मणिपुर/नई दिल्ली 20 अगस्त 2020 (हि. डिस्कवर)
कांग्रेस के लिए यह चौंका देने वाली खबर है, या फिर यूँ कहें कि धीरे-धीरे जिस तरह कांग्रेस के बीच भाजपा की सेंधमारी चल रही है उससे तो यही लगता है कि एक बड़ी राष्ट्रीय पार्टी आने वाले समय में कहीं क्षेत्रीय पार्टी बन कर न रह जाय! फिलहाल कांग्रेस में अभी बर्षों तक ऐसा दमखम तो है कि वह समाजवादी व बहुजन समाजवाद जैसी पार्टियों की तरह राष्ट्रीय स्तर पर नहीं लुढ़केगी!
हाल ही में मणिपुर विधानसभा से इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के पांच पूर्व विधायकों ने विगत बुधवार को राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की उपस्थिति में यहां भाजपा का दामन थाम लिया। इनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के भतीजे हेनरी ओकराम भी शामिल हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद सभी ने भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात की।
भाजपा के पार्टी महासचिव राम माधव ने कहा कि ‘मणिपुर की बीरेन सिंह सरकार को अब कोई खतरा नहीं है। वह न सिर्फ अपना कार्यकाल पूरा करेगी, बल्कि सत्ता में वापसी भी करेगी। राज्य सरकार को कुल 47 में से 34 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। 60 सदस्यीय विधानसभा की 13 सीटें अभी खाली हैं।’ उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस मणिपुर में वही काम कर रही थी, जिसका आरोप वह राजस्थान में हमारी पार्टी पर लगा रही थी।
ज्ञात हो कि इस से पूर्व राजस्थान में कांग्रेस में बड़ी उथल-पुथल रही व वहां सरकार बचाने के लिए कांग्रेस को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा! अब यही खेल मणिपुर में भी कांग्रेस द्वारा खेला जा रहा है लेकिन यह कांग्रेस का दुर्भाग्य है कि उसका हर पलड़ा उल्टा पड़ रहा है!

