Wednesday, March 11, 2026
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जौनसार बावर क्षेत्र की बूढ़ी दिवाली के अनमोल पल। जूड़ा नृत्य में घुंडिया रासो नृत्य का अनमोल मिश्रण।

(मनोज इष्टवाल)

यह पोशाक सिर्फ खास अवसरों के लिए ही बनाई या पहनी जाती थी। मूलतः यह पोशाक यौद्धा की है व रण संग्राम में उतरते समय यह राजपूती बाना पहनना यहां की बहादुर कौम अपना गर्व समझती थी। कालांतर में विभिन्न विधाओं से गुजरती हुई यह पोशाक वर्तमान में जौनसार बावर क्षेत्र में दिवाली के पर्व पर वे कांडोई भरम क्षेत्र (जौनसार बावर) में यह बिस्सू मेले व दिवाली के समय पहनी जाती है।

हाथ में तलवार या फरसा लिए युद्ध कला की परिपूर्णता दर्शाता जूड़ा नृत्य बेहद मन मोहक होता है।
आज से 30 बर्ष पूर्व तक जूड़ा पोशाक के साथ एक प्रचलन जुड़ा था कि जो भी यह पोशाक धारण करता था उसकी मृत्यु के साथ उसकी पोशाक भी चिता में जलाई जाती थी। यह एक वीर पुरुष को दी गयी श्रद्धांजलि समझी जाती थी।
मेरा अनुरोध है जौनसार बावर के समाज से अगर जूड़ा नृत्य या पोशाक से जुड़ी और भी कोई जानकारी उनके पास हो तो कृपया साझा करें।

 

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