Wednesday, March 18, 2026
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अब उत्तराखंड के कब्जाधारी व पट्टेधारियों के नाम होगी सर्किल रेट पर जमीन।

देहरादून (हि. डिस्कवर)

मैं तो कहूंगा कि ये तो होना ही था। शुरुआत तो शायद अभी मैदानी भू-भागों में ही हुई है! इसे ट्रायल ही समझ लीजिएगा क्योंकि 2016 में बनी उपसमिति अब जाकर 4 साल बाद इसे उजागर ही नहीं कर रही है  बल्कि क्रियान्वयन में भी आ गयी है। उत्तराखंड में वर्ग तीन और वर्ग चार के लोगों को राहत मिलने के आसार बन गए हैं। इस मामले को लेकर गठित कैबिनेट की उप समिति ने 2016 के सर्किल रेट के आधार पर इस तरह की भूमि के कब्जाधारकों व पट्टेधारकों को मालिकाना हक देने पर सहमति जताई है। यह प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में लाया जाएगा।

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक की अध्यक्षता में हुई बैठक में वर्ग तीन की भूमि के अवैध कब्जाधारकों और वर्ग चार की भूमि के पट्टेदारों और कब्जाधारकों को भूमिधरी का अधिकार देने पर बातचीत हुई।इससे संबंधित शासनादेश 2016 में जारी किया गया था, जो एक-एक साल के लिए बढ़या जाता रहा। अंतिम शासनादेश एक साल पहले जारी हुआ था, जिसकी अवधि 25 फरवरी 2020 को समाप्त हो चुकी है। इस उप समिति में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे सदस्य के रूप में मौजूद रहे।

ज्ञात ही कि प्रदेश के कई जिलों में आज भी गैर रजिस्ट्री वाली भूमि पर हजारों परिवार काबिज हैं। इस तरह की भूमि पर बसे परिवारों को भूमिधरी का अधिकार पूर्व में सरकार ने वर्ष 2000 के सर्किल रेट के आधार पर देना तय किया था। 2016 में यह अधिकार 2012 के सर्किल रेट के आधार पर कर दिया। अब भी इस मामले में कई आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। प्रदेश के मैदानी जिलों में इस तरह के अधिक मामले हैं। प्रदेश सरकार पहले भी इस तरह की भूमि के पट्टेधारकों, अवैध कब्जाधारकों को भूमिधरी का अधिकार देने के विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर चुकी है। कैबिनेट की उप समिति की ओर से इस मामले को कैबिनेट में रखने का फैसला किया गया है।

बहरहाल सरकारी स्तर पर इस खबर का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन आम जन को यह कौन समझाएं यह उन राजनीतिज्ञों की साजिश नहीं है जिन नेताओं ने अपना वोट बैंक बढाने के लिए राजधानी देहरादून, हरिद्वार व उधमसिंह नगर में रोहिंगा मुस्लिमों से लेकर कई आराजक तत्वों की बसासत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह साजिश हमारे अपनों की है जो चंद खनकते सिक्कों में बिक गए और हजारों हजार शरणार्थी इस प्रदेश की भूमि कब्जाने में कामयाब हुए। अब आप ही बताओ कि वर्ग तीन-चार की भूमि के अवैध कब्जाधारकों और वर्ग चार की भूमि के पट्टेदारों और कब्जाधारकों को भूमिधरी का अधिकार के लिए उपसमिति में जो नेता सरकार ने बैठाए हैं वह कहाँ गलत कर रहे हैं क्योंकि उन्हें तो प्रदेश के राजस्व वृद्धि को देखना ही होगा! एक आकलन के मुताबिक देहरादून में वर्तमान में डेढ़ हजार हेक्टेयर से ज्यादा सरकारी भूमि पर 20 हजार से अधिक अवैध कब्जे हैं। भला घर आये मेहमानों को कौन धक्का मारकर बाहर करता है, वैसे भी अपने प्रदेश में “अतिथि देवो भव: की परम्परा रही है!

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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