देहरादून 31 मई 2020 (हि.डिस्कवर)
ये सऊदी मुस्लिमों की पोशाक में उत्तराखंड के नामी-गिरामी कलाकार न ही इस ड्रेस में कोई शो करने जा रहे हैं और ना ही सड़कों पर टहलने ही जा रहे हैं। फोटो के पीछे के सच ला जिक्र करने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि आखिर इस फोटो ने सोशल साइट्स पर बबाल क्यों काटा हुआ है।
सम्बन्धित फोटो पर जब सुप्रसिद्ध अभिनेत्री व गायिका संगीता डौंडियाल से जानकारी प्राप्त की गई तो उन्होंने बताया कि यह फोटो 4 साल पूर्व की है जब वे बहरीन में रह रहे उत्तराखण्डी समाज के लिए वहां कार्यक्रम में भागीदारी निभाने गए थे। आयोजकों ने बहरीन में ग्रांड मोस्के का जिक्र किया जो ठीक उसी तरह का हेरिटेज है जैसे भारत बर्ष में ताज महल। आयोजक हमें बहरीन की सैर के दौरान ग्रांड मोस्के घुमाना भी नहीं भूले। यहां एक नियम है कि ग्रांड मोस्के में घूमने के लिए आपको वहां की सभ्यता के आधार पर वहां के ड्रेस को पहनना पड़ता है, चाहे वह विश्व के किसी भी देश से आया क्यों न हो।
यह सब हमारे लिए अप्रत्याक्षित था क्योंकि अगर यह ड्रेस एक कलाकार किसी मंच पर पहन भी लेता तो कोई बड़ी बात नहीं थी लेकिन आम जिंदगी में हम भारतीय अपनी संस्कृति की गरिमा को पर बहुत नाज करते हैं। हम यह सब पहनने में मना भी नहीं कर पाए क्योंकि अगर सिर्फ हम ही यह पोशाक पहनते तो अलग बात थी, यहां तो विश्व भर के आये लोगों को यह ड्रेस पहनना जरूरी था तभी कोई भी ग्रांड मोस्के में प्रवेश कर पाता है।
यह फोटो किसने कैसे किसको भेजी और किसने किस स्वार्थ या इंटेंशन से इसे सोशल साइट पर डाला यह संगीता भी नहीं जानती हैं। सुप्रसिद्ध गायिका संगीता डौंडियाल ने बताया कि आज फोटो उन्होंने जब किसी जगदीश पुरोहित के फेसबुक पर देखा तो मैंने उनसे रिक्वेस्ट की कि वे बिना परमिशन के यह फोटो न लगाएं कृपया इसे डिलीट कर दें तो जगदीश पुरोहित ने उन्हें धमकी देते हुए कहा कि “फोटो नहीं हटेगी, तुम लोगों को धरती पर लाऊंगा। अभी देखो क्या करता हूँ।”
संगीता डौंडियाल का कहना है कि उन्हें फोटो से इतनी आपत्ति नहीं है जितनी फोटो के नीचे लिखे इस व्यक्ति के शब्द हैं। जगदीश पुरोहित ने हमारी फोटो डालकर उस पर लिखा है ” इन लोगों को जानते आप क्या इन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया है।” जिसका स्क्रीन शॉट्स मैंने खींचकर रख दिया है ताकि मैं बता सकूँ कि इस तरह के आरोप लगाना कितना गलत ही।
संगीता ने अब मन बना लिया है कि ऐसे लोग तब तक नहीं मानते जब तक इन पर पुलिस कार्यवाही न हो इसलिए वह कल जगदीश पुरोहित पर एफआईआर दर्ज करने का विचार कर चुकी हैं।
ज्ञात हो कि अरबी पोशाक में सुप्रसिद्ध हास्य अभिनेता घन्नानन्द ने थोब पहना है व सिर में शामाघ वे अघल पहने हैं जबकि इसी पोषक को दुबई इत्यादि शहरों में कुंद्रा व सिर में पहने वस्त्र को गोत्रा बोलते हैं। वहीं सुप्रसिद्ध गायिका श्रीमती संगीता डौंडियाल, श्रीमती खुशी जोशी डिंगारी व गरिमा सुंदरियाल ने जो अरबी ड्रेस पहना है उसे अबाया कहा जाता है जबकि यही दुबई में जलब्य के नाम से पुकारा जाता है।
बहरहाल यह सोचने वाली बात है कि कलाकार या कोई भी अभिनेता मंच या पिक्चर के सीन के हिसाब से कहीं का भी कोई भी ड्रेस पहन लेता है उसमें कोई खराबी नहीं है। फिर ऐसा क्यों कि यदि यही वस्त्र हमारे लोक कलाकार किसी सभ्यता को अंगीकार करने के लिए पहने हैं तो वह गुनाह हो गया। क्या हमारा गढ़वाली समाज भी कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहा है, और हमें भी अब फतवे जारी करने के फरमान सुनाने पड़ेंगे।


