● चीन बहादुर नही शातिर है ।
●1962 की लड़ाई में भारतीर सेना के असलाह की कमी थी पर शौर्य की नहीं ।
●प्रथम गढ़वाल में रह चुके जांबाज सैनिक रहे और आर्नरी कैप्टन 89 वर्षीय दलीप सिंह दानू बोले ।●बड़ाहोती सीमा पर पिछले 5 साल में चीन 9 बार घुसपैठ की हिमाकत कर चुका है।
(गोपेश्वर क्रांति भट्ट)
चीन बार्डर पर भारत के सैनिकों को शहीद करने की खबर से 89 वर्षीय आर्नली कैप्टन दलीप सिंह दानू खासे आक्रोशित हैं। 1962 के भारत चीन युद्ध में प्रथम गढ़वाल के जांबाज सैनिक रहे दिलीप सिंह दानू की बूढ़ी हड्डियों में चीन की ताजा हरकत से इस कदर गुस्सा है कि वे कहते हैं कि अभी भी मौका मिले तो अभी भी चीन से लड़ सकता हूं।
(ये हैं 1962 की भारत चीन लड़ाई के योद्धा
आर्नरी कैप्टेन दलीप सिंह दानू)
1962 के भारत चीन युद्ध के बारे में बताते हुये कैप्टेन दलीप सिंह दानू जो चमोली जिले वैरास कुंड के रहने वाले हैं, और अब गोपेश्वर में अपने बेटे के साथ रहते हैं। वे कहते हैं कि चीन बहादुर नहीं शातिर है। वह एक तरफ बातचीत की बात करता है और पीछे से वार करने आ जाता है। 1962 की लड़ाई के बारे वे कहते हैं कि वह युद्ध 14 दिन चला। हमारे फोर्थ गढ़वाल के सैकडों जवान शहीद हुये लेकिन जैसे ही हमारी रायल गढ़वाल की प्रथम गढ़वाल राइफल नेफा पहुंचीं चीन पीछे हट गया।

दानू कहते हैं चीन केवल हथियारों से लड़ सकता है। सैन्य ताकत से नहीं। वे कहते हैं कि अब हम 1962 वाला भारत नहीं नये दौर के भारत हैं। चीन को उसकी चाल और वार से जबाब देना चाहिये। दिलीप सिंह दानू कहते हैं चीन दबाब बनाने की युद्ध शैली में लड़ता है। वे कहते हैं कि चीन जानता है कि उसकी भारत से लगी अलग-अलग सीमा पर भारत की सेना के और अर्ध सैनिक बलों की परिस्थिति आने पर क्या वार स्ट्रेटजी हो सकती है। दानू कहते हैं कि 1962 के भारत चीन युद्ध में भारतीय सेना की गढ़वाल और कुमायूं रेजीमेंट के पास आधुनिक हथियार होते तो इतिहास कुछ और ही होता। कैप्टन दानू कहते हैं कि 1962 में हम सिक्कम से जैसे ही तेजपुर पहुंचे तो चीन ने अपने पैर पीछे कर लिये।
ड्रेगन की भारत चीन सीमा से लगे भारत के उत्तराखंड की सीमा पर भी नजर है। चमोली के बाड़ाहोती में पिछले 5 सालों में वह 9 बार घुसपैठ करने की हिमाकत कर चुका है। कभी उसके हैलीकाप्टर भारतीय सीमा में आने की कोशिश करते हैं तो कभी उसकी लाल सेना के जवान आने की कोशिश करते हैं। माणा पीक के माइल स्टोन पर भी चीन छेड़छाड़ की कोशिश एक बार कर चुका है ।
चीन सीमा पर भारत के उत्तराखंड की 345 किमी की सरहद है, आईटीबीपी इसकी निगेहबानी करती है । कभी भारतीय सेना तन जुन ला तक रहती थी ।
सीमा चौकियों तक भारत की मजबूत सड़क और संसाधन से चीन घबराया हुआ है। सेवानिवृत लेफ्टीनेट जनरल गम्भीर सिंह नेगी कहते हैं चीन की हरकत पर हर तरफ से नजर रखने की जरूरत है।
बाड़ाहोती एक ऐसा घास का मैदान है जो 10 किमी में फैला है। भारतीय सेना की रिम खिम में यहां सीमा चौकी है। भारतीय प्रशासन का दल हर साल चार बार अपनी सीमा बड़ाहोती की विजिट पर जाता है ।

