Tuesday, May 28, 2024
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नयार घाटी में गूंजे “चांठौं का गीत ..काँठौं की कविता”! दिग्मोहन नेगी की नयी पहल ने बांटे पहाड़ के सुख-दुःख!

(मनोज इष्टवाल)

कभी यह दिमागी उपज हुआ करती थी कि यक्ष प्रजापति के यज्ञ के बाद जो विध्वंस आदिदेव महादेव ने किया था उसके अंशों के अलावा अब नयार घाटी में न धर्म संस्कृति ही दिखती है न लोक संस्कृति ही! सच कहूँ तो मुझे लगता था कि इस घाटी में कभी लोकसंस्कृति के झूमते गीत नृत्य नहीं रहे होंगे तभी यह घाटी सिर्फ व्यापारिक दृष्टि से ही फलती-फूलती दिखाई देती है और इसके लोकसमाज के पास सिर्फ और सिर्फ यही एक मात्र आयाम है जो इनकी पहचान के रूप में पल्वित पुष्पित होता रहा है! लेकिन कब यह फिर करवट बदलकर उस अवधारणा को झुठला गया यह कहना मुश्किल है क्योंकि अब जबकि ठेठ चांठौं (चोटियाँ) के घ्वीड काँठौं (पहाड़ों) पर उतरने लगे हैं और यहाँ का जनमानस अपनी लोकसंस्कृति को मिटाकर प्लावित हो रहा है तब सप्तसिंघव प्रदेश की नयार घाटी ने दिग्भ्रमित होते सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की अनमोल डोर ऐसे थाम ली मानों समुद्र मंथन चल रहा हो! नयार घाटी में लोक संस्कृति के हंसते-भीगते, रोते-रुलाते खुद बिसराते गीतों व कविताओं को नया रूप देने के लिए दिग्मोहन नेगी की कुंती दयाल फाउंडेशन ने चमोलीसैण गाँव में अनूठी पहल की और गूँज गया “चांठौं का गीत ..काँठौं की कविता” का गान!

विगत 10 नवम्बर 2019 को चमोलीसैण सतपुली में कवि सम्मलेन में उमडी रिकॉर्ड भीड़ ने यकीनन यह सोचने जानने को मजबूर कर दिया कि क्या हमारी थाती-माटी के अंकुरित बीजों की पौध को अब प्रयुक्त खाद मिलनी शुरू हो गयी है क्योंकि महानगरों में भी कवि सम्मेलनों में कभी इतनी भीड़ जुटती दिखाई नहीं दी! प्रथम दृष्टा तो यह लगा कि जो जनमानस “चांठौं का गीत ..काँठौं की कविता” कार्यक्रम में सम्मिलित होने आया है उसे भला काव्य व कवि से क्या वास्ता क्योंकि इन में ज्यादात्तर ग्रामीण समाज की महिलायें सम्मिलित था! मुझे लग रहा था कि कविता पाठ शुरू हुआ नहीं कि कुछ ही देर बाद पंडाल खाली हो जाएगा लेकिन यह सब हतप्रभ कर देने वाला था क्योंकि लगभग साढ़े तीन घंटे चले इस कार्यक्रम को देखती मातृशक्ति अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई उन्होंने कवियों की हर कविता का रस्वादन किया और कवियों ने अपनी अपनी बारी में खूब तालियाँ भी बटोरी!

कुंती दयाल फाउंडेशन की टीम (अध्यक्ष व संस्थापक बीरेंद्र सिंह नेगी, सह-संस्थापक चन्द्र सिंह नेगी, सुलतान सिंह नेगी, दिग्मोहन नेगी, ट्रस्टी जगमोहन नेगी व संदीप नेगी) द्वारा नयार घाटी में विभिन्न क्षेत्रों में अतुलनीय योगदान दे रहे लोगों को सम्मानित भी किया गया! कृषि क्षेत्र के लिए जाने-माने कृषि बिशेषज्ञ विद्यादत्त शर्मा उनियाल, चकबंदी के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए गणेश सिंह ‘गरीब” व कृषि अनुसंधान में अतुलनीय योगदान के लिए सुधीर सुन्द्रियाल, कृषि औधानिकी में अजय सिंह रावत ‘अजय” ग्रामीण पत्रकारिता हेतु जगमोहन “डांगी”, सामाजिक सरोकारों के लिए सुंदर सिंह चौहान व भास्कर द्विवेदी को सम्मान स्वरूप प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिह्न, नगद धनराशी व दुशाला ओडाकर मुख्य अतिथि संजय दरमोड़ा, हंस फाउंडेशन के प्रदेश प्रभारी पदमेंद्र सिंह बिष्ट व कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लोकगायक गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी द्वारा सम्मानित किया गया! वहीँ चुनाव जीतकार आये द्वारीखाल विकास खंड के प्रधान, जिला पंचायत सदस्य व क्षेत्र पंचायत सदस्यों को नवनिर्वाचित प्रमुख महेंद्र सिंह राणा द्वारा कुंती दयाल फाउंडेशन के माध्यम से सम्मानित करवाया गया!

“चांठौं का गीत ..काँठौं की कविता” नामक गढ़वाली कवि सम्मेलन में कुल 11 कवियों ने शिरकत की, जिसका मंच संचालन गणेश खुगशाल “गणी” ने किया! जिनमें कवि धर्मेन्द्र नेगी ने “कु छन वू..जू सांकी हमरी दबाणा चन..!’ युवा कवि आशीष सुन्द्रियाल “मूसौं का गौंमा बिरलू बणीग्ये प्रधान” ओम बधाणी अफु दारु अफु मुर्गा म बिकदा हम” गिरीश सुन्द्रियाल “स्वीणा म ऐकि मेरी निंद पिरेग्ये” मदन डुकलान “धैs धाद धवडी का दिन छाया” गणेश खुगशाल गणी “ऊंला अखबारम छाप्याळ अपड़ा बुबै फोटो..!” संदीप रावत “मनकी आंख्युं अफ्वी देखि..!” जगमोहन नेगी “मन की बात लुकाणु रैंदा” राकेश खंतवाल “धन्य-धन्य हे देवभूमि” व हास्यकवि हरीश जुयाल “कुटुज” की हास्य कविता भैजी बण गए हम भुला की बरात में” काव्यपाठ ने सभी को मन्त्र मुग्ध कर दिया! गढ़रत्न लोकगायक व कवि नरेंद्र सिंह नेगी की कविता “ये भी हत्याणी व्हे भी लौंफ्याणी…!” ने खूब वाह-वाही बटोरी! कार्यक्रम की सबसे बड़ी ख़ूबसूरती यह थी कि ग्रामीण क्षेत्र में हुए इस कार्यक्रम को देखने के लिए लगभग डेढ़ हजार से ज्यादा लोग अंत तक जमे रहे जबकि कवि गोष्ठी में ऐसी भीड़ हो यह संशय का बिषय बना रहता है!

“चांठौं का गीत ..काँठौं की कविता” कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की भूमिका में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजय शर्मा दरमोड़ा, विशिष्ट अतिथि पद्मेंद्र सिंह बिष्ट, डॉ. एच एस मिन्हास, ब्लाक प्रमुख द्वारीखाल महेंद्र सिंह राणा, बृजमोहन सिंह रावत (मुख्यमंत्री के भाई), संजय नौडियाल, पीएन शर्मा, शिब सिंह रावत, दिनेश डोभाल, नरेंद्र नेगी चौंदकोटिया, संजय चौहान, जसपाल सिंह नेगी, मंजू भदोला, प्रभा बिष्ट, अशोक जोशी व वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल इत्यादि सम्मिलित थे!

कार्यक्रम का संचालन गणेश खुगशाल “गणी” संयोजन दिग्मोहन नेगी द्वारा किया गया जबकि अध्यक्षता गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी द्वारा की गयी!

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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