बुथाड़ कोली…! कोली वंशजों के कपड़े घर में रखने से 63 साल बाद पैदा हुआ पुत्र।
(मनोज इष्टवाल)
पहली शादी दयाल सिंह मूंडा ने झांपु मलास की पुत्री
नौली की मलास नेगी, दूसरी शादी मिर्चोडा के असवाल परिवार की व तीसरी शादी कफोला बिष्ट अगरोडा से की। कारण यह था कि वंश वृद्धि का एक भी पेड़ नहीं पनपा। आखिर ऐसा क्या हुआ कि दयाल सिंह मूंडा पुत्र लखन सिंह मूंडा को नानसु से घर जवाई नौली आना पड़ा और बुथाड़ कोली के वंशजों के कपड़े अपने घर रखने पड़ते थे। इस सब पर बाद में जाएंगे पहले झांपु मल्लास की जानकारी आप तक पहुंचाते हैं।
ग्राम बड़ेथ पट्टी रिंगवाडस्यूँ चौंदकोट पौड़ी गढ़वाल के झांपु मल्लास ने उस काल में जाति से बाहर जाकर ब्राह्मणी लड़की से प्रेम विवाह किया। जाति विरादरी को यह बात नागवार गुजरी और उन्होंने उन्हें गांव से बेदखल करने का फैसला लिया। झांपु तब ठीक-ठाक मालदार व्यक्ति था व साथ में उतना ही बहादुर भी। वह अपनी प्रेयसी को लेकर नौली गांव आ गए। उन्होंने यहीं खरीदकर अपना घर बनाया व यहीं खेती का एक बड़ा हिस्सा खरीद लिया। यहीं से मल्लास नेगी वट वृक्ष शुरू हुआ बताते हैं
कहते हैं झांपु मल्लास के हाथ इतने बड़े थे कि उन्होंने अपनी तिबारी का नाप अपनी मुट्ठ के हिसाब से रखा। झांपु मल्लास ने अपनी मेहनत के बल पर अपने खेतों की पैदावर बढ़ाई जिसे देख उसके वंशजों में ईर्ष्या भाव पनपना स्वाभाविक था। धीरे -धीरे झांपु मल्लास की अपने गांव वालों से दूरियां बढ़ने लगी व नौबत्त यहां तक पहुंच गई कि उसकी मौत पर न नौली गांव का कोई उनकी अर्थी को कांधा देने आया न बड़ेथ गांव के ही उनके पारिवारिकगण। तब उनकी दो-पुत्री व पत्नी ने झांपु मल्लास के कहे अनुसार उन्हें उन्हें पहले एक गीले कपड़े से पोंछा फिर गया-काशी से लाई हुई उनकी पगड़ी में लपेटा। फिर उन्हे खिसकाकर तिबारी छज्जा में लाये और फिर सभी ने मिलकर उन्हें आंगन की दीवार पर रखा। ताजबर नेगी बताते हैं कि यह सब जानकारियां उनकी दादी बताया करती थी। फिर उन्होंने आंगन के नीचे वाले खेत में उनके नाप की लंबाई व गहराई का खड्डा खोदा व वहीं उन्हें दफन किया। डर के मारे वह उस रात घर में नहीं सोये बल्कि वहीं उसी खेत में सोए रहे जहां उन्हें दफन किया गया था।
यह झाम्पू मल्लास से जुड़ी हुई जानकारी है
