Saturday, May 18, 2024
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पर्यावरण संरक्षण के लिये वन्य जीव संरक्षण भी आवश्यक-राज्यपाल

 राजभवन देहरादून 03अक्टूबर, 2019(हि. डिस्कवर)

राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने कहा कि वनों व वन्य जीवों के सरंक्षण में  फाॅरेस्ट गार्ड की भूमिका अहम है। फाॅरेस्ट गार्ड निडर होकर कार्य करें तथा किसी प्रलोभन अथवा दबाव में न आए। राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने गुरूवार को राजभवन में वन विभाग द्वारा आयोजित वन्य जीव सप्ताह 2019 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने वन विभाग के त्रैमासिक न्यूजलेटर का अनावरण, उत्तराखण्ड में पाए जाने वाले दुर्लभ पक्षियों के ब्राॅशर का विमोचन, उत्तराखण्ड के जैव विविधता बोर्ड द्वारा दुर्लभ जीवों के एक पोस्टर का विमोचन भी किया।

इस अवसर वन विभाग द्वारा ‘‘बर्ड वांचिग’’ पर एक लघु फिल्म भी दिखायी गई। इस अवसर पर वन विभाग द्वारा मानव व वन्य जीव संघर्ष को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए ‘सिक्योर हिमालय परियोजना’ के सहयोग से ‘‘राज्य स्तरीय वन्य जीव प्रबन्धन सूचना तंत्र’’ एवं मोबाइल ऐप की शुरूआत की गयी। कार्यक्रम के दौरान राजकीय विद्यालय पोखाल, टिहरी के छात्र-छात्राओं द्वारा गुलदार का दग्डया नाटक का मंचन किया गया।  कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने कहा कि उत्तराखण्ड के जन-मानस का वनों एवं वन्यजीवों के संरक्षण एवं संवर्धन से एक बहुत पुराना पारम्परिक लगाव है। उत्तराखण्ड राज्य गौरा देवी की भूमि है जिन्होने चिपको आन्दोलन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उत्तराखण्ड में ही जिम काॅर्बेट पार्क है जो बाघों के संरक्षण के लिए विश्वविख्यात है।      

राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने कहा कि बढ़ती आबादी के साथ-साथ वनों में मनुष्यों का हस्तक्षेप बढ़ा है। पर्यावरण मंे परिवर्तन के कारण भी बहुत से वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक स्थान पर भोजन नहीं मिल पा रहा है और वे बस्तियों, गावों में प्रवेश कर रहे हैं। मनुष्य को अपने साथ-साथ पेड़-पौधों, नदियों, जल स्रोतों और वन्यजीवों का भी ध्यान रखना होगा। राज्यपाल ने स्कूली बच्चों से आग्रह किया कि वे अपने तथा अपने माता-पिता के जन्म दिन पर पेड़ अवश्य लगाएँ और उनकी देखभाल करें। जल स्रोतों को कभी प्रदूषित न होने दें तथा जल का संरक्षण करें। पर्यावरण के संरक्षण के लिए देश को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करने का अभियान चलाया जा रहा है। सभी इसमें सक्रिय भागीदारी निभायें। 

प्रमुख सचिव आनंदवर्द्धन ने कहा कि वन्य जीव संरक्षण के कार्य में स्थानीय समुदाय व आम जन को जोड़ना बहुत आवश्यक है। प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने कहा कि वन विभाग द्वारा इस वर्ष वन्य जीव संरक्षण सप्ताह के तहत वन्य जीवों के संरक्षण में आम लोगों को जोड़ा जा रहा है। वन विभाग द्वारा प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण का कार्य किया जा रहा है। स्कूली बच्चों के लिए पर्यावरण संरक्षण व प्रकृति प्रेम के प्रति जागरूक करने हेतु नेचर कैम्प लगाये जा रहे है। देहरादून में झाजरा में शहरी लोगों के लिए सिटी फाॅरेस्ट बनाया जा रहा है। 

सचिव राज्यपाल रमेश कुमार सुधांशु ने कहा कि प्रकृति प्रेम तथा वन्यजीवों का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। अथर्ववेद में पृथ्वी को माता कहा गया है। हमें प्रकृति का सम्मान व संरक्षण माता के समान करना चाहिए। इस अवसर पर मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक श्री राजीव भरतरी, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, नव नियुक्त फाॅरेस्ट रेंजर एवं विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।  

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