Tuesday, February 17, 2026
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एम्स में शुरू हुआ टीबी रोग निवारण के लिए इको प्रोजेक्ट शुरू।

ऋषिकेश 19 अगस्त 2019 (हि. डिस्कवर) भारत सरकार के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्यूबर क्लोसिस एंड केस्प्रेट्री डिजिजेज के साथ एम्स ऋषिकेश का क्षय रोग निवारण के लिए ईको प्रोजेक्ट उत्तराखंड में विधिवत शुरू हो गया। प्रोजेक्ट को सोमवार को एम्स संस्थान में विधिवत लांच किया गया। जिसके माध्यम से राष्ट्रीय क्षय एवं स्वसन रोग संस्थान नई दिल्ली के माध्यम से एम्स देश के विभिन्न प्रांतों के मेडिकल संस्थानों के साथ तपेदिक रोग के निवारण के लिए विमर्श के साथ मुहिम आगे बढ़ाएगा।

क्षय रोग निवारण के लिए तैयार ईको प्रोजेक्ट की लांचिंग के अवसर पर एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने कहा कि संस्थान तपेदिक के निरमूल के लिए सभी मेडिकल संस्थानों के साथ मिलकर मुहिम को आगे बढ़ाएगा और जिससे देश को टीबी रोग से जल्द ही मुक्त किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट की शुरुआत के बाद एम्स में पहली मर्तबा इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है और बीमारी को समाप्त करने तक इस तरह की कार्यशालाएं लगातार आयोजित की जाती रहेंगी। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि यह मुहिम एनआईटीआरडी के निदेशक डा. रोहित सरीन व डा. संजीव अरोड़ा की देखरेख में संचालित की जा रही है। सोमवार को एम्स में एसटीएएफ की स्टेट चेयरपर्सन व संस्थान की डीन प्रो. सुरेखा किशोर की अध्यक्षता में प्रथम कार्यशाला का आयोजन किया गया,जिसमें टीम के सदस्यों ने प्रतिभाग किया।

इस दौरान एम्स के सदस्यों के साथ ही तपेदिक के निवारण विषय पर टेली कांफ्रेंसिंग के माध्यम से देश के विभिन्न प्रांतों के मेडिकल कॉलेजों व कम्यूनिटी एंड फेमिली मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रतिभाग कर चर्चा की। प्रो. सुरेखा किशोर ने बताया कि एम्स की ओर से इस कार्यक्रम में सहभागिता के साथ ही मुहिम को आगे बढ़ाने पर सहमति दी गई है। उन्होंने बताया कि संबंधित मेडिकल संस्थान इस कार्यशाला का आयोजन अपने संस्थानों में रहकर भी टेलीकांफ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा कर सकते हैं।

कार्यशाला में शिमला मेडिकल कॉलेज, एम्स ऋषिकेश, आरएमएल लखनऊ,जीएमसीएच चंडीगढ़ृ, डीएमएमसी लुधियाना आदि संस्थानों के चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर एम्स संस्थान से डा. गिरीश सिंधवानी, डा. प्रदीप अग्रवाल, डा. योगेश, डा. महेंद्र सिंह,डा. रूचि दुआ, डा. पुनीत गुप्ता के अलावा एमपीएच के स्टूडेंट्स भी मौजूद थे।

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