Tuesday, March 5, 2024
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108 सालों से जल रही है शिक्षा की मशाल! — जनपद चमोली के प्राइमरी स्कूल खल्ला (मण्डल) की अनंत यात्रा, शिक्षको की फैक्ट्री है ये स्कूल।

(वरिष्ठ पत्रकार राजपाल बिष्ट की कलम से)

एक दौर में जब समूचा भारत ब्रिटिश हुक्मरानों तथा गोरखाली आक्रातांओ से त्रस्त था तब उत्तराखण्ड के सूदूर पहाड़ों में स्थित मण्डल घाटी में शिक्षा की अंधियारे को दूर करने के लिए 1911 में आधारिक विद्यालय मण्डल(अब प्राथमिक विद्यालय खल्ला-मण्डल) की नींव पड़ी। शिक्षा पाने के लिए तब ऐसी बुनियाद पड़ी कि इस माटी में पढ़-लिखने वाले नौनिहाल मास्टर (शिक्षक) बनकर जगह-जगह शिक्षा के फैले अंधियारे को दूर करने की मुहिम में जुट गये। इस तरह कहा जा सकता है कि यह प्राइमरी स्कूल बाद के वर्षों में अध्यापकों की नर्सरी बन गया।

यह भी अजीब विडम्बना ही है कि मौजूदा दौर में लोग सरकारी विद्यालयों का मोह छोड़कर प्राइवेट स्कूलों की शरण में जाने के लिए कस्बों, शहरों तथा महानगरों की गोद में बसकर गांवों को ही अलविदा कर रहे हैं। इसके पीछे सरकारी स्कूलों में क्वालिटी एजुकेशन का न होना एक बड़ी चिन्ता के रुप में सामने आ रहा है। ऐसा इसलिए कि मौजूदा प्रतिस्पद्र्धा के दौर में लोगों को क्वालिटी एजुकेशन प्राइवेट कालेजों अथवा स्कूलों में ही मिल रही है। यही वजह है कि मौजूदा दौर में सरकारी स्कूल खुल तो रहे हैं किन्तु छात्र-छात्राओं के अभाव में स्कूल चलने के कुछ समय बाद ही बन्द होते जा रहेे हैं। ऐसे में 108 साल पुराने इस प्राथमिक विद्यालय का अभी तक भी चलना नीति नियंताओं को एक बड़ी राह भी दिखाता है।

प्राइमरी स्कूल खल्ला-मण्डल का अपना अजब-गजब इतिहास रहा है। मां अनुसूया, मां चण्डिका तथा मां ज्वाला तथा कोटेश्वर महादेव की तपोभूमि में स्थित इस विद्यालय ने अपने जीवन मे कई तरह के थपेड़े झेले। इस विद्यालय के शैशवाकाल में हालांकि शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाना हालांकि एक बड़ी चुनौती थी किन्तु पुरानी पीढ़ी के लोगों के पुरुषार्थ के बल पर यह विद्यालय आज भी अपना अस्तित्व बनाये रखा है। प्रारम्भिक काल में ग्राम मण्डल, खल्ला, कोटेश्वर तथा बणद्वारा गांवों के नौनिहालों को बुनियादी शिक्षा देने के लिए ही इस विद्यालय की स्थापना हुई थी। इस विद्यालय के सेवित क्षेत्र के गांव खल्ला के श्री 1008 गीतास्वामी सच्चिदानंद महाराज इसी विद्यालय में पग रखकर महान संत बने। उनके सहयोग से ही मण्डल घाटी के कुनकुली में श्री 1008 गीतास्वामी संस्कृत महाविद्यालय स्थापित हुआ और जिला मुख्यालय गोपेश्वर में श्री 1008 गीतास्वामी इण्टर कालेज का संचालन भी हुआ। आज दोनों शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र बने हैं। मण्डल गांव के दिवंगत प्रताप सिंह झिंक्वाण स्वाधीनता आंदोलन के सिपाही बने तो उन्होेंने भी देश को अंग्रेजी हुकूमत से मुक्त करने में अग्रणी भूमिका निभाई। सामाजिक क्षेत्र में भी इस विद्यालय के पढ़े लिखे लोगों ने जनसरोकारों से जुड़कर पूरे मुल्क को विकास के रोडमैप पर खड़ा किया। खल्ला गांव के दिवंगत आलम सिंह बिष्ट ने विनोबा भावे के आंदोलन से लेकर चिपको आंदोलन और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने का बीड़ा उठाया। यहां तक कि वे गोपेश्वर इंटर कालेज के शुरूआती दौर में प्रबंधक भी रहे। इसी गांव के दिवंगत बचन लाल (हड़ताली दिदा) दशोली के ज्येष्ठ प्रमुख रहे। यही नहीं हड़ताली बचन लाल दिदा तथा प्रधान रहे बचन लाल ने हरिजन कुटीर उद्योग अनुसूयागेट पर स्थापित कर लोगों को रोजगार से जोड़ने की अनूठी पहल की। बणद्वारा के दिवंगत राम सिंह नेगी व शुक्र सिंह रावत, कोटेश्वर के दिवंगत गणपत सिंह बिष्ट तथा जमादार साहब (सुबेदार) दिवंगत शिव सिंह बिष्ट का समाज सेवा के लिए दिया योगदान किसी से छिपा नहीं है। मण्डल गांव के दिवंगत भजनी दत्त सेमवाल ने व्यापारिक गतिविधियों के क्षेत्र में मण्डल घाटी आर्थिक संपन्नता की ओर बढने की राह दिखाई तो दिवंगत शंकर दत्त सेमवाल ने वैद्य सेवा के जरिए लोगों को स्वस्थ रखने के लिए अपना जीवन खपाया। इसके अलावा अन्य पुरुषार्थी लोग भी मुल्क की सेवा में निःस्वार्थ रुप से जुड़े रहे। अब इस विद्यालय के स्थापना काल को याद करें तो वैद्य शंकर दत्त सेमवाल के परिजनों ने विद्यालय भवन के लिए मुक्त हस्त से भूमि दान की। इसी भूमि अथवा मिट्टी पर यह विद्यालय सनातन काल से चला आ रहा है।

स्थापना काल के बाद से आजादी के बाद के कई वर्षों तक कक्षा 1 में 10-12 साल के उम्रदराज बच्चे ही दाखिला लेते थे। मौजूदा दौर की तरह तब न तो किताब-कापियां और पेन थे। उस दौर में लोग पाटी, बोल्ख्या तथा रिंगाल की कलम से ही शिक्षा ग्रहण करते थे। उसी दौर में बच्चे घर-गृहस्थी के सारे काम निपटाकर स्कूल पढ़ते थे। यह उनके अंदर के जुनून को प्रदर्शित करता था। इस विद्यालय से निकले बच्चे जीवन संघर्ष के क्षेत्र में निरन्तर आगे बढ़ते रहे। कोई फौज में गया तो कोई शिक्षक बना और कोई सिविल की नौकरी में गया।

शिक्षकों की फैक्ट्री है प्राथमिक विद्यालय खल्ला(मंडल)..

इस विद्यालय की एक विशेषता यह भी रही कि यहां के ज्यादातर नौनिहाल पढ़ लिखकर अध्यापक बनने की राह पर ही निकल पड़े। बाद को इस विद्यालय का नामकरण प्राथमिक विद्यालय खल्ला-मण्डल के रुप में हुआ और अब भी सतत चल रहा है। बणद्वारा गांव में हालांकि 1959 में अलग से आधारिक विद्यालय बना। इससे पहले इस गांव के बच्चे इसी विद्यालय अथवा टंगसा में पढ़ने जाते थे । तब भी इस विद्यालय के सेवित गांव बणद्वारा के दिवंगत भीम सिंह नेगी, राजेन्द्र सिंह नेगी, आनन्द सिंह रावत, शिव सिंह रावत अध्यापक बने। इसी गांव के सोबत सिंह नेगी ने भी शिक्षक के रुप में अपनी सराहनीय सेवा दी। इसी तरह कोटेश्वर गांव के दिवंगत दौलत सिंह बिष्ट, सुल्तान सिंह बिष्ट, रघुनाथ सिंह बिष्ट, हरेन्द्र सिंह बिष्ट, त्रिलोक सिंह रावत भी बेहतरीन शिक्षकों में शुमार रहे। कोटेश्वर गांव के ही श्री नारायण सिंह रावत पहले फिजिक्स के लैक्चरर रहे तो बाद को वे ओएनजीसी में डायरेक्टर पद से रिटायर हुये। उस दौर में खिलगढ गदेरा बरसात में विकराल रूप में सामने आता था। इस कारण कोटेश्वर गांव के नौनिहाल जान हथेली पर रख कर स्कूल पढने आते थे। इसके चलते 1965-66 में कोटेश्वर में भी इस विद्यालय का शाखा विद्यालय गोस्याणा में खुला। शाखा विद्यालय में भी पढ़ने-लिखने का सिलसिला लोगों का जारी रहा और 1997 में यह विद्यालय पूर्णं प्राथमिक विद्यालय बना। कोटेश्वर के रणजीत सिंह झिंक्वाण ने इस विद्यालय को भूमि दान कर एक मिशाल पेश की। खल्ला गांव के दिवंगत माधो सिंह बिष्ट, जानकी प्रसाद त्रिपाठी, ईश्वरी प्रसाद तिवाड़ी, राजेन्द्र सिंह बिष्ट, सोबत सिंह बिष्ट तथा सुधीर सिंह बिष्ट विभिन्न विद्यालयों में अध्यापक रहे तोे अनुसूया प्रसाद त्रिपाठी संस्कृत महाविद्यालय मण्डल के प्रधानाचार्य रहे। इसी तरह इसी गांव के कलीराम तिवाड़ी, चिरंजी प्रसाद तिवाड़ी, प्रधानाध्यापक व शिव प्रसाद त्रिपाठी अध्यापक रहे तो राजेन्द्र प्रसाद तिवाड़ी व अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुये। खल्ला गांव के ही दलीप चन्द्र आर्य बीडीओ तथा सीडीओ जैसे उच्च पदों पर रहकर रिटायर हुये। मण्डल गांव के रघुनाथ सिंह फस्र्वाण सचिवालय लखनऊ की नौकरी छोड़ शिक्षा के क्षेत्र मे उतर पड़े और डीडीआर (उप शिक्षा निदेशक) जैसे अहम ओहदे पर रहकर मण्डल घाटी का नाम रोशन कर गये। इसी गांव के दिवंगत गबर सिंह बिष्ट, कृष्णमणी सेमवाल, कुन्दन सिंह बिष्ट, बलवन्त सिंह बिष्ट तथा जगत सिंह बिष्ट ने अध्यापक के रुप में इस विद्यालय से निकलकर अपनी सेवायें दी। मण्डल के ही डाॅ सीताराम सेमवाल चिकित्सा के क्षेत्र में अभी तक भी लोगों को स्वस्थ रखने में जुटे हुये हैं। मण्डल के ही विष्णुदत सेमवाल, अनुसूया प्रसाद सेमवाल तथा मोहन सिंह बिष्ट शिक्षक के पद पर रहकर अपने गुरुत्तर दायित्व का निर्वहन कर गये तो किषन सिंह बिष्ट प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुये हैं। मौजूदा पीढ़ी भी अपने पुरखों के पदचिन्हों पर चलकर शिक्षा के क्षेत्र में कदमताल कर रही है। कहा जा सकता है कि यह विद्यालय शिक्षकों को बनाने वाली नर्सरी साबित हुआ है।

मौजूदा दौर में प्रधानाध्यापक हीरा लाल (ग्राम मैकोट निवासी) के नेतृत्व तथा शिक्षिका शशि नेगी (मेहरगांव) के सानिध्य में यह विद्यालय निरन्तर आगे बढ़ता जा रहा है। उनकी ही प्रेरणा से विद्यालय का शताब्दी वर्ष (हालांकि 108 साल होने पर भी) मनाया जा रहा है। इसमें खल्ला की महिला मंगल दल अध्यक्ष रेखा बिष्ट, खल्ला के प्रधान अरविंद बिष्ट, पूर्व प्रधान जगत सिंह बिष्ट, मण्डल के प्रधान पुष्कर सिंह बिष्ट, बीडीसी मेंबर राजेंद्र सिंह बिष्ट, खल्ला ग्राम विकास एवं धर्मस्व समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी समेत सभी लोगों के सहयोग से यह ऐतिहासिक आयोजन हो रहा है। इसमें बतौर मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भण्डारी की मौजूदगी विद्यालय की अनंत यात्रा को आगे बढाने में प्रेरणादायक बनेगी। हमें नाज है कि इस माटी के पढ़े-लिखे लोग आज भी जीवन संघर्ष के क्षेत्र में निरन्तर आगे बढ़ते जा रहे हैं। यह हमारे लिये गौरवशाली क्षण भी है कि हमारे पुरखों के पुरषार्थ के बल पर यह विद्यालय अपनी स्थापना के 108वें बसंत में फल फूल रहा है। खल्ला गांव में स्थित मां अनुसूया, मण्डल गांव में स्थित मां चण्डिका, कोटेश्वर गांव में स्थित कोटेश्वर महादेव तथा बणद्वारा गांव में स्थित मां ज्वाला से हमारी यही मनौती है कि यह विद्यालय अपने जीवन संघर्ष के क्षेत्र में इसी तरह अपनी अनंत यात्रा जारी रखे।

साभार- संजय चौहान।

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