Tuesday, March 5, 2024
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स्वरांजलि संगीत विद्यालय ने धूमधाम से मनाया 71वां गणतंत्र दिवस।

विकास नगर (देहरादून) 26 जनवरी 2020 (हि. डिस्कवर)

विकास नगर के बेलावाला क्षेत्र में अवस्थित स्वरांजलि संगीत विद्यालय द्वारा विगत बर्ष की भांति इस बर्ष भी बड़ी धूमधाम ले साथ गणतंत्र दिवस पर रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किये गए। जिसमें क्षेत्र वासियों, स्कूली छात्र छात्राओं व देहरादून से आये लोककलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वरांजलि संगीत विद्यालय की संस्थापिका शांति वर्मा तन्हा द्वारा कार्यक्रम स्थल पर ध्वजारोहण कर किया गया। तदोपरान्त महात्मा गांधी व सरस्वती के चित्रों पर पुष्प चढ़ाए गए व मालाएं पहनाई गयी। कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल की छात्रा रेखा पटवाल द्वारा सरस्वती वंदना के साथ किया गया। जहां एक ओर श्रीमती आशा नागर द्वारा अपने भाषण में गणतंत्र दिवस की महत्तता पर प्रकाश डाला गया वहीं दूसरी ओर मास्टर वेदांश द्वारा संगीतकार व गायक जुबिन नौटयाल के गीत “बहुत आई गई यादें..!” कीबोर्ड व हारमोनियम की संगत देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

रजत के वादन पर छोटी बच्ची द्वारा “स से सागर की लहरें..!” गाकर सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। दूसरी ओर नरेंद्र सिंह रावत द्वारा एक भजन प्रस्तुत किया गया।
सुप्रसिद्ध गायिका सितारा ने देशभक्ति गीत “ए मेरे प्यारे वतन..!” गाकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरी, जबकि शुभम नौटियाल व नेहा कुमारी द्वारा पंजाबी नृत्य भांगड़ा कर सबको थिरकने को मजबूर कर दिया। मास्टर वेदांश ने गढवाळी गीत ” गोरी मुखड़ी सजीली. .!” गाकर व निकिता ने हिमाचली गीत “माइये नी मेरिये…!” पर नृत्य कर कार्यक्रम में रौनक ला दी।

स्वरांजलि की छात्रा भारती ने देशभक्ति गीत, अनुज ने व श्रीमती आशा नागर द्वारा गजल व रेखा पटवाल ने गढवाळी गीत प्रस्तुत किये। इस दौरान कई समाजसेवी व जनप्रतिनिधियों द्वारा भाषण भी दिए गए व स्वरांजलि के छात्र छात्राओं द्वारा जौनसारी लोकगीत लोकनृत्य प्रस्तुत किया गया।

बाहर से आये कलाकारों में जागरूक प्रयास संस्था द्वारा देशभक्ति गीत प्रस्तुत करने के साथ संगीत से जुड़ा ही एक बेहतरीन नाटक प्रस्तुत किया गया जबकि थाती माटी समिति द्वारा भी गढवाळी जौनसारी व हिमाचली रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए। इस दौरान सुप्रसिद्ध कलाकार लियाकत अली, विशाल सावन, गायत्री, मीना, राजिका क्षेत्री इत्यादि ने भी अपनी लोक प्रस्तुतियां दी।

लोकगायक भीम दत्त शर्मा, अंकित सेमवाल, ममता आर्य इत्यादि ने भी कार्यक्रम प्रस्तुत किये। कवयित्री विमला आर्य द्वारा देशभक्ति कविता का प्रस्तुतिकरण किया गया जबकि बांसुरी वादक से.नि. सूबेदार खत्री जी द्वारा बांसुरी वादन व माउथ ऑर्गन बजाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के अंतिम क्षणों में अपने अभिभाषण में स्वरांजलि संगीत विद्यालय की संस्थापिका सुश्री शांति वर्मा “तन्हा” द्वारा बॉर्डर पर देश की रक्षा कर रहे सैनिकों व अब तक देश के खातिर सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को याद करते हुए कहा कि आज आजाद भारत में जहां हम एक ओर शकुन की सांस ले रहे हैं वहीं देश के ये निगहबान बर्फीले तूफानों में सरहद की चौकियों पर मुस्तेदी से पहरेदारी कर रहे हैं। उन्होंने स्कूल के छात्र-छात्राओं का आवाहहर खबर पर पैनी नजर। पढिये हिमालयन डिस्कवर।न करते हुए कहा कि देश के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान ही सच्चे देशभक्त की निशानी है। जैसे कि संगीत के बिना जीवन सूना है वैसे ही देश और देशभक्त के बिना किसी समाज की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। शांति वर्मा तन्हा ने क्षेत्रीय जन मानस व जनप्रतिनिधियों का धन्यवाद करते कहा है कि स्वरांजलि संगीत विद्यालय द्वारा संगीत के क्षेत्र में हर तरह के संसाधन जोड़े गए हैं जो बिना आप लोगों के सहयोग से सम्भव नहीं है, उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस विद्यालय को आगे बढ़ाने में आप लोग यथासम्भव सहयोग करेंगे।

ग्राम प्रधान बेलावाला नरेंद्र सिंह तोमर ने स्वरांजलि संगीत विद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा दी गयी रंगारंग प्रस्तुति की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि जहां भी जब भी विद्यालय को ग्रामीण स्तर पर सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी वह हमेशा विद्यालय परिवार के साथ खड़े मिलेंगे।

कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे ग्राम प्रधान नरेंद्र सिंह तोमर वार्ड मेम्बर श्रीमती आरती राणा, सूबेदार धर्मानन्द बिजल्वाण, धर्म सिंह राठौर, श्रीमती मधुबाला राठौर, पूर्व प्रधान प्रकाश, श्रीमती ज्योति, श्रीमती रंजीता, भजन लाल शाह, डॉ नागर इत्यादि ने स्वरांजलि संगीत विद्यालय के क्रियाकलापों की भूरी भूरी प्रशंसा की।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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