Monday, June 24, 2024
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राज्यपाल ने सीमांत क्षेत्र जौलजीबी में ऐतिहासिक जौलजीबी व्यापारिक एवं सांस्कृतिक अंर्तराष्ट्रीय मेले में शिरकत की।

देहरादून/पिथौरागढ़, 19नवम्बर 2019 

राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने पिथौरागढ़ जिले के सीमांत क्षेत्र जौलजीबी में ऐतिहासिक जौलजीबी व्यापारिक एवं सांस्कृतिक अंर्तराष्ट्रीय मेले में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने कहा कि इस 200 वर्ष पुराने मेले को बड़े स्तर पर मनाए जाने हेतु सभी को मिलजुल कर प्रयास करने होंगे। एक जागरूक नागरिक कमेटी का गठन किया जाय,ताकि बाहरी क्षेत्रों के लोग भी अधिक से अधिक संख्या में यहाँ पंहुचें।

मेले को स्थानीय लोगों द्वारा जीवित रखा गया है, विशेष रूप से इसमें महिलाओं की अहम भूमिका है। इसे हाइटैक करने की आवश्यकता है, पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से अधिक प्रचार प्रसार कर इस मेले को एक विशाल स्वरूप दिया जा सकता हैं। इस क्षेत्र में जड़ी बूटी, हस्तशिल्प का विशेष महत्व है। जड़ी बूटी को बढ़ावा देने के साथ ही उसकी बेहतर मार्केटिंग भी होनी आवश्यक है। इस मेले में जहां एक ओर यहॉ की सांस्कृतिक परम्परा की झलक दिखने को मिलती है वहीं उचित दरों पर स्थानीय जड़ी बूटी व उत्पाद भी मिल रहे हैं। आज भी मेले में वस्तु विनिमय परम्परा को जीवित रखा गया है। 

राज्यपाल ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग होनी आवश्यक है इस कार्य को स्थानीय लोगों के माध्यम से कराया जाय, ताकि उन्हें बेहतर लाभ मिल सके। अपने संबोधन में राज्यपाल ने स्थानीय महिला समूहों द्वारा किए जा रहे स्वरोजगार के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं को अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर अपनी अलग पहचान बनानी आवश्यक है। बेटियों को सहयोग कर उनकी प्रतिभाओं को आगे ले जाने का कार्य सभी माताएं करें।रक्तदान शिविर लगाए जाने के साथ ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान व स्वच्छता अभियान को भी आगे बढ़ाने की अपील की। मेले में विभिन्न क्षेत्रों से आई महिला समूह की सदस्यों से रूबरू होते हुए उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी लेने के साथ ही उनकी समस्याएं भी सुनी।

राज्यपाल ने कहा कि वह अपनी समस्याओं के सम्बंध में जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी को भी अवगत कराएं ताकि शीघ्र ही समस्याओं का समाधान हो सके। जिलाधिकारी डॉ विजय कुमार जोगदण्डे ने कहा कि जौलजीबी मेला भारत नेपाल चीन एवं तिब्बत के मध्य व्यापारिक मेले है, आज इसका स्वरूप बदल गया है फिर भी स्थानीय लोगों द्वारा इस परंपरा को कायम रखा गया है। मेले में सांस्कृतिक एवं आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखे जाने के प्रयास रखे गए हैं साथ ही मेले के माध्यम से ग्रामीण उत्पादों, उद्योगों को लाभ दिए जाने के भी प्रयास किए जा रहे है। इस अवसर पर हस्त शिल्प कला केन्द्र की अध्यक्षा लीला बंगयाल ने क्षेत्र में महिला समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं गतिविधियों की जानकारी दी।

मेले में समिति के सहयोग से आश्रम पद्धति विद्यालय बलुवाकोट के 120 छात्र छात्राओं को गर्म ऊनी कपड़े राज्यपाल नेे वितरित किए । इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती वन्दना, अध्यक्ष नगर पालिका धारचूला राजेस्वरी देवी, उप जिलाधिकारी धारचूला व मेला मजिस्ट्रेट ए के शुक्ला, स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधि, व्यापारी आदि मौजूद थेे।

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