Sunday, March 3, 2024
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रौंतेली रवाई का रवाई लोक महोत्सव का आगाज 28 दिसम्बर से!

(मनोज इष्टवाल)

कुछ खूबसूरत चेहरों ने यह रवानगी भर कहें या फिर सिद्दत के साथ उस यौवना का श्रृंगार करने की मुहिम जिसकी गोद से बहती यमुना, कमल नदी, केदार गंगा सहित जाने कितनी नदियों का जल वहां की आवोहवा में हरियाली की ताजगी के साथ खेत खलिहानों में पकती सूखती मंडती फसलों का अन्न, बैलों के श्रृंगार में उनकी सींगों पर लगा तेल व विभिन्न तरह की झूलती मालाएं, घंटियां! आँगन खेतों में रंभाती गौ व उनकी बछिया! दूर बुग्यालों में भेड़ों के झुण्ड के बीच भेड़ालों के सुरीले सुरों में गूंजते छोड़े लामण! माँ-बहनों का खेत-खलिहानों में अपनी मिटटी में बोये बीजों के साथ वह लाड़-दुलार व आंगनों में ढोल की थाप में थिरकते क़दमों के साथ नित दिनचर्या में शामिल बाजुबन्द नृत्य-गीत! अहा…मानों पूरी रवाई में ही देवलोक उतर आया हो! यही वानगी तो इसे रौंतेली रवाई का नाम देती है!

चंद मुखौटे ही तो होते हैं जो किसी भी समाज को हर युग में दिशा-दशा देते हैं ! ऐसे ही कुछ खूबसूरत पढ़े-लिखे चेहरों को जब लगा कि वर्तमान की चकाचौंध में हम अपना यह सब खोने जा रहे हैं जो प्रकृति व हमारे पुरातन समाज ने हमें अंजुली भर-भर के उपहार के रूप में दिया! हम सचमुच ख़ास से आम होते जा रहे हैं क्योंकि हमारे लोक विन्यास में शामिल हमारी पोशाकें, हमारे आभूषण व हमारी बोली भाषा के साथ साथ हमारी लोक परम्पराओं को जीवंत बनाने वाले लोकगीत-लोकनृत्य, तीज-त्यौहार हमारे हाथों से छूटते जा रहे हैं तब ये चेहरे इकट्ठा होने शुरू हुए! और इन्होने सभी चीजों का एक प्लेटफॉर्म तैयार किया जिसे नाम दिया रवाई लोक महोत्सव!

रवांल्टा शब्द …..यहाँ की जुबान पर आज भले ही रवाई का अहसास करवाता हो! और करवाए भी क्यों नहीं क्योंकि तिलाड़ी काण्ड के महानायक रवांल्टा ही थे जिन्होंने सबसे पहले टिहरी राजशाही के अत्याचारों के विरुद्ध बिगुल फूँका था! वही कार्य यह सम्पूर्ण टीम शशिमोहन रवांल्टा के नेतृत्व में आगे बढाने का प्रयास करती हुई कब बचपन से यौवन में प्रवेश कर गयी पता ही नहीं चला!

रवाई लोक महोत्सव की टीम में ऐसा नहीं है कि सिर्फ शशिमोहन रवांल्टा की ही भागीदारी हो ! यहाँ रवाई क्षेत्र का वह हर प्रबुद्ध व्यक्तित्व पूरे मनोयोग से जुड़कर इस मुहीम में अपना सर्वस्व दे रहा है! अब चाहे वह प्रेम पंचोली हो या फिर प्रदीप रावत “रवांल्टा, नरेश नौटियाल, इशिता डोभाल, अनिता नौटियाल, दिनेश रावत, महावीर रवांल्टा इत्यादि दर्जनों लोग हों! सबकी अतुलनीय भागीदारी में रवाई लोक महोत्सव का यह तीसरा साल है जिसमें आपको दर्जनों ऐसे रंग दिखेंगे कि आप अभिभूत होकर कह उठेंगे – वाह…!

इन लोक परम्पराओं को संजोये रखने के लिए रवांई लोक महोत्सव की टीम ने यहाँ के पारम्परिक लोक नृत्य, यमुना घाटी के प्रसिद्ध सारंगी नृत्य, बीट्स ऑफ़ यमुना वैली, पांडवकालीन जोगटा नृत्य, सम्मान समारोह, रवांल्टी कवि सम्मेलन, रवाई घाटी के प्रसिद्ध पकवान व स्कूली छात्र-छात्राओं के विभिन्न कार्यक्रमों का समागम रखा है! हर साल नौगांव (उत्तरकाशी) में आयोजित होने वाला रंवाई लोक महोत्सव इस बार बेहद भव्य होने जा रहा है। जिसकी तैयारी जोरों पर है। जिसमें रवांल्टी, जौनपुरी, बंगाणी, जौनसारी लोकभाषा, सहित लोकसंस्कृति, लोकसाहित्य पर परिचर्चा, दस्तावेजीकरण और लोक कवि सम्मेलन आयोजित होगा। जबकि बीट्स ऑफ यमुना वैली के तहत एक वृहद्ध सांस्कृतिक समागम होगा। जिसमें एक साथ 40 से अधिक लोक कलाकार मंच पर 19 पहाड़ी लोकवाद्य यंत्रों की अद्भुभुत प्रस्तुति प्रस्तुति देंगे। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि रंवाई लोक महोत्सव सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संबर्धन में मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर दौलतराम रवांल्टा सम्मान, बर्फीयालाल जुंवाठा सम्मान, राजेंद्र सिंह रावत सम्मान, पति दास सम्मान, से भी विभिन्न लोगों को सम्मानित किया जाएगा।

यहाँ तक पहुँचने के लिए आप राजधानी देहरादून से मसूरी होकर यमुना पुल, नैनबाग़, डामटा, लाखामंडल होकर नौगाँव पहुँचते हैं! नौगाँव चौराहे पर खड़े होते ही आप किसी से भी पूछ लीजिये कि यह आयोजन कहाँ है तो आपको हर कोई जानकारी दे देगा! अगर आप भी लोकसंस्कृति को करीब से देखना चाहते हैं तो चले आइये 28, 29 और 30 दिसम्बर को नौगांव में यमुना टौंस घाटी की सांस्कृतिक विरासत को देखने.. !

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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