(मनोज इष्टवाल)
इकहरे बदन का लम्बा छरहरा कुछ शर्मिला सा और कम बोलने वाला, हल्की मूछें अभी उगने को बेताब थी! आँखों पर ऑय मिरर और पैरों पर किट शूज, सफेद ड्रेसअप और कंधे पर लटका क्रिकेट बैट किट का पूरा सामान! यही पहली मर्तबा मैंने प्रणेश असवाल को देखते हुए उनके पिता ठाकुर रतन सिंह असवाल से प्रश्न किया था! यह हैंडसम कौन है? ;उन्होंने मुस्कराते हुए कहा- पंडा जी मजाक अच्छा कर लेते हो! ये हमारे साहबजादे हैं ! इनका पढ़ाई में उतना इंटरेस्ट नहीं है जितना क्रिकेट में!
उसके बाद कई बार प्रणेश से सिर्फ इतनी ही मुलाक़ात हुई कि जब भी घर जाता वह नमस्ते करते व अपने कमरे का रुख कर लेते! लेकिन बर्ष 2017 में समय साक्ष्य प्रकाशन द्वारा आयोजित “लिटरेचर फेस्टिवल” में अचानक मुझे प्रणेश गुच्छुपानी के उस बलखाती सी नदी में सारस के झुण्ड के बीच अपने कैमरे को सम्भाले हुए दिखे! तब मैं फोटोग्राफी सेक्शन के जजमेंट की टीम में से एक था! मैंने प्रवीन भट्ट से कहा कि यह तो अपने ठाकुर रतन सिंह असवाल के प्रणेश लगते हैं! उन्होंने कहा आपने सही पहचाना! मुझे आश्चर्य हुआ कि कल तक जो लड़का बैट पैड बाल के सम्पर्क में था आज अचानक कैसे कैमरे से दोस्ती कर बैठा! खैर इस फोटो प्रतियोगिता में शायद बेटे से ज्यादा पिता को उम्मीद थी कि प्रणेश अवश्य पुरस्कार लिस्ट के टॉप में रहेंगे लेकिन यह प्रणेश के लिए आगे बढ़ने की एक सीढ़ी मात्र साबित हुई क्योंकि फोटोग्राफी जजमेंट के जजों कि टीम में पूरे प्रदेश के प्रख्यात फोटोग्राफर्स और फोटो प्रतियोगिता में शामिल हुए बर्षों से वाइल्ड फोटोग्राफी कर रहे युवा शामिल थे!
बस फिर क्या था प्रणेश ने यहीं से दृढ निश्चय कर लिया कि अब चाहे जो हो जाय वह फोटोग्राफी को हि अपना प्रोफेशन बनायेंगे और अगले हि बर्ष उन्होंने इसी “लिटरेचर फेस्टिवल” में प्रथम स्थान अर्जित कर अपने को साबित भी कर दिया!
इस दौरान प्रणेश ने प्रोफेशनल फोटोग्राफी का प्रशिक्षण भी लिया और अपनी टीम के साथ कई शोर्ट फिल्म व फोटो स्लाइड्स भी तैयार किया! बर्ष 2020 कि शुरुआत में हि प्रणेश असवाल को मुझे करीब से समझने का मौका मिला क्योंकि वह हमारे साथ “हिमालयन दिग्दर्शन ढाकर शोध यात्रा” के सदस्य के रूप में जुड़ा! पांच दिन की इस यात्रा में अब प्रणेश की हलकी मूछें व दाढ़ी भी उग आई थी! मेरी नजर अन्य फोटोग्राफर्स पर कम अपितु प्रणेश पर ज्यादा थी क्योंकि रतन असवाल मुझे बोल चुके थे कि प्रणेश अब इसी को अपना प्रोफेशन बनाकर आगे बढना चाहता है! प्रणेश में पहली योग्यता तो मैंने तब महसूस की, जब वह अपनी बिषय-वस्तु पर काम करने के लिए चुपचाप निकल जाता और फोटो प्रोफेशन से जुड़े फोटोग्राफर्स कि नजर बचाते हुए अपने खींचे फोटो हाईड करने के लिए उसका कार्ड रिमूव कर देता या फिर अपनी फोटो सार्वजनिक करने में कतराता रहा! यह एक धूर्त और चालाक फोटोग्राफर की क्वालिटी कही जा सकती है क्योंकि वह कभी नहीं चाहता कि जिस एंगल से उसने फोटो खींचा उसी एंगल से कोई उसे कॉपी करे! यह एक सोची समझी रणनीति होती है! ऐसा ही गुण मुझे सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर भूमेश भारती में भी दिखे! भूमेश मेरे साथ कुमाऊं यात्रा पर थे और एक रात जब हम रात्री बॉन फायर पर बाहर बैठे तो देखा आसमान में असंख्य तारे झिलमिला रहे हैं! यह फारेस्ट गेस्ट हाउस बिनसर पर्वत श्रृंखला का बेहद खूबसूरत बंगला था! सोने के लिए अभी हम बिस्तर में घुसे ही थे कि भूमेश अपना कैमरा उठाये बाहर निकले व बोले आता हूँ इष्टवाल जी! सुबह देखा तो पाया भूमेश का कैमरा रात भर बिनसर के जंगल की ठंड खाता एक स्थान पर पड़ा रात भर तारों की असंख्य फोटो खींचता रहा!
प्रणेश ने मात्र नौ महीनों में यानि मार्च 2020 के बाद से अब तक फोटोग्राफी में नया आयाम हासिल कर दिया है ! प्रणेश असवाल ने सुप्रसिद्ध रंग व नाट्यकर्मी श्रीमती लक्ष्मी रावत के प्रज्ञा आर्ट्स प्रोडक्शन के साथ जुड़कर अब फोटोग्राफी में शौर्य – गाथा लिखनी शुरू कर दी है। यह शौर्य – गाथा भले ही श्रीमती लक्ष्मी रावत की स्क्रिप्ट “तीलू रौतेली” की हो लेकिन इस शौर्यगाथ का बयां करती प्रणेश की फोटोग्राफी मन मोह लेती है। स्वयं लक्ष्मी रावत कहती हैं कि “उन्होंने शौर्यगाथा (उत्तराखंड की मिट्टी की) की संकल्पना करते समय इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखा है कि प्रज्ञा आर्ट्स थियेटर ग्रुप व प्रज्ञा आर्ट्स प्रोडक्शन का पहला महतवपूर्ण मकसद कला व संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। शौर्य, स्वाभिमान, देशभक्ति और सन्तोष, इन्ही गुणों से सराबोर है उत्तराखण्ड का अतीत, वर्तमान और यहां की गौरव गाथाएं। ऐसे में प्रज्ञा आर्ट्स थियेटर ग्रुप के साथ एक नवयुवक का नाम और जुड़ गया है..प्रणेश असवाल। प्रणेश ने हाल ही में फोटोग्राफी कोर्स किया है। उन्होंने प्रज्ञा आर्ट्स के कलेंडर के लिए फोटो खींचने की जिम्मेदारी खुद सम्भालने का फैसला किया है।”
बहरहाल प्रज्ञा आर्ट्स थियेटर ग्रुप व प्रज्ञा आर्ट्स प्रोडक्शन का कलेंडर जारी होते ही उसमें अंकित बोलती तस्वीरों ने यह तो साबित कर ही दिया है कि यह युवा लम्बी रेस का घोड़ा साबित होगा व फोटोग्राफी में नाम अवश्य कमाएगा। शाबाश…..शुभकामनाएं प्रणेश…..!



