(मनोज इष्टवाल)
वैसे यह बात तो सही है कि हमारा प्रदेश अजब-गजब की नयी नयी जानकारियों से भरा पड़ा है! यहाँ कब कौन सा फैसला किसके पक्ष में लिया जाय व कौन कब आकाश पहुँचकर धरती सूंघने लगे कोई पता नहीं! हालात कुछ इस कदर खराब हैं कि ज्यादात्तर जो पत्रकार कोरोना काल में प्रदेश की छवि बनाने के लिए लगातार कलम घिसाई कर रहे हैं वही विज्ञापन के ही क्या सरकारी तन्त्र के भी हाशिये पर चले गए हैं! मलाई खाने वाले पहले प्रसाद खाते थे अब मालपुवों के साथ मलाई भी चाट रहे हैं!
विगत कुछ दिन पूर्व ही सूचना एवं लोकसम्पर्क विभाग उत्तराखंड में सम्पादक पद पर अपनी कुर्सी सम्भालने वाले प्रमोद रावत आजकल सोशल साइट्स पर लगातार ट्रोल किये जा रहे हैं! उनको ट्रोल करने वाले अब सोशल साईट पर उनके कांग्रेस काल का वह चिट्ठा उठाकर रख दे रहे हैं जिसमें उन्होंने देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट करते हुए अपने ट्वीटर अकाउंट में लिखा था- “सोने वाली बिस्कुट पर सिर्फ 3% टैक्स और खाने वाली बिस्कुट पर 18% टैक्स. वाह रे चाय वाले….!” दूसरा ट्वीट “भक्तों…देख लो अस्ताना बाद में न पछताना.” तीसरा ट्वीट “किसान लगाते कर्जमाफी की गुहार और भाजपा करती गोलियों की बौछार” एक और ट्वीट में उन्होंने लिखा- “एक गरीब आदमी से भारत देश के वित्तमंत्री का नाम पूछा गया, उसने दिल छु लेने वाला उत्तर दिया *माननीय श्री अरुण जेबलूटली” व “इनको फैंकते-फैंकते और हमें देखते-देखते तीन साल हो गए”।
कई ट्वीट सोशल साईट पर छाए हुए हैं जो गाहे-बगाहे भाजपा की वर्तमान सरकार की ओर अंगुली उठाकर लिखे गए हैं कि जो व्यक्ति कांग्रेस की पूर्व सरकार के समय उनका सोशल मीडिया देखता था आखिर त्रिवेंद्र सरकार ने उसी व्यक्ति को प्रमोशन देकर सूचना विभाग जैसे महकमे में सम्पादक पद कैसे दे दिया जबकि उसने कांग्रेस में रहते हुए लगातार देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को ट्रोल किया है!
जांच पड़ताल के बाद पता चला है कि प्रमोद रावत कांग्रेस काल में उनका सोशल मीडिया का काम काम देखते थे व वहां भी वे असाइनमेंट के रूप में काम करते थे! असाइनमेंट का शाब्दिक अर्थ अगर ढूंढा जाय तो एक ऐसा व्यक्ति जो किसी कार्य बिशेष के लिए काम करता हो व उस काम के बदले में एक पैकेज के रूप में धन पाता हो!
प्रमोद रावत कांग्रेस काल में डब्ल्यूटी आईटी सोलुशन नामक एक कम्पनी के माध्यम से सोशल मीडिया का काम देखते थे व विधान सभा चुनाव के दौरान पौड़ी जनपद के लिए उन्हें तैनात किया गया था! प्रमोद रावत की भाजपा में एंट्री व फिर सूचना विभाग में बतौर सम्पादक ताजपोशी के पीछे कुछ मीडिया के लोग ही बताये जा रहे हैं!
मुझे लगता है कि प्रमोद रावत को ट्रोल करने वाले लोग यह भी भले से जानते हैं कि जब तक नवजोत सिंह सिद्धू भाजपा में थे तब तक वे कांग्रेस की बखिया उधेड़ रहे थे और कांग्रेस में जाते ही ऐसा कर गए कि सोशल मीडिया ने उन्हें पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष बाजवा का ख़ास बताते हुए लगातार ट्रोल किया जिसका खामियाजा सिद्धू को अपने राजनीतिक जीवन व व्यक्तिगत जीवन में खूब भुगतना पड़ा! वही हाल प्रशांत भूषण का भी है जब तक आप में थे तब तक आये दिन भाजपा की केंद्र सरकार निशाने पर रही! ऐसे तो उत्तराखंड की राजनीति में कई किस्से हैं कि जो कांग्रेस से भाजपा में आये और अब कांग्रेस पर गरियाते हैं! ऐसे में प्रमोद रावत को क्या ट्रोल किया जाना ठीक है!
इस पर आम जन मानस का कहना है कि प्रमोद रावत राजनीतिक व्यक्ति नहीं बल्कि कांग्रेस काल में सोशल मीडिया में काम करने वाला एक वेतनभोगी मात्र था, इसलिए सरकार को उसे सूचना विभाग में बतौर सम्पादक रखने से पूर्व ठीक से छानबीन करनी चाहिए थी क्योंकि प्रमोद रावत के ज्यादात्तर ट्वीट सीधे प्रधानमन्त्री को निशाना साधकर किये गए हैं! कई भाजपा नेताओं ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ऐसे निर्णय पार्टी के लिए घातक हो सकते हैं! अगर सम्पादक रखना ही था तो कोई संघ परिवार से रखा जाता या फिर भाजपा मेंटलिटी का व्यक्ति बनाया जाता तो अच्छा!
बहरहाल प्रमोद रावत को सूचना विभाग में सम्पादक बनाए जाने को लेकर मेरी व्यक्तिगत राय तो यह है कि प्रमोद रावत ने जब कांग्रेस का सोशल मीडिया देखा तब उनके साथ वफादरी की अब भाजपा सरकार में सूचना विभाग में सम्पादक की जिम्मेदारी सम्भालते हुए भी वे वही करेंगे जो वे कांग्रेस काल में पूरी वफादारी से करते थे! यूँ भी उनसे पहले भी कई ऐसे चेहरे भाजपा की वर्तमान सरकार में दिखाई देते हैं जो कांग्रेस सरकार के समय में भी सक्रिय रहे हैं, ऐसे में अकेले प्रमोद रावत पर ही कोई बिशेष कृपादृष्टि बनी हो, यह सिर्फ कहने वाली बात है !

