Thursday, May 7, 2026
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राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान देहरादून द्वारा ’’योग तथा आयुर्वेद जीवन पद्धति’’ पर आयोजित वेबीनार ।

राजभवन देहरादून 11 जून, 2020(हि. डिस्कवर)।
राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने शुक्रवार को राजभवन में राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन संस्थान, देहरादून द्वारा  ’’योग तथा आयुर्वेद जीवन पद्धति’’ पर आयोजित वेबीनार का शुभारंभ किया।
 
राज्यपाल ने कहा कि आज पूरा विश्व योग एवं आयुर्वेद को अपना रहा है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली का होना बहुत आवश्यक है। योग एवं आयुर्वेद मानव की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में विशेष योगदान देते हंै। भारत में तैयार की गई आयुर्वेदिक औषधियों और काढ़े की मांग इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में पूरे विश्व में बढ़ गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार अमेजन जैसी आॅन लाइन कंपनियों के भारत में व्यापार का एक बड़ा भाग आयुर्वेद उत्पादों का है।  आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़े-बड़े नेता और विश्व प्रसिद्ध लोग भी योग एवं आयुर्वेद को प्रोत्साहित व प्रचारित कर रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि आज कोरोना महामारी के कारण हर व्यक्ति तनाव ग्रस्त है तो ध्यान, श्वास नियंत्रण व प्राणायाम, जीवन में सकारात्मक संतुलन स्थापित करने में सहायक हैं। योगाभ्यास का परम उद्देश्य, मस्तिष्क व शरीर का बाहरी परिस्थिति व प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करना है। योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि तनाव, अवसाद व नैराश्य जैसी समस्याओं को दूर करने में भी सहायक है। उत्तराखण्ड के आयुष विभाग ने भी एक आयुर्वेदिक काढ़ा बनाया है जिसका नियमित उपयोग निश्चित रूप से लाभकारी होगा। इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन संस्थान द्वारा  प्रकाशित तीन पुस्तकों ‘‘श्री हनुमान चालीसा, श्री शिव ताडंव  स़्तोत्र और दिव्यांगता भारतीय परिप्रेक्ष्य में‘‘ का विमोचन भी किया। यह पुस्तकें बड़े शब्दों में चित्रों के साथ दृष्टिबाधित एवं मूक बधिर लोगों के लिए ब्रेल लिपि संस्करण सहित प्रकाशित की गई हैं। इन पुस्तकों पर क्यू. आर. कोड भी है जिसे स्कैन करके इनका आॅडियो भी सुना जा सकता है।
वेबिनार में संस्थान के निदेशक प्रो0 नचिकेता राउत, आयुर्वेद चिकित्सक डा0 इन्द्रा अग्रवाल, पतंजलि योग पीठ से श्रीमती सीमा जौहर, आयुर्वेद विशेषज्ञ डा0 पंकज कुमार, सुनील शिरपुरकर, और राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन संस्थान के योगेश अग्रवाल भी जुड़े हुए थे।
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