
सात-ताल के बारे में खोज किसी ब्रिटिश की नहीं बल्कि अमेरिकन की होना आश्चर्यचकित कर देने वाली बात है। स्टेंलिस जौन नामक इस व्यक्ति की इतनी बड़ी प्रॉपर्टी जोकि घनघोर जंगलों के बीच है देखते ही लगता है कि आप हिन्दुस्तान में नहीं बल्कि कहीं विदेश के एक ऐसे रमणीक क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं जहाँ मानव-चहलकदमी से प्रकृति हताहत नहीं हुई है। वन विभाग या सातताल मसीही आश्रम के साथ साथ सबसे ज्यादा बधाई के पात्र यहाँ के व्यापारी वर्ग हैं जिन्होंने स्वयं यहाँ सफाई का जिम्मा अपने कांधों पर ले रखा है। पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के अन्य कई जिलों में भी मेरा भ्रमण ऐसे प्रकृति प्रदत्त क्षेत्रों में हुआ है लेकिन इतना साफ़ सुथरा रख-रखाव यहीं देखने को मिलता है।
