(मनोज इष्टवाल)
यह यकीनन आश्चर्यजनक है कि जब गढ़वाल के लोग चाय तक को नशा मानते थे तब मसूरी की “फ्रॉस्ट वैली” (ठंडी/बर्फीली घाटी) नामक स्थान पर एक शराब फैक्ट्री थी जहां हार्ड लिकर व्हिस्की का उत्पादन होता था।
अपनी पुस्तक “मेमॉयर ऑफ देहरा दून” में इस बात की जानकारी देते हुए जी.आर.सी. विल्लिअम्स लिखते हैं कि इस बात का पता जब सन 1831 में जब कर्नल एफ. यंग को लगा तब उन्होंने फैक्ट्री के मालिक मिस्टर भोले को तलब किया व उससे सवाल जबाब पूछे। यह घटना 21 अप्रैल 1831 की है जिसका जबाब मिस्टर भोले द्वारा कर्नल यंग के समक्ष 25 अप्रैल 1831 को दिया गया जिसमें मिस्टर भोले ने कर्नल यंग के समक्ष स्वयं अपनी व अपनी डिस्टलरी की पैरवी करते हुए स्पष्ट कहा कि जहां फैक्ट्री अर्थात उनकी डिस्टलरी स्थापित है वह क्षेत्र राजा टिहरी के अधिकार में है, इसलिए इस पर ब्रिटिश सरकार या उनके कानून लागू नहीं होते।
समस्त जानकारी जुटाने के बाद कर्नल यंग ने इसे टिहरी राजा का अधिकार क्षेत्र घोषित करते हुए इस विवाद को यहीं समाप्त कर मिस्टर भोले को माफ कर दिया। जी.आर.सी. विल्लिअम्स अपनी पुस्तक “मेमॉयर ऑफ देहरा दून” के पृष्ठ संख्या 183 के चैप्टर 375 पर इस का उदाहरण देते हुए लिखते हैं कि:-
It is not generally known that the fact was pointed out year ago to colonel Young by a certain Mr. Bohle, an adveturous merchant, who set up the first brewery at Mussooree in the “Frost valley” besides a distillery, and “commenced selling a strong spirit, called whiskey,” without a license. This gentleman, when called upon to account for his conduct, defended it on the ground of his being “within the jurisdiction of the “Raja of Teeree, and consequently “without the pale of British Jurisprudence.” he even tually waived the point, and similar questions have never since cropped up.
(*Col. Young to Mr. Bohle, Dated 21st April, 1831. Cf. Bohle to Col. Young, 25th April.)
भारत में व्हिस्की का पहला व्हिस्की उत्पादन केंद्र माना गया कसौली।
भारत में स्कॉच व्हिस्की पीने की शुरुआत उन्नीसवीं सदी में ब्रिटिश काल के दौरान हुआ । 1820 के दशक के अंत में, एडवर्ड डायर ने कसौली में भारत में पहली शराब की भठ्ठी स्थापित करने के लिए इंग्लैंड से चले गए। शराब की भठ्ठी को जल्द ही हिमाचल प्रदेश के सोलन (ब्रिटिशकाल में गर्मियों में ब्रिटिश राज की राजधानी शिमला के करीब ) में स्थानांतरित कर दिया गया था, क्योंकि वहां ताजे पानी की प्रचुर आपूर्ति थी। फिर मोहन मीकिन्स ने भारत में शराब की फैक्ट्री स्थापित की जहां व्हिस्की और रम का निर्माण हुआ ।
भले ही अंग्रेज एडवर्ड डॉयर द्वारा 1820 में सरकार से विधिवत लाइसेंस लेकर कसौली में पहली व्हिस्की डिस्टलरी स्थापित की गई हो लेकिन ज्यादात्तर का मानना है कि मिस्टर भोले नामक व्यक्ति ने तो गोरखा काल में ही मसूरी में व्हिस्की की फैक्ट्री लगा थी। भले ही उसे गुणवत्ता में ब्रिटिश व्हिस्की की अपेक्षा ज्यादा अल्कोहलिक माना गया हो लेकिन यह इतिहास के पन्नों में पहले स्थान पर दर्ज इसलिये नहीं हो पाई क्योंकि तब मिस्टर भोले ने टिहरी रियासत से इसका लाइसेंस लिया था न ब्रिटिश हुकूमत से।
इस प्रकरण को देखकर यह कहना उचित रहेगा कि लगभग 200 बर्ष पूर्व मसूरी में “व्हिस्की” नामक शराब का निर्माण होता था। वैसे पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर विकास खंड की ताल घाटी में भी एक अवैध कच्ची शराब की भट्टी हुआ करती थी, जहां डाडामण्डल क्षेत्र जिसे छोटी विलायत भी कहा जाता था के लोग चोरी छिपे शराब पीने व नृत्य देखने इकट्ठा हुए करते थे। बाद में डाकू सुल्ताना ने इस फैक्ट्री को तहस-नहस कर दिया था।

