Monday, March 16, 2026
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जानिये कौन हैं फ्रांस से 7000 किमी. राफेल उडाकर भारत लाने वाले देश के गगनवीर!

(मनोज इष्टवाल)

फ़्रांस के साथ रक्षा सौदों सम्बन्धी समझौते यूँ तो डेढ़ दशक के आस-पास से होते आये हैं. बर्ष 2007 में वायुसेना की ओर से मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) खरीदने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय के माध्यम से तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजा गया था, जिसके बाद भारत सरकार द्वारा  126 लड़ाकू विमानों को खरीदने का टेंडर जारी किया इनमें अमेरिका के बोइंग F/A-18 सुपर हॉरनेट, फ्रांस का Dassault Rafale, ब्रिटेन का यूरोफाइटर, अमेरिका का लॉकहीड मार्टिन F-16 फाल्‍कन, रूस का मिखोयान MIG-35 और स्वीडन के साब  JAS-39 ग्रिपेन जैसे एयरक्राफ्ट शामिल थे लेकिन आखिरकार फ्रांस के राफेल ने इसमें अपनी बाजी मार ही दी! भले ही यह डील यूपीए सरकार के दौर में 2014 तक अप्राय कारणों के चलते हो नहीं पाई!

चुनाव जीतने के तुरंत बाद नरेंद्र मोदी जैसे ही प्रधानमंत्री बने उन्होंने देश के सैनिकों व रक्षा सौदों की फाइलें खंगालनी शुरू कर दी!  फ्रांस से राफेल डील की असमंजस स्थिति  को देखते हुए 10 अप्रैल 2015 को पीएम मोदी फ्रांस की राजधानी पेरिस का दौरा किया और उड़ान के लिए तैयार 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के अपनी सरकार के फैसले का ऐलान किया। जून 2015 में रक्षा मंत्रालय ने 126 एयरक्राफ्ट खरीदने का पुनः टेंडर निकाला, लेकिन उस पर त्वरित कार्यवाही नहीं हो पाई।

26 जनवरी 2016 में  गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद भारत आए। इससे पूर्व 24 जनवरी को  रिलायंस इंटरटेनमेंट ने प्रेस रिलीज जारी किया जिसमें बताया गया कि ओलांद व भारत सरकार के बीच राफेल विमान खरीदने के एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं जिसे इंडो-फ्रेंच ज्वाइंट प्रोडक्शन (NOMBER ONE) नाम दिया गया और राफेल में अमूलचूक परिवर्तन भारत सरकार के दिशा निर्देश पर किये जाने की सहमती जताई गयी।

भारत के तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर और फ्रांस के बीच सितम्बर 2016 में  36 राफेल विमान खरीदने की फाइनल डील पर दस्तखत हुए।  इन विमानों की कीमत 7.87 बिलियन यूरो रखी गई।  इस डील के मुताबिक इन विमानों की डिलीवरी सितंबर 2018 से शुरू होने की बात कही गई लेकिन विपक्ष के हंगामे के साथ-साथ इसकी वर्तमान कीमत में बढोत्तरी हुई है और अब यह सौदा 7.9 बिलियन यूरो में तय हुआ है जो भारतीय मुद्रा अनुसार 59 हजार करोड़ की धनराशी हुई ।

बहरहाल  विगत 27 जुलाई को 7 भारतीय पायलट्स ने पांच  राफेल विमान फ्रांस से भारत के लिए  7000 किमी  की उड़ान भरी व   विगत 29 जुलाई 2020  दोपहर 3.15 पर अंबाला एयरफोर्स बेस पर 5 राफेल फाइटर जेट टेक ऑफ किया। यह पहला अवसर था जब किसी रक्षा सौदे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी कवरेज मिली और करोड़ों हिन्दुस्तानियों ने बेसब्री से इन फाइटर जेट के सकुशल भारत पहुँचने का बेसब्री से इतंजार किया। 28 जुलाई 2020 को घटी एक घटना ने अन्तराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान तब अपनी ओर खींच दिया जब  ईरान द्वारा युद्धअभ्यास के दौरान तीन मिसाइल दागी गयी, उस दौरान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अल धफरा एयरबेस पर यूएस और फ्रांसीसी सेना के लड़ाकू विमान खड़े हुए हैं, मिसाईलें एयरबेस के बेहद निकट आकर गिरी।

राफेल विमान को लेकर फ्रांस और भारत के बीच डील करवाने, वक्त पर इन विमानों की डिलीवरी कराने में जम्मू-कश्मीर के रहने वाले एयर कॉमोडोर हिलाल अहमद की भी जमकर तारीफ हो रही है। वो फ्रांस में भारतीय वायुसेना से अटैच हैं, डील करवाने में उनका काफी अहम योगदान रहा।

यह तो है राफेल की संक्षिप्त जानकरी ! आइये अब जानते हैं उन भारतीय गगनवीर पायलटों के बारे में जो इन विमानों को उड़ाकर फ्रांस से भारत के अम्बाला एयरबेस लाये! इन पायलट्स में 17 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह, विंग कमांडर एमके सिंह, ग्रुप कैप्टन आर कटारिया, विंग कमांडर अभिषेक त्रिपाठी, विंग कमांडर मनीष सिंह, विंग कमांडर सिद्धू और विंग कमांडर अरुण कुमार शामिल हैं।

ग्रुप कैप्टन रोहित कटारिया गुरुग्राम हरियाणा के रहनेवाले हैं। उनके पिता भी सेना में ऑफिसर थे। रिटायर्ड कर्नल के बेटे रोहित की पढ़ाई झारखंड के तिलैया सैनिक स्कूल से हुई है। रोहित की मां स्कूल टीचर रही हैं। रोहित 2003 में वायुसेना में कमिशन हुए थे और फ्रांस ट्रेनिंग के लिए जाने से पहले वो ग्वालियर में पोस्टेड थे। वो राफेल से पहले मिराज और सुखोई फाइटर जेट उड़ा चुके हैं।  5 विमानों के बैच में सबसे पहले विमान काे वायुसेना की 17वीं गोल्डन एरो स्क्वॉड्रन के कमांडिंग ऑफिसर और शौर्य चक्र विजेता ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह ने लैंड करवाया। ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह किसी परिचय के माेहताज नहीं। खराब इंजन के बावजूद जान जोखिम में डालकर विमान को सुरक्षित लैंड कराने के लिए उन्हें शौर्य चक्र से नवाजा गया था। घटना 23 सितंबर 2008 की है। तब वे स्क्वाड्रन लीडर थे।

राफेल विमान को लेकर फ्रांस और भारत के बीच डील करवाने, वक्त पर इन विमानों की डिलीवरी कराने में जम्मू-कश्मीर के रहने वाले एयर कॉमोडोर हिलाल अहमद की भी जमकर तारीफ हो रही है। वो फ्रांस में भारतीय वायुसेना से अटैच हैं, डील करवाने में उनका काफी अहम योगदान रहा, यह पहले भारतीय हैं जिन्होंने राफेल सर्वप्रथम उड़ाया है।

विंग कमांडर अभिषेक त्रिपाठी राफेल को अंबाला लाएंगे। उनका परिवार जयपुर में रहता है, जहां वो बड़े हुए और अपनी पढ़ाई पूरी की। लेकिन उनके पैतृक गांव हरदोई में भी खुशी का माहौल है और हर कोई उनपर गर्व कर रहा है। यहां रहने वाले रिश्तेदारों ने अभिषेक की तारीफ की और गर्व जताया।

विंग कमांडर अभिषेक त्रिपाठी भी उन पायलट्स में शामिल हैं जो राफेल उड़ाकर भारत पहुंचे। अभिषेक राजस्थान के जालौर में पैदा हुए जबकि उनका परिवार हरदोई उप्र का रहने वाला है। उनके पिता अनिल त्रिपाठी बैंक में जॉब करते हैं जबकि मां सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट में। उनके भाई अनुभव त्रिपाठी यूएस में इंजीनियर हैं। पत्नी प्रियंका लखनऊ की रहने वाली हैं। जालौर के ही स्कूल में पढ़ाई करने के बाद अभिषेक 11वीं-12वीं की पढ़ाई करने जयपुर आ गए थे। उसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी दिल्ली से एमएससी किया। 2001 में एनडीए में गए और फिर एयरफोर्स एकेडमी से फाइटर पायलट बतौर कमीशन हुए।

हिलाल अहमद राथर राफेल एयरक्राफ्ट को उड़ानेवाले पहले भारतीय हैं। एयर कमोडोर हिलाल अहमद राथर कश्मीर के आतंकवाद ग्रस्त इलाके अनंतनाग से हैं। 52 वर्षीय हिलाल अहमद राथर फिलहाल फ्रांस में एयर अताशे हैं।

कश्मीर के रहने वाले एयर कमोडोर हिलाल अहमद राथर के पिता पुलिस में डीएसपी थे। हिलाल अहमद राथर राफेल को उड़ाने वाले पहले भारतीय हैं। एयर कमोडोर हिलाल अहमद राथर कश्मीर के आतंकवाद ग्रस्त इलाके अनंतनाग से हैं। 52 वर्षीय हिलाल अहमद राथर फिलहाल फ्रांस में एयर अताशे हैं। कश्मीर में पैदा हुए हिलाल के पिता मोहम्मद अब्दुल्ला राथर जम्मू कश्मीर पुलिस में डीएसपी थे। उनकी तीन बहनें हैं जबकि वो मोहम्मद अब्दुल्ला राथर के इकलौते बेटे हैं।

उनकी पढ़ाई जम्मू के पास नगरोटा के सैनिक स्कूल में हुई और वो 1988 में वायुसेना में बतौर फाइटर पायलेट कमीशन हुए। डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने एयर वॉर कॉलेज अमेरिका से भी पढ़ाई की। एनडीए से पास होते वक्त वो स्वार्ड ऑफ ऑनर हासिल कर चुके हैं। 3000 घंटे के बिना किसी एक्सीडेंट वाली फ्लाइंग रिकॉर्ड उनके पास हैं। वो मिराज-200, मिग-21 और किरन एयरक्राफ्ट उड़ा चुके हैं। अब इस लिस्ट में राफेल भी जुड़ गया है। वो ग्वालियर में मिराज की स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर भी रह चुके हैं।

विंग कमांडर मनीष सिंह उप्र के बलिया के रहने वाले हैं। राफेल की ट्रेनिंग के लिए फ्रांस जाने से पहले वो गोरखपुर में पोस्टेड थे और उससे पहले अंबाला और जामनगर। उनके भाई अनीश नौसेना में हैं। जबकि पिता, दादा फौज से रिटायर्ड हैं। मनीष की पढ़ाई हरियाणा के कुंजपुरा सैनिक स्कूल से हुई है। इसके बाद वो एनडीए में सिलेक्ट हुए और 2003 में बतौर फाइटर पायलट वायुसेना में कमीशन हुए। मनीष की शुरुआती पढ़ाई गांव के ही एक प्राइवेट स्कूल में हुई और फिर छठी क्लास के बाद वो सैनिक स्कूल चले गए।

विंग कमांडरअरुण कुमार उन पांच पायलट्स में शामिल हैं जो राफेल लेकर भारत आए। 15 साल से एयरफोर्स में सर्विस कर रहे अरुण कुमार 1994 में विजयपुर मिलिट्री स्कूल में पढ़ने चले गए। 2002 में वो वायुसेना में कमिशन हुए।

 

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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