Saturday, May 18, 2024
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देश की राजधानी दिल्ली में उत्तराखंड लोकपर्व 2019 का आगाज आगामी 19-20 अक्टूबर को!

(मनोज इष्टवाल)

यकीनन उत्तराखंड प्रदेश बनने के बाद भले ही उत्तराखंड वासियों द्वारा रिकॉर्ड पलायन पहाड़ी जिलों से मैदानों के लिए हुआ हो! भले ही जिस विकास की बुनियाद पर उत्तराखंड राज्य आन्दोलन खड़ा हुआ था व राज्य बना था वह कहीं धूमिल सा हो लेकिन इस दौरान प्रवासी उत्तराखंडी जनमानस में चेतना के स्वर बुलंद हुए हैं व उन्होंने अपनी लोकसंस्कृति लोक सभ्यता व लोकसमाज को गौरान्वित करने के लिए देश विदेश में बड़े बड़े मंच तैयार किये हैं, जहाँ हर बर्ष यहाँ की लोक संस्कृति व लोकसमाज की धूम मची रहती है! अब चाहे मुंबई कौथीग हो या दिल्ली में होने वाले उत्तरायणी मेले या फिर दुबई, अमेरिका इत्यादि देशों के विभिन्न मंचों पर उत्तराखंड की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ! प्रवासी उत्तराखंडी समाज ने संगठित होकर इसे अमली जामा तो पहना ही दिया है!

जहाँ उत्तराखंडी समाज द्वारा बेंगलुरु यानि बैंगलौर जैसे शहर में जहाँ हिंदी भी ढंग से नहीं बोली जाती आगामी 17-18 नवम्बर में मंडाण लोकसंस्कृति उत्सव की शुरुआत की है वहीँ दिल्ली में उत्तराखंड लोकमंच की 25 वीं वर्षगाँठ पर इन्द्रा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र नई दिल्ली में 19 व 20 अक्टूबर, 2019 को उत्तराखंड लोकपर्व 2019 मनाने का आगाज किया है!

उत्तराखंड लोकमंच की उपाध्यक्ष व प्रज्ञा आर्ट्स थियटर ग्रुप की सर्वेसर्वा लक्ष्मी रावत ने सोशल साईट पर एनसीआर ही नहीं बल्कि भारत के कोने कोने में रह रहे उत्तराखंड वासियों का आवाह्न करते हुए संदेश दिया है कि आगामी 19 व 20 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले इस लोकपर्व पर पहुंचकर अपनी भागीदारी निभाएं!

उत्तराखंड लोकपर्व-2019 द्वारा इस दौरान उत्तराखंड की धर्म, लोकसंस्कृति, लोकसमाज व सभ्यता पर केन्द्रित विभिन्न कार्यक्रमों का आगाज किया जा रहा है जिनमें उत्तराखंड के लोक वाद्ययंत्र ढोल दमौ का वादन, लोकगीत व लोकनृत्य की अनुपम छटा, 8 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों के लिए “स्वर्ग से सुन्दर उत्तराखंड ” शीर्षक के तहत चित्रकला प्रतियोगिता, गढ़वाली, कुमाऊनी व जौनसारी भाषा के संरक्षण व संवर्धन हेतु कवि सम्मेलन जिसमें कवियों द्वारा गीत व कविता पाठ,कमल व्यूह
( केदारघाटी से आए 60 लोक कलाकारों दल द्वारा) महाभारत युद्ध में चक्रव्यूह में अभिमन्यु की धोखे से हत्या के बाद अर्जुन प्रतिज्ञा लेते हैं कि वे सूर्यास्त से पूर्व जयद्रथ का वध करेंगे। जयद्रथ की सुरक्षा के लिए गुरु द्रोण कमल व्यूह की रचना करते हैं।

युद्ध शुरू होने पर अर्जुन एक द्वार से दूसरे द्वार लड़ते हुए पहुंचते हैं, लेकिन जयद्रथ तक नहीं पहुंच पाते। वक्त बीतता जाता है। भगवान श्रीकृष्ण योगमाया की मदद से सूर्य को छिपा देते हैं। यह देख खुश होकर जयद्रथ बाहर निकल आता है, लेकिन अचानक सूर्यदेव प्रकट हो जाते हैं। इस पर कृष्ण अर्जुन से बोलते हैं कि सूर्य अस्त नहीं हुआ है। इसलिए जयद्रथ को मारकर प्रतीज्ञा पूरी करो। अर्जुन जयद्रथ को मार कर अपने पुत्र की हत्या का बदला लेते हैं।

उत्तराखंड की भाषाओं पर बने वृत्तचित्र/ फिल्मों का प्रदर्शन, गढ़वाली, कुमाऊनी व जौनसारी लोक संगीत को फ्युजन के साथ, उत्तराखंड के स्थापित युवा गायकों द्वारा संगीतकार सुभाष पांडे जी के संगीत संयोजन में बेमिसाल प्रस्तुतियां के साथ ही उत्तराखंड के लोकनृत्यों,उत्तराखंड के लोक वाद्ययंत्र ढोल दमौ का वादन, लोकगीत व लोकनृत्य की अनुपम छटा, “योग एक परिवर्तन” विषय पर योग गुरू द्वारा आख्यान व योग शिष्यों विभिन्न योग आसनों का प्रदर्शन, दिल्ली की पहाड़ी क्षेत्र की महिला कीर्तन मंडलियों द्वारा कीर्तन इत्यादि।

वहीँ पलायन विषय पर दर्शकों की भागीदारी से एक वृहद चर्चा जिसमें इस संभावना पर प्रकाश डालना कि कैसे विभिन्न उद्योगों के व रोज़गार के माध्यम से पलायन को रोका जाए व प्रवासी लोग उत्तराखंड वापस जाने लगें जैसे गम्भीर मुद्दे को भी शामिल किया गया है ।

यह अच्छी पहल कही जा सकती है कि उत्तराखंड के परिपेक्ष्य में उत्तराखंड की भाषाओं पर बने वृत्तचित्र/ फिल्मों का प्रदर्शन भी दोनों दिन किया जाना है साथ ही गढ़वाली, कुमाऊनी व जौनसारी लोक संगीत को उत्तराखंड के स्थापित गायकों द्वारा संगीतकार सुभाष पांडे जी के संगीत संयोजन में बेमिसाल प्रस्तुतियां साथ ही उत्तराखंड के लोकनृत्यों की की धूम भी दोनों ही दिन रहेगी।

कार्यक्रम के अंतिम दिन उत्तराखंड गौरव सम्मान से कई सुप्रसिद्ध हस्तियों को नवाजा जाएगा जिनका विभिन्न विधाओं में बिशिष्ट योगदान रहा है! उत्तराखंड गौरव सम्मान से लोककलाओं, साहित्य, लोकसंगीत, रंगमंच, फिल्म, खेल व सामाजिक कार्यों के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए सम्मानित किये जाएंगे।

यह सचमुच एक अभूतपूर्व कार्यक्रम होने जा रहा है जिसका दिल्ली वासियों को ही नहीं बल्कि उत्तराखंड के विभिन्न राज्यों में रह रहे उत्तराखंडी जनमानस को बेसब्री से इन्तजार है!

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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