पीयूष रौतेला को गंगोत्री ग्लेशियर में बन रही कूड़े की कृत्रिम झील पर हाईकोर्ट के सख्त निर्देशकों के बाद शासन द्वारा उन्हें निलम्बित किया गया है! इस बात की पुष्टि प्रभारी सचिव (आपदा प्रबंधन) एसए मुरुगेशन द्वारा की गयी है!
ज्ञात हो कि एक जनहित याचिका इस म्स्बन्ध में हाई कोर्ट में दर्ज की गयी थी जिसके अनुसार गंगोत्री ग्लेशियर में कूड़े कचरे से पानी की निकासी में हो रही परेशानी व कृत्रिम झील बनने की बात कही गयी थी! याचिकाकर्ता द्वारा कहा गया था कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में कूड़े व कचरे के अम्बार से गंगोत्री ग्लेशियर के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, 2018 में दर्ज हुई इस जनहित याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा इसकी मॉनिटरिंग करके तीन महीने के अंदर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने को कहा था जिसे आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण द्वारा गम्भीरता से नहीं लिया गया!
उपरोक्त प्रकरण पर हाईकोर्ट ने सख्त रवैय्या अपनाते हुए अवमानना नोटिस जारी करते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट जा कोर्ट में पेश करने को कहा है! साथ ही कोर्ट ने कहा है कि सचिव आपदा प्रबंधन सरकारी नौकरी के योग्य नहीं है!

