(मनोज इष्टवाल)
हमारा कोई युवा जब कभी भी कोई क्रांतिकारी कदम उठाता है तो उससे बड़ी उम्र के लोग मुस्करा पड़ते हैं और मुंह से फूट पड़ता है –“मुंगेरी लाल के हसीन सपने!” लेकिन आश्चर्य होता है कि उनकी सोच में यह सब क्यों समाहित होता है? दरअसल पहाड़ कोई भी रहा हो! वहां हाड़-तोड़ मेहनत ने ही जन्म लिया और उसी मेहनत की कोख में जन्म लेने वाले वर्ग में ब्रिटिश एक बात रचा-बसा गए कि जो आनन्द नौकर बनकर है वह खुद के उद्यम से नहीं! यहाँ नौकर बनने की परम्परा आज भी इतनी बलबती है कि नौकर बनाने वाला हम सबके बीच पूजनीय हो जाता है लेकिन हम जब हम किसी व्यापार के माध्यम से स्वयं अपने जनमानस के लोगों को उसमें सहभागिता निभाने के लिए या फिर नौकरी करने के लिए आमंत्रित करते हैं, तब अपने ही अपनों की जड़ खोदना शुरू कर देते हैं! यही कारण रहा कि आजतक उद्योग पहाड़ नहीं चढ़ पाए!
अब जबकि विश्व वैश्विक मंदी के दौर से गुजर रहा है, दूसरी और कोरोना जैसी महामारी ने पूरी अर्थव्यवस्था की चूल्हें हिलाकर रखी हुई हैं तब व्यापार को परवान चढाने की कोशिश कोई साहसी ही कर सकता है! एक व्यापार जिसके मनोमस्तिष्क में पहाड़ के उत्पादों की बात हो, जिसके मन में अपने पहाड़ की वादियों-घाटियों नदियों , हवाओं-फिजाओं के लिए उल्हार हो वह बंद मुट्ठी में पंचतत्व समेटे बहुत सी परिकल्पनाओं के साथ शहर से गाँव की ओर लौट रहा है!
बेडू (BEDU- BRIGHT ERA DEVELOPMENT OF UTTARAKHAND) नामक इस समूह ने यूँहीं परिकल्पना के साथ उतावली में पहाड़ चढ़ने की जगह पहले उस पर वृहद् आर एंड डी (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) के आधार पर काम करना प्रारम्भ किया और वृहद शोध का जो नतीजा सामने आया वह लगता है आने वाले समय में यमकेश्वर क्षेत्र के लिए एक बड़ा मुकाम हासिल करेगा!
विगत दो बर्ष पूर्व अर्थात 2018 में पौड़ी गढवाल के यमकेश्वर क्षेत्र एक डेढ़ सौ से अधिक बुद्धिजीवी एक मंच में आते हैं! सोच यह विकसित होती है कि हम विदेशों व देश के बड़े बड़े भू-भागों में अपने-अपने परिवार के लिए सुख तलाशते हुए गाँव की सरहदों से काफी दूर निकल गए हैं! साधन सम्पन्न होने के बावजूद भी ये लोग व्यथित थे कि कैसे अपने गाँव क्षेत्र के लिए कुछ ऐसा करें कि उन्ही की तरह अन्य भी पलायन करके बाहर न निकलें बल्कि ऐसा कुछ सोचा जाय ताकि हम रिवर्स माइग्रेशन करके अपनी जड़ों की ओर लौटें!
हरीश कंडवाल “मनिखी” बताते हैं कि 2018 में कि गई इस परिकल्पना ने फरवरी 2019 की बैठक में मुहूर्त रूप लेना शुरू किया, अनेको विचार विमर्श के बाद जोखिम उठाने वाले लोगो ने बेड़ू नाम कि कम्पनी को जन्म दिया। पिछले डेढ़ साल कि अप्रत्यक्ष मेहनत ने मुहूर्त रूप ले लिया है, और बेड़ू कम्पनी जो विशुद्ध रूप से जैविक उत्पाद (ऑर्गेनिक प्रॉडक्ट) पूर्णत तैयार होकर जल्दी ही बाजार में उपलब्ध होंगे। कोरोना और लोकडॉउन के चलते हम पूरी दुनिया की तरह तीन माह पीछे हो गए है, लेकिन उसके बावजूद भी बेड़ू अपने प्रगति पथ पर अग्रसर है, वाटर प्लांट का सैद्धातिक और व्यवहारिक दोनों कार्य प्रगति पर है, वंही एनिमल फार्मिंग के लिये बेस तैयार कर लिया गया है, जल्दी निर्माण कार्य शुरू होगा। वही बेड़ू ने कुछ एफएमसीजी प्रॉडक्ट तैयार कर लिया है।
कोरोना के लिये सुरक्षित रहने के लिये जँहा मास्क और सेनेटाइजर की माँग बढ़ी है, ऐसे में बेड़ू के द्वारा अपना सेनेटाइजर बाजार में उतारने कि तैयारी कर लिया है। अब जब बात आती है लोकल की तो हम उत्तराखंड के निवासियों को उत्तराखंड के लोगो द्वारा उपलब्ध कराए गये उत्पादन को ही उपयोग में लाने की आदत डालें, क्योकि यह उत्तराखंड को आगे बढाने में योगदान देगा।
युवा अमित अमोली ने बताया कि यह हम सभी जानते हैं कि एक उद्योग स्थापित करना सरल है लेकिन उसे जीवित रखना उतना ही कठिन है क्योंकि अभी भी पहाड़वासियों के मनमस्तिष्क में नौकरी शब्द कूट-कूटकर भरा है इसलिए बेडू समूह की संरचना को मूर्त रूप देते-देते हमें दो बर्ष गुजर गए!
अमित बताते हैं कि शुरूआती दौर में इसमें सैकड़ों लोग जुड़े लेकिन कुछ व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ती न होने के कारण अपने आगे बढे क़दमों को पीछे हटाने के लिए मजबूर हो गए क्योंकि बेडू समूह ने नियमावली में एक क्लॉज ऐसा शामिल कर दिया ताकि यह किसी की व्यक्तिगत बपौत्ति न बन सके! वे बताते हैं कि वर्तमान में बेडू समूह में 81 लोग शामिल हैं, जो प्रत्येक 5000 के ही शेयर खरीद सकता है न उससे कम न उससे अधिक! शेयर होल्डर आगे भी बढ़ते जायेंगे लेकिन शेयर 5000 से अधिक किसी को नहीं मिलेंगे यह हम सबने मिलकर तय किया हुआ है! वर्तमान में शेयर के माध्यम से हमारी इस प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी में लगभग 41 लाख रूपये का इन्वेस्टमेंट शामिल है जबकि अभी अन्य परियोजनाओं को शामिल करने के लिए इसमें करोड़ो का निवेश होना है!
उन्होंने बताया कि वर्तमान में बेडू को एक प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी का रूप दिया गया है जिसके एमडी हरी कपरवाण बनाये गए हैं! विगत दो बर्षों में शुरूआती दौर में हम इसे सेल्फ हेल्प ग्रुप, फिर एनजीओ फिर को-ऑपरेटिव सोसायटी व पब्लिक लिमिटेड कम्पनी इत्यादि के हिसाब से मंथन करते रहे लेकिन हर जगह कुछ न कुछ ऐसा लूपहोल दिखा जो या तो लाभांश की दिक्कत पैदा कर रहा था या फिर आने वाले समय में किसी एक के एकाधिकार की सम्भावना बन रहा था! इसलिए इसे प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी रखना उचित समझा गया! बेडू सिर्फ गढवाल ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण पहाड़ में एक ऐसा प्रचलित नाम है जो हर किसी की जुबान पर चढा हुआ शब्द है इसलिए इसकी ख़ूबसूरती को हम टोटल ऑर्गनिक उत्पाद से जोड़कर देखते हुए कोशिश करेंगे कि हम गढवाल से बनने वाले उत्पाद को मार्केट देते समय उसकी गुणवता का बिशेष ध्यान रखेंगे!
ज्ञात हो कि बेडू समूह में वर्तमान में 20 से 25 लोग रोजगार पा रहे हैं व समूह का लक्ष्य क्षेत्र के लगभग 300 लोगों को आगामी दो बर्ष के अंतर्गत रोजगार प्रदान करने का लक्ष्य है, ताकि यहाँ का युवा पलायन करने की जगह गाँव में रहकर भी शहर सा वेतन पा सके गाँव, खेत खलियान को आबाद रख सके! बेडू समूह ने इस संकल्पना में चार बिषय शामिल किये है जिनमें मिनरल वाटर प्लांट, फ़ूड प्रोसेसिंग, एनिमल फार्मिंग और एफएमसीजी प्रोडक्ट शामिल हैं!
इसके एफएमसीजी के उत्पाद जिंसमे साबून, सेनेटाइजर, फेश वाश, फ्लोर क्लीनर, जैविक शहद,मसाले, जैसी लगभग 27 उत्पाद जल्दी ही बाजार में उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही डेयरी उत्पाद जैसे बेड़ू का दूध, दही, पनीर, मक्खन घी आदि भी आपके लिये बाजार में उपलब्ध हो जायेगे। अमित बताते हैं कि भेमल यमकेश्वर क्षेत्र में काफी मात्रा में होता है इसलिए उसकी वृहदता को देखते हुए यह भी ध्यान में रखा गया है कि कैसे हम सीधा लाभांश ग्रामीणों को दे सकें! उसके लिए हमने भेमल से पंचतत्व अर्थात 4 प्रकार की साबुन, हैण्डवाश, शैम्पू, सॉवरजेल व तेल निर्मित किया है जो शीघ्र ही बाजार में उपलब्ध हो जाएगा! इसके अलावा दालचीनी, देवदार व बकरी के दूध से भी साबुन निर्माण किया जा रहा है! क्योंकि यमकेश्वर में बकरी पालन उद्योग यहाँ का पुस्तैनी व्यवसाय रहा है इसलिए बेडू समूह का पहला लक्ष्य यह है कि वे कैसे ग्रामीण कास्तकार को भी इसमें भागीदार बना सके उसका पूरा पूरा ध्यान रखा गया है! बकरी के दूध से निर्मित वर्तमान में बाजार में जो साबुन उपलब्ध हैं व=उनकी कीमत 300-400 रूपये है जबकि बेडू इसी साबुन को बहुत सस्ते दामों पर बाजार देने की कोशिश कर रहा है!
2 करोड़ की शुरूआती लागत से छोटी बिजनी में ही मिनरल वाटर प्लांट लगने जा रहा है जिसमें बेडू समूह रात दिन के अथक प्रयास पर जुटा हुआ है! अब देखना यह है कि क्या बेडू की इन गतिविधियों पर सरकार की साकारात्मक नजर रहेगी या फिर गिद्ध दृष्टि ..! वैसे लगता तो यही है कि उत्तराखंड सरकार ऐसे उद्योग के लिए हर सम्भव सहायता करने को तत्पर रहेगी ताकि .उद्योग पहाड़ चढ़ सकें व पलायन ही न रुके बल्कि रिवर्स पलायन की सरकार की योजना सफल हो सके!