देहरादून (हि. डिस्कवर)।

प्रदेश में इन दिनों कहीं न कहीं किसी न किसी मुद्दे पर लोकसभा चुनाव के सम्पन्न होने के बाद से सियासी हलचलें ज्यादा तेज हो गयी हैं। यह विपक्ष के बूते की बात हो न हो लेकिन सत्ता पक्ष के कार्यों का जनता ने अवलोकन करने शुरू कर दिया है। चाहे औली के गुप्ता बंधुओं के विवाह समारोह की हलचल रही हो, विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन या फिर देवप्रयाग में हिल टॉप शराब बोटलिंग सम्बन्धी प्लांट..! हर जगह जनता ही मुखर रही है लेकिन अब शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की धमकी में सियासी हलचल और बढ़ गयी हैं। एक ओर मुख्यमंत्री समर्थक इन सभी बातों को दल के ही किसी नेता की कुर्सी की भूख बता रहे हैं तो दूसरे ओर इस तरह के मुखर विरोध अफसरशाही के बेलगाम होने की बात कह रहे हैं।
हाल ही में अपने बेटे की सड़क हादसे में गुजर जाने के बाद शिक्षा मंत्री ने जब ट्रांसफर सम्बन्धी प्रकरणों पर शिक्षकों की शिकायतें सुनी और पाया कि सचिव स्तर पर उनकी हर बात को दरकिनार कर फैसले लिए जा रहे हैं जिस से न वे एनसीईआरटी की किताबें, फ़ीस एक्ट लागू करवा पॉय रहे हैं और न ही ईमानदारी से काम करने वाले शिक्षकों को भी न्याय दिलवा पा रहे हैं।
शिक्षकों से मांगी माफ़ी
जवान बेटे की मौत की पीड़ा स्कूली शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के चेहरे पर साफ-साफ दिखाई दे रही थी। न्यूज़ 18 के अनुसार करीब एक महीने बाद विधानसभा पहुंचे अरविंद पांडे आवाज़ और अंदाज़ से आज अलग नज़र आए। दबंग माने जाने वाले शिक्षा मंत्री आज शिक्षकों से, अभिभावकों से माफ़ी मांगते दिखे।
न्यूज़ 18 हिंदी को दिये अपने साक्षात्कार में अरविंद पांडे ने अपनी बात की शुरुआत उन शिक्षकों से माफ़ी मांगकर शुरू की जिन्हें ट्रांसफर एक्ट का फ़ायदा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो मैं उन शिक्षकों से क्षमा चाहता हूं, जिन्हें यह उम्मीद थी कि ट्रांसफर एक्ट से उन्हें न्याय मिलेगा। ऐसे बहुत से शिक्षक हैं, जो जवानी में दुर्गम में गए थे, उन पर बुढ़ापा आ गया लेकिन आज तक उनकी कभी किसी ने नहीं सुनी ऐसे लोगों को ट्रांसफर एक्ट से जो उम्मीद जगी है, मैं कोशिश करूंगा कि उन्हें इसका लाभ मिले।
अभिभावकों से माफ़ी मांगी ।
शिक्षा मंत्री ने किताबों की कालाबाज़ारी से परेशान अभिभावकों से भी माफ़ी मांगते हुए कहा कि स्कूलों में माफ़ियागर्दी को रोकने के लिए राज्य में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया गया था लेकिन लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने की वजह से इस कानून को पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा, “अभिभावकों को एनसीईआरटी के अलावा माफ़ियागर्दी द्वारा थोपी गई किताबें भी लेनी पड़ीं, मैं इसके लिए भी माफ़ी चाहता हूं”।
अरविंड पांडे ने किताब माफ़िया पर अपनी छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे लोगों के ग़लत धंधे बंद करवाए तो ये लोग लामबंद होकर उनके ख़िलाफ़ दुष्प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों की परवाह नहीं करते और अभिभावकों, शिक्षकों के भले के लिए काम करते रहेंगे।
सचिव की करेंगे शिकायत।
न्यूज़ 18 हिंदी के अनुसार फ़ीस एक्ट तैयार न हो पाने पर पांडे बेहद नाराज़ दिखे. उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के सचिव (आर मीनाक्षी सुंदरम्) ने कई बार निर्देश देने के बाद भी इस पर काम आगे नहीं बढ़ाया जबकि यह जनहित से जुड़ा काम है। उन्होंने कहा कि वह शिक्षा सचिव की शिकायत मंत्री सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत करेंगे।
अरविंद पांडे ने यह भी कहा कि संगठन ने ईमानदारी से काम करने पर उन्हें घर बैठे मंत्री बनाया है और वह दिए गए काम के परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह मंत्री पद से इस्तीफ़ा तक देने को तैयार हैं। अगर शिक्षा मंत्री रहेंगे तो एनसीईआरटी की किताबें, फ़ीस एक्ट लागू करवाकर रहेंगे और ईमानदारी से काम करने वाले शिक्षकों को भी न्याय दिलवाएंगे।
