(गुनानन्द जखमोला)
– लावारिश हो गयी प्रदेश कांग्रेस, बेसहारा हो गये कांग्रेसी।
– मिशन 2022: आप-उक्रांद का गठजोड़ हुआ तो दस सीटों को तरसेगी कांग्रेस।
कल यानी 18 अक्टूबर को यूपी के तीन बार सीएम रहे और उत्तराखंड के पूर्व सीएम एनडी तिवारी की जयंती और पुण्यतिथि थी। कांग्रेसी नेता हरदा और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने उनको उनकी जयंती या पुण्यतिथि पर याद किया। यह बड़ी बात है। संभवतः खानापूर्ति की गई हो या उन्हें भुला देने का प्रायश्चित कर रहे हों। कांग्रेस ने अपने इस दिग्गज नेता को भुला दिया। आज जब कांग्रेस बेसहारा है, लावारिश है और वेंटीलेटर पर है तो शायद कांग्रेसियों को एनडी की याद आ रही हो, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।
हैदराबाद राजभवन प्रकरण के बाद कांग्रेस और कांग्रेसी एनडी से पीछा छुड़ाते रहे। यानी उनके जीवन संघर्ष और कांग्रेस को अर्पित जीवन को भुला दिया गया। एनडी की कमजोरी महिला प्रेम थी, लेकिन यह भी सच है कि आज की राजनीति में अधिकांश नेताओं का महिला प्रेेम छिपा नहीं है। भाजपा के एक विधायक महेश नेगी तो आज भी यौन शोषण के आरोपित हैं। उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि कई नेताओं की कई-कई प्रेमिकाएं हैं। प्रेमिकाओं ने भी अपने बच्चों के नाम उन नेताओं से बिना शादी के ही जोड़ दिये हैं, लेकिन समाज में कहीं हो-हल्ला नहंी है। राजनीतिक मंच पर रोज द्रोपदी का चीरहरण हो रहा है और सत्ता धृतराष्ट्र बनी है। अब कई प्रेमिकाएं होना नेताओं का स्टेटस सिंबल बन गया है। ये निकम्मे, भ्रष्ट और अययाश नेता जनहित में तो कोई काम नहंी करते, वरन जनता के लिए जारी धनराशि का कमीशन खा कर अपनी प्रेमिकाओं पर लुटा देते हैं।
कम से कम एनडी ने राज्य के लिए कई विकास कार्य तो किये।एनडी द्वारा स्थापित मदर्स इंडस्ट्रीज को बंद करने में जुटे हैं उनके उत्तराधिकारी सीएम। पिछले 13 साल में कोई भी सीएम रहा हो, बता दे कि कितना विकास किया? कितनी मदर इंडस्ट्रीज लगाई, अपने परिवार का भला छोड़कर जनता के लिए क्या किया? विजय बहुगुणा जब कांग्रेस में थे, सीएम बने, बेटे को राजनीति में स्थापित करने में ही जुटे रहे। जब दाल नहीं गली तो भाजपा में शामिल हो गये। निशंक ने क्या किया? कितने घोटालों में उनको आरोपी बनाया गया। सबसे ईमानदार जनरल खंडूड़ी का बैंड सारंगी ने बजा दिया। जनरल जीवन की सांध्यवेला में वो पुत्रमोह में धृतराष्ट्र बन बैठे। बेटी ऋतु खंडूड़ी को भाजपा पर और बेटे मनीष को कांग्रेस पर थोप दिया यानी दोनों हाथों में लड्डू।
कांग्रेस आज बेसहारा है। आम आदमी पार्टी की धमक के बाद कांग्रेसियों को मनोबल टूट गया है। आप ने उत्तराखंड में झूठा सर्वे ही दिखा कर कांग्रेस के मुकाबले अधिक बढ़त हासिल कर ली है। भाजपा कांग्रेस को कोई भाव नहंी देती है, लेकिन आप को भाजपा बहुत गंभीरता से ले रही है। ऐसे में यदि यूकेडी-आप गठबंधन हो जाएं तो 2022 में भाजपा बनाम आप के बीच लड़ाई सिमट जाएगी। कारण, कांग्रेस का कमजोर और विजनलेस नेतृत्व है। इसके अलावा कांग्रेसियों के निजी स्वार्थ ने भी पार्टी को भारी क्षति पहुंचाई है। पूर्व सीएम हरदा की सारी लड़ाई अब अपनी बेटी, बेटा और पत्नी को राजनीति में स्थापित करने की रह गयी है। प्रीतम सिंह चकराता से बाहर नहंी निकले। सूर्यकांत धस्माना आंदोलन विरोधी कालिख को नहीं छुड़ा पा रहे। इंदिरा हृदयेश का सूर्य अस्त हो चुका है और वो भी अपने बेटे को स्थापित करने में जुटी है। किशोर की सोच कभी बढ़ी ही नहीं, न ही नेतृत्व क्षमता का विकास हुआ। गणेश गोदियाल गंदी राजनीति का शिकार हो गये। एक-दो और नेता छूट गये होंगे, बाकी कांग्रेसी महज नामलेवा हैं। यह शापित कांग्रेस है क्योंकि इन्होंने एनडी जैसे नेता को भुला दिया।

