Sunday, March 22, 2026
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अपनी ही खबर पर मुखर हुए लोकगायक नेगी।राष्ट्रीय सहारा के लेख पर उठाए सवाल!

(मनोज इष्टवाल)

सोशल साइट फेसबुक पर लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी की उस पोस्ट ने बबाल मचाया हुआ है जो खुद उन्हीं पर केंद्रित है। बबाल इसलिए मचा है क्योंकि राष्ट्रीय सहारा को दिए अपने इंटरव्यू पर ही उन्होंने प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा है कि मेरे बयान को अखबार के संवाददाता ने तोड़ मरोड़कर पेश किया है। 

लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने फेसबुक पर लिखा है कि “मित्रो। प्रवासी उतराखण्डी लगभग 50-60हजार भाई वहन जो कौरोना के इस दौर मे वापस अपने घर गांव लौटे हैं उन्हे यहां रोकने के लिये मैने सरकार को कुछ सुझाव दिये थे कहा था कि सरकार यथा सम्भव उन्हे रोजगार उपलव्ध कराये स्वरोजगार के लिये न्यूनतम ब्याज पर बैंको से लोन दिलाये और सम्बन्धित विभाग को लटकाने के बजाये सहयोग करना सुनिश्चित करे तथा खेती पशुपालन से जोडने के लिये सर्वप्रथम चकबन्दी करवाये बिना चकबन्दी के पहाड़ों मे व्यवसायिक खेती सम्भव नही है।जन स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर मे भी प्रयाप्त सुधार की आवश्यकता है। मै देख रहा हूं कि एक अखबार राष्टीय सहारा के सम्वाददाता ने मेरे बयान का हवाला देकर लिखा है कि पलायन रोकने की सरकार की ताकत नहीं है। ऐसा विरोधाभासी वाक्य मैने नही कहा मित्रो अगर सरकार मे ताकत नही होती तो सरकार को सुझाव क्यों दिये जाते। खबर को सनसनीखेज बनाने के लिए मीडिया वालों ने पहले भी मेरी बात को तोड मरोड कर प्रस्तुत किया है।”

लोकगायक नेगी के इस रहस्योघाटन के बाद उनके प्रशंसकों ने राष्ट्रीय सहारा में छपे इस लेख पर तरह-तरह के प्रश्न लगाने शुरू कर दिए, साथ ही पत्रकार व पत्रकारिता के गुण अवगुण भी समझाने शुरू कर दिए हैं। कोई सहारा को बेसहारा कह रहा है तो कोई यह लिखने में भी गुरेज नहीं कर रहा है कि नेगी जी अपने नजदीकियों पर भी नजर रखें।

यहां एक पल के लिए एक पत्रकार होने के नाते मैं यही कहूंगा कि राकेश रमण शुक्ला नौसीखिया पत्रकार तो नहीं हैं जो एक सिलेब्रिटी का साक्षात्कार छापते समय इतनी बड़ी लापरवाही करेंगे कि जो सिलेब्रिटी ने कहा ही नहीं उसे नमक मिर्ची लगाकर छाप दें। अक्सर किसी भी अखबार की डेस्क सम्भाल रहे पत्रकार किसी भी खबर का टाइटल खुद बदलकर लिख लेते हैं ताकि फील्ड कवरेज कर रहे पत्रकार को अपनी पत्रकारिता पर अहम पैदा न हो। मुझे लगा कि यहां अखबार के पत्रकार राकेश रमण शुक्ला ने यह टाइटल स्वयं नहीं दिया होगा। लेकिन जब यह कटिंग बायलाइन देखी और इंट्रो में देखा कि अंतिम टाइटल वाली बात वहां भी है तो स्पष्ट हो गया कि टाइटल भी बायलाइन न्यूज़ पर ही आधारित है।

मुझे लगता है कि वरिष्ठ पत्रकार राकेश रमण शुक्ला ने लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी का इंटरव्यू करते समय ऐतिहात के तौर पर उन्हें रिकॉर्ड अवश्य किया होगा। वैसे लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी कुछ समय से गाहे-बगाहे टारगेट भी हो रहे हैं, ऐसा मेरा मानना है। चाहे मसला देवप्रयाग में शराब फैक्ट्री सम्बन्धी बयान हो या अन्य। कुछ समय से वे बेवजह टारगेट होते नजर आ रहे हैं।

सूत्र तो यह भी कहते हैं कि इस बार लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी को पद्मश्री या पदमभूषण मिलने के पूरे आसार थे लेकिन ऐन एक पत्रकार द्वारा उनसे कोई कॉमरेडों का गीत गवाकर सारा पानी फेर दिया। अब इस सब में सच्चाई कितनी है यह कहा नहीं जा सकता है लेकिन इतना जरूर है कि लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी को टारगेट करने के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर कोई ग्रुप अवश्य सक्रिय है। 

राष्ट्रीय सहारा में छपे उनके ऊपर लेख पर लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी की तल्खी पर कुछ लोग आश्चर्य भी व्यक्त कर रहे हैं कि लोकगायक नेगी जैसे विशाल व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति को इस बात पर इतनी गम्भीरता नहीं दिखानी चाहिये थी वहीं दूसरी ओर लोकगायक नेगी जी के हजारों समर्थक इसे बेबात का बतंगड़ बताकर अखबार व पत्रकार को खरी खोटी सुना रहे हैं।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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