ग्राउंड जीरो से संजय चौहान।
कोरोना संकट की वजह से एक ओर जहाँ पूरे देश में लाॅकडाउन होने से लोग अपने अपने घरों में कैद होकर रह गयें हैं। चारों ओर निराशा का भाव फैला हुआ हो। वहीं दूसरी ओर कोरोना संकट के इस दौर में बीते एक महीने से सदूरवर्ती पहाड़ में पहाड़ की एक बेटी असहाय, जरूरतमंद, विकलांग लोगो सहित नेपाल और अन्य प्रदेशों के फंसे मजदूरों के लिए उम्मीदों की रोशनी बनी हुई है।
उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जनपद के कविल्ठा गांव की बेटी रोशनी चौहान विगत एक महीने से रूद्रप्रयाग जनपद के जखोली ब्लॉक ,अगस्त्यमुनि ब्लॉक, उखीमठ ब्लॉक में कोरोना संकट के दौरान लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उनकी हरसंभव मदद कर रही है। विगत एक महीने के दौरान रोशनी चौहान और उनकी टीम नें 200 से अधिक जरूरतमंद लोगों को खाने का सामान उपलब्ध कराया। सभी लोगों को उनके घरों तक राशन किट पहुंचाया गया ताकि कोरोना संकट में वे भूखे न सोयें। वहीं रोशनी नें लोगों को सैनीटाइजर, साबुन सहित अन्य वस्तुएं भी दी। रोशनी चौहान और उनकी टीम का कोरोना संकट के दौर में ये कार्य न केवल अनुकरणीय है अपितु प्रेरणादायक भी है। रोशनी चौहान ने कोरोना काल में गांव के स्कूली बच्चों को लिखने और पढने के लिए काॅपी, पेंसिल, किताबें भी निशुल्क वितरित की जबकि क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे लोगों को निशुल्क मशरूम मैगी भी दी।
रोशनी चौहान वर्तमान में युवाओं के लिए रोल माॅडल है। रोशनी बीते तीन सालों से स्वरोजगार के जरिए पहाडों में रोजगार सृजन के अवसरों का सृजन करने का कार्य कर रही हैं। गौरतलब है कि जिस उम्र में देश का युवा अपने बेहतर भविष्य के लिए ऐशोआराम और शानो शौकत की जिंदगी के सपने बुनने लगता है। माॅल, मेट्रो और गेजेट की दुनिया में रम जाना चाहता है। ठीक इसके विपरीत रोशनी चौहान स्वरोजगार मशरूम उत्पादन, ट्रैकिंग, फूल उत्पादन के जरिए वीरान पहाडों की खुशहाली वापस लौटाने की कोशिशों को हकीकत में बदल रही है।
महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन के सपने पूरा करने के लिए बीते तीन सालों में रोशनी काफी हद तक सफल भी रही है। कोरोना संकट में लोगों की मदद करना पहाड़ की इस बेटी के बुलंद हौंसलों की कहानी खुद बंया करती है। रोशनी नें सही मायनों में बेटी पढाओ बेटी बचाओ स्लोगन को चरितार्थ किया है और ये भी दिखाया है की बेटियां चाहे तो अपनी जिद और हौंसलों से बहुत कुछ कर सकती हैं। रोशनी न केवल स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है अपितु पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, बेटी बचाओ, बेटी पढाओ के जरिए समाज को जागरूक करने का नेक कार्य कर रही है। रोशनी चौहान की हिम्मत और हौंसलो की दाद तो देनी ही होगी।
बकौल रोशनी कुछ अलग करने का सपना तो मेरा बचपन से ही था। मैं पलायन के कारण अपने पहाड़ों के खाली गांवो और उत्तराखंड के लिए कुछ करना चाहती थी। जिसकी शुरुआत मैंने खुद के गाँव कविल्ठा से की। मैं यहाँ पर मशरूम उत्पादन करती हूँ और बागवानी, फूलों की खेती भी करती है जिससे अच्छी आमदनी हो जाती है। मैं ट्रैकिंग भी कराती हूँ। मैंने कई ग्रुपों को चंद्रशिला, चोपता, तुंगनाथ, चौमासी, केदारनाथ, देवरियाताल, मद्दमहेश्वर सहित अन्य स्थानों की ट्रैकिंग करवायी है। मैंने मसूरी से ट्रैक लीडरशीप कोर्स भी किया है।
रोशनी चाहती हैं कि लोग वापस अपने पहाड और गाँव लौटे। गाँव की रौनक वापस लौट जाये। लोगों को अपने ही घर में रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। हमें अपने ऊपर भरोसा करना होगा। पहाड़ की माटी में भी सोना उगाया जा सकता है। कोरोना संकट में लोगों की पीड़ा देखी नहीं गयी इसलिए हमनें ऐसे लोगों की हरसंभव मदद करने का निर्णय लिया। हमारी इस टीम जिसमें मैं खुद, सुरेश थपलियाल, सुमित पुरोहित, जगदम्बा प्रसाद भट्ट और कुछ अन्य साथी हैं जो महानगरों से हमारी मदद कर रहे हैं।
आज ‘उम्मीदों की रोशनी’ रोशनी चौहान का जन्मदिन है। केदार घाटी की होनहार बिटिया को जल्मबार की बहुत बहुत बधाइयां। आशा और उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में पहाड़ की ये बेटी नयी मुकाम हासिल करेंगी।

