Monday, June 24, 2024
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तबलीगी जमात यानि मुस्लिम कट्टरपंथ का चेहरा! क्या उत्तराखंड में भी बड़ी संख्या में हो रही है कट्टरपन्थ की एंट्री?

(सम्पादकीय/मनोज इष्टवाल)

जिसका कोई संविधान नहीं, जिसका कोई पंजीकरण नहीं! सूडान में लश्कर-ए-तोयबा का आतंकवादी हामिर, कुख्यात आतंकवादी मोहम्मद सुलेमान बर्रे, अलकायदा के मुजाहिद्दीन बटालियन कमांडर अबु-जुबैर-अल-हलीली, सऊदी अरब का नागरिक कई देशों में बांछित अल-बुखारी, आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिद्दीन जैसे कई आतंकी व आतंकी संगठनों के तार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जिस तबलीगी जमात से जुड़े हों व जिसका सबसे बड़ा मुख्यालय भारत बर्ष में निजामुद्दीन मरकज हो व जो रूस, उजबेकिस्तान, तजाकिस्तान, कजाकिस्तान जैसे देशों में प्रतिबंधित सूची में हो वह संगठन इतना कुख्यात होने के बाद भी मुस्लिम चरमपंथियों की शाखा के रूप में फल-फूल रहा है और वह भी देश की राजधानी दिल्ली में तो आश्चर्य होगा ही होगा! फिर भी मन नहीं मानता कि तबलीगी जमात में ऐसे लोग शामिल होंगे!

आइये तबलीगी जमातियों की निजामुद्दीन मरकज पर पहले बात करते हैं! दक्षिणी दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में पहले यह एक मस्जिद थी जिसे इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के अनुसार नौ मंजिला बना दिया गया! इसकी जमीन सम्बन्धी कोई कागज़ मौजूद नहीं है और न इतनी ऊँची बिल्डिंग बनाने की ही इस क्षेत्र में परमिशन है लेकिन कांग्रेस सरकार के दौरान इसका निर्माण बढ़ता गया! गृह मंत्रालय तक रक्षा सम्बन्धी व खुफिया जानकारी पहुँचती रही लेकिन न अफसरों के कानों में कभी जूं रेंगी न मंत्री-संतरी इत्यादि के! धार्मिक मामला जो ठहरा..!

इस मरकज को पूर्व में बंगले वाली मस्जिद के नाम से जाना जाता था! जो वर्तमान में तबलीगी जमात का अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय है! बताया जाता है कि यह 2000 बर्ग फीट अवैध जमीन पर बनाया गया मरकज है!

इसकी स्थापना भी बड़े अजीबो-गरीब तरीके से हुई है!  इसकी स्थापना की कहानी लिखने से पूर्व आर्य समाज के संत प्रचारक ब्रह्मा नन्द को जिन्होंने 1921 में मार बांधकर ओरंगजेब काल में मुसलमान बनाए गए हिन्दुओं का शुद्धिकरण कर उन्हें हिन्दू बनाना शुरू किया था की ह्त्या करने वाला अब्दुल रशीद तबलीगी हुआ!

आपको जानकारी दें दूँ कि तबलीगी जमात की स्थापना से पूर्व भले ही बहुत से हिन्दू मुस्लिम बनाए गए थे लेकिन न उन्हें कुरआन पढनी आती थी न उन्होंने अपनी चुटिया कटवाई थी और न मुस्लिमों की तरह दाढ़ी बढ़ाई व गोस्त खाना शुरू किया था! यहाँ तक कि उनके नाम भी हिन्दू ही थे लेकिन हिन्दू धर्म के अनुयायियों की उपेक्षाओं के कारण धर्म में लौटने पर भी पूर्णत: स्वीकार नहीं किये जाने के कारण इनके पास मुस्लिम बने रहने के अलावा कोई और चारा भी नहीं बचा था! बस फिर क्या था एक देवबंदी अध्यापक मोहम्मद इलियास जो देवबंद के पास ही सहारनपुर के मजहर-अल-उलूम मदरसे में शिक्षक था ने इन हिन्दू से मुस्लिम बने इन हिन्दू-मुस्लिमों को ही हिन्दुओं के विरुद्ध ही ऐसा हथियार बना डाला कि वे आज हिन्दू और हिन्दुस्तान के लिए सरदर्द बने हैं!

हम आज तक यह समझने की भूल करते रहे हैं कि मुस्लिम की हर शाखा बेहद खूंखार व कट्टर है, जिसका एक ही मकसद है हिन्दू और हिन्दोस्तान को बर्बाद करना लेकिन यह गलत है क्योंकि आले दर्जे के मुसलमान के दिल में भी उतनी ही वतनपरस्ती है जितनी आम हिन्दू में लेकिन मोहम्मद इलियास ने जिस कट्टरवादी संगठन को बनाने में अपनी जिन्दगी खफा दी और उसे तबलीगी जमात का नाम दिया वही आज किसी टाइम बम की तरह पूरे देश के लिए ही नहीं बल्कि अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर कई देशों के लिए खतरा बने हैं!

यह भी सच है कि 1921 में आर्यसमाज के प्रचारक ब्रह्मा नन्द को मौत के घाट उतार देने के बाद 1925 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के रूप में हिन्दुओं के एक समूह ने अपना जयघोष किया ताकि हिन्दू और हिंदुत्व जीवित रहे लेकिन किसी को क्या पता था कि 1927 में जिस तबलीगी जमात की स्थापना हो रही है वह मुस्लिम हितों की रक्षा की जगह हिन्दुओं के प्रति नफरत के बीज बोने की एक नर्सरी है!

1926 में हज यात्रा से लौटने के बाद मोहम्मद इलियास ने देवबंद से इस्तीफ़ा देकर पहले निजामुद्दीन औलिया सूफी संत (1238-1325) के यहाँ व बाद में निजामुद्दीन सुलतान बल्बन (1266-1286) के यहाँ सजदा करना शुरू किया! यहीं से इसने जितने भी हिन्दू जिन्हें मुसलमान बनाया गया था उन्हें हिन्दुओं के प्रति भडकाना शुरू किया और आखिरकार हरियाणा के पास मेवात में लेजाकर उन्हें बहाबी शिक्षा देनी शुरू की! वह उन्हें जरा भी यह सोचने का मौक़ा नहीं देता था कि उन्हें एक बार फिर लगना शुरू हो जाय कि वे या उनके पूर्वज तो हिन्दू थे! इतने में भी जब अपने को उसने असफल होता देखा तो आस-पास की मुस्लिम कम्युनिटी से चंदा लेकर मेवात में मस्जिद, मकवरे व मदरसे बनाने शुरू कर दिए! उसका एक मात्र लक्ष्य था कि किसी भी तरह से इन्हें मुस्लिम धर्म ग्रन्थों की शिक्षा देकर कुरआने पाक के हर्फ़ याद करवाकर ऐसा बना देना कि जो वह बोले –वही खुदा का कौल!

आज भी तबलीगी जमात के सबसे ज्यादा सदस्य हिन्दू से मुस्लिम बने लोग ही हैं जिन्हें हर सम्भव कट्टरपन्थ की शिक्षा जिसे बहाबी कहा जाता है दी जाती है! इन्हें समझाया जाता है कि पूरे विश्व में एक ही धर्म है और वह है इस्लाम..!

1941 में तबलीगी जमात की पहली परिषद् को सार्वजनिक करने का वक्त आया तो मौलाना मोहम्मद इलियास ने परिषद में 25 हजार लोग जोडकर सबको हतप्रभ कर दिया! इसमें सबसे ज्यादा लगभग 90 प्रतिशत वे मुसलमान थे जिन्हें मुगलकाल में हिन्दू से मुस्लिम बनाया गया था! 1944 में मोहम्मद इलियास की मौत के बाद उसके बेटे मौलाना मोहम्मद युसूफ ने तबलीगी जमात का विस्तार न सिर्फ हिन्दोस्तान तक फैलाया बल्कि उसे अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के भी हर सम्भव प्रयास किये लेकिन 1947 में देश बंटवारे के साथ मेवात में रह रहे ज्यादात्तर मुस्लिम पाकिस्तान चले गए और बाकी को दिल्ली के निजामुद्दीन में रिफ्यूजी कैम्पों में रखा गया! जिनमें ज्यादात्तर मेवाती थे!

भला मौलाना मोहम्मद युसूफ यहाँ कहाँ खामोश बैठने वाला था, उसने दरगाह निजामुद्दीन औलिया के नजदीक  बंगले वाली मस्जिद कब्जाई और यहीं से तबलीगी जमात का संचालन शुरू कर दिया! 30 मार्च 1966 में पाकिस्तान के रावलपिंडी में इसकी शाखा खोली गयी जिसका नाम रखा गया ब्रदरहुड! तबलीगी जमात के छोटे ग्रुप गश्त कहलाते हैं व जमात के प्रमुख को अमीर शब्द से नवाजा जाता है!

यह सब तो है तबलीगी जमात का शुरूआती चेहरा! अब आते हैं तबलीगी जमात के कुछ ऐसे कारनामों पर जिसके कारण वह ज्यादा समय में लाइम-लाइट में तो रहा लेकिन गुप्तचर एजेंसियों की आँखों में हमेशा धूल झोंकती रही! यह पुलिस बल को एकता के बल पर, पैंसे के बल पर, सेक्युलर पार्टियों के हो-हल्ले के बल पर, इस्लामिक मौलवियों व कथित बुद्धिजीवियों की पैरवी के बल पर हमेशा गुमराह करती रही और राजनीतिक पार्टियां भी सिर्फ इन्हें वोट बैंक समझकर इस्तेमाल करती हुयी बायपास करती रही लेकिन कोई इनके अंदर तक झाँकने नहीं गया कि आखिर कल तक एक मामूली सी मस्जिद आखिर नौ मंजिली इमारत किस फंड से बन गयी?

अब जब कोरोना के प्रकोप में यह मरकज देश दुनिया के सामने आया व केंद्र की मोदी सरकार ने बेहद सख्ती से इस पर कार्यवाही शुरू की तो कई चौंकाने वाले दस्तावेज, व चेहरे सामने आये! तबलीगी जमात को संचालित करने वाले मौलाना साद के अचानक भूमिगत होने से शक की सुई और मजबूत हुई तो इन्हीं पकडे गए तबलीगी जमात के लोगों से पुलिस व खुफिया एजेंसियों ने राज उगलवाने तब शुरू किये जब इन्हे इलाज के लिए बसों में भरकर ले जाते समय पुलिस के ऊपर थूकना व गाली-गलौज जैसा अमानवीय व्यवहार शुरू किया! धर पकड हुई तो बिना बीजा के कई मदरसे मस्जिदों से विदेशी मुस्लिम हत्थे चढ़ गये जिनमें पटना की कुर्जी स्थित मस्जिद 23 मार्च को 12 विदेशी, झारखंड के तमाड़ स्थित राडगाँव मस्जिद से चीन व अन्य देशों के 11 मौलवी, 30 मार्च को रांची की एक अन्य मस्जिद से 30 मौलवी, जिनमें भारतीय समेत मलेशिया, वेस्टइंडीज व पौलैंड के नागरिक शामिल तथा 31 मार्च को महाराष्ट्र के अहमदाबाद जिले के नेवासा से 10 विदेशी मुसलमान गिरफ्तार किये गए! इस माह भी धर-पकड में कई जगह से कई विदेशी पकड में आये हैं जिनसे पूछताछ की जा रही है व उनके आतंकी सूत्रों की खुफिया एजेंसियां जांच कर रही हैं!

तबलीगी जमात पर आरोप हैं कि उनका मुख्यालय अल-कायदा जैसे संगठन के कागज वगैरह बनाने में सहयोग करता रहा है! इस जमात पर यह भी आरोप हैं कि इन्होने अंरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादियों को न सिर्फ सहायता की है बल्कि इसी जमात के कई नाम आतंकियों से जुड़े हैं जिनमें सूडान में लश्कर-ए-तोयबा का आतंकवादी हामिर, कुख्यात आतंकवादी मोहम्मद सुलेमान बर्रे, अलकायदा के मुजाहिद्दीन बटालियन कमांडर अबु-जुबैर-अल-हलीली, सऊदी अरब का नागरिक कई देशों में बांछित अल-बुखारी, आतंकी कफील अहमद, आतंकी शहजाद तनवीर, मोहम्मद सिद्दीकी खान, आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिद्दीन इत्यादि प्रमुखता से सामने लाये जाते हैं! ये वे आतंकी या आतंकी संगठन हैं जिन्होंने 1999 में इंडियन एयरलाइन के विमान 814 का अपहरण, 2002 में गुजरात में गोधरा काण्ड में 59 हिन्दुओ की ह्त्या, 9/11 के दंगे, 7 जुलाई 2005 में लन्दन में हमलों में शामिल व 30 जून 2007 में ग्लासगो हवाई अड्डे पर हमला किया था, इन सभीके कनेक्शन घूमकर आखिर तबलीगी जमात के मुख्यालय निजामुद्दीन मरकज में आकर क्यों ठहर जाते हैं!

निजामुद्दीन मरकज के घटनाक्रम से पहले के घटनाक्रम जब तबलीगी जमात से जुड़े सामने आते हैं तो आँखें फ़ैल उठती हैं क्योंकि एक सोची समझी साजिश अगर न भी कहें तो जहाँ भी इस जमात ने अपने कार्यक्रम किये वहीँ कोरोना वायरस संक्रमण ने उस देश को गिरफ्त में ले लिया! इनमें विगत 12 मार्च को लाहौर पाकिस्तान में तबलीगी जमात ने 80 देशों के लगभग ढाई लाख जमाती बुलाये जिनमें 10 हजार मौलाना भी शामिल हुए! पाकिस्तान द्वारा इनकार करने के बाद भी यह कार्यक्रम आयोजित हुआ और वहां इसी दौरान 27 लोगों पर कोरोना वायरस पाया गया जिनमें 23 की कुछ ही समय बाद मौत की पुष्टि हुई, 2000 लोग संक्रमित पाए गए व इन संक्रमित लोगों के कारण पाकिस्तान में संक्रमण चरम पर जा पहुंचा!

इस से पूर्व 27 फरवरी से 1 मार्च तक क्वालालम्पुर में 30 देशों के 16 हजार से ज्यादा जमाती पहुंचे, जिनमें 620 संक्रमित पाए गए! ब्रूनेई में 73 मामले व थाईलैंड में 10 मामले दर्ज हुए! इसके बाद इंडोनेशिया में 10 देशों के 8700 लोगों की जमात का आयोजन था लेकिन जबर्दस्त विरोध के कारण इसे स्थगित करना पड़ा!

18 मार्च से निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात के 8000 से 10000 लोग इकट्ठा हुए जिनमें भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा सऊदी अरब , मलेशिया, इंडोनेशिया इत्यादि से भी तबलीगी पहुंचे! यहाँ संक्रमण तेजी से फैला लेकिन दिल्ली सरकार के अफसरों की सुस्ती के कारण इसका खुलासा तब हो पाया जब एक व्यक्ति की वहीँ मौत हुई! आज सबसे ज्यादा मामले पूरे भारत में तबलीगी जमात द्वारा फैलाये गए कोरोना संक्रमण के बताए जा रहे हैं जो यकीनन किसी खतरे की घंटी से कम नहीं क्योंकि यह मामला देरी से सामने लाया गया! यहाँ कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि यह सब किसी सोची समझी साजिश के तहत हुआ है क्योंकि इस से पहले मौलाना साद के बयान पर खुफिया एजेंसियों की सुई टिकी हुई है जिसमें वह जमातियों को कह रहे हैं कि पहले तो खुदा के बंदों पर इसका असर नहीं होता और अगर हुआ तो इससे बढ़िया मौत क्या होगी कि खुदा के घर में हमें मौत मिली!

बहरहाल उत्तराखंड जैसे राज्य में जहाँ पूर्व में मात्र 5 मामले दर्ज थे, वर्तमान में 27 मामले प्रकाश में आये हैं जिनमें 20 मामले तबलीगी जमात के बताये जा रहे हैं तो स्वाभाविक सी बात है कि ऊँचे पजामे बांधकर उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में घूमने वाला हर मुस्लिम अब शक के दायरे में है व यहाँ किराए पर मुस्लिमों को रखने वाले जनमानस के प्रति यहाँ के लोग नाराज भी हैं! कुछ समय से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जिस तरह मस्जिदों, दरगाहों के निर्माण की बाढ़ आई है वह भी आम जन की नजर में अब सोची समझी साजिश का ऐन वही हिस्सा किस्सा लग रहा है जो आजादी से पूर्व मेवात में हुआ था! यहाँ भी सब्जी के ट्रकों में छुपकर आने वाले व गिरफ्तार किये गए ज्यादात्तर तबलीगी जमात के लोग ही हैं, यह कहना सही तो नहीं होगा, लेकिन कोरोना वायरस के भय ने कहीं न कहीं मुस्लिम कौम की हर शाखा के प्रति अविश्वास भर दिया है व सभी को आम लोग शक की दृष्टि से देखने लगे हैं! सब्जियों पर थूक लगाना, ग्रिल पर थूक लगाना, पुलिस वालों पर थूकना, भारतीय करेंसियों पर नाक पोछना जैसे वीडिओ जिस तरह वायरल हुए हैं, उससे तो मैं भी बद्रीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट जी के बात का समर्थन करूंगा कि सरकार को अब उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में मस्जिदों, मकबरों या दरगाह, मदरसों पर रोक लगानी होगी वरना यह दूसरा कश्मीर न बन जाय इस बात का डर है! सबसे शांत चित्त यहाँ का वन गूर्जर अचानक लम्बी टोपी की जगह गोल टोपी लगाने लगा है! जिस उत्तराखंड के परिवेश के मुस्लिम गाँव में कभी कोई महिला बुर्के में नहीं दिखती थी आज अचानक वहां बुर्कों की बाढ़ आ गयी! कल तक जिन वन गूर्जरों से या ग्रामीण मुस्लिमों से आपसी प्यार प्रेम व सौहार्द था आज उन्हीं के रहन-सहन व व्यवहार में भारी बदलाव देखने को मिल रहा है! किसी के घर कोई मेहमान आया है और अगर शिष्टाचार के नाते कोई जानकारी लेना चाहता है तो यह बात भी अब ग्रामीण समाज में रह रहे वाशिंदों को नागवार गुजर रही हैं! सिर्फ यहाँ चाल ढाल नहीं बदली बल्कि अरबिया स्टाइल का छोटा पजामा अपने साथ धार्मिक कट्टरता भी लेकर बढ़ रहा है! यह आश्चर्यजनक है कि कोरोना वायरस के इस दौर में जब इंटेलीजेन्स एजेंसियों ने रिकॉर्ड खंगाला तो सब हतप्रभ रह गए क्योंकि जो उत्तराखंड एकदम शांतचित्त दीखता हैं आज वहां के 1368 लोग नुजामुद्दीन मरकज में जाने वाले तबलीगी जमाती निकले, यह आंकड़ा अभी बढ़ भी सकता है क्योंकि अब सरकारों की ऑंखें खुल गयी हैं! इस आंकड़े ने सरकार की नींद तो जो भी उड़ाई हो लेकिन उत्तराखंडी समाज के बीच एक बहस अवश्य छेड दी है कि कहीं कश्मीर खाली होकर उत्तराखंड में तो नहीं बसने जा रहा है क्योंकि यहाँ पलायन की जद में पूरा पहाड़ है व ऐसे जमातियों के लिए यह सबसे सॉफ्ट टार्गेट भी है! यहाँ आये दिन ये लोग हिन्दू धर्म के एक वर्ग बिशेष को प्रलोभन देकर उनकी जमीनों में छोटा रोजगार शुरू कर किराए के मकान खरीद रहे हैं और तीन गुना कीमत देकर कहीं भी किसी बंजर को खरीद उसमें मस्जिद, मकबरा, दरगाह या मदरसा खोलना शुरू कर रहे हैं! यह हाल का सर्वे है कि रातों रात उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों की वन भूमि में दरगाह, मकबरे व मस्जिदें बन रही हैं! यहाँ इस बात का संज्ञान प्रदेश के वन मंत्रालय या भारत के वन मंत्रालय को लेना आवश्यक है कि वे कौन अफसर हैं जो मुंह मांगे पैंसे लेकर वन विभाग की जमीन या नजूल की जमीन में यह सब होता देख रहे हैं और मुंह फेर दे रहे हैं! कहीं कुछ रुपयों की चमक इस देवभूमि पर नजर तो नहीं लगाने वाली?

अपनी हिन्दू सेक्युलर जमात व वामपंथी विचारकों से कहना है कि किसी भी धर्म जाति को सिर्फ कुछ ही लोग बदनाम करते हैं! आज सच्चा मुसलमान पूरे देश भर में दोराहे पर खड़ा है कि आखिर किसकी गलती की सजा पूरी कौम को भुगतनी पड रही है! शायद आज हिन्दू व अन्य देशवासी भी मनन कर रहे होंगे कि क्या यह वही कौम है जिसने हमें देश के राष्ट्रपति जाकिर हुसैन, मुहम्मद हिदायत्तुला, फकरुद्दीन अली अहमद, एपीजे अब्दुल कलाम व स्वाधीनता संग्रामी  खान अब्दुल गफार खान, डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी, मौलाना आजाद, बदरुद्दीन तैयब, सैफुद्दीन किच्लेव, हकीम अजमल खान, अब्बास तैयब, रफी अहमद किदवई, मौलाना महमूद हसन सैयद अहमद खान , सैयद अमीर अली और आगा खान सेना के मेजर जनरल अख़्तर हुसैन मलिक, परमवीर चक्र विजेता हवलदार अब्दुल हमीद इत्यादि दिए हैं जिनका नाम सुनकर ही इस जाति के प्रति आँखों में इज्जत उमड़ पडती हैं!

वर्तमान परिस्थियों के जिम्मेदार क्या हम सब खुद हैं या फिर राजनीति का वह परिवेश जहाँ सभी राष्ट्रीय दलों ने हमें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया और सिरफिरों ने हमारे मन में नफरत पैदा कर आतंकियों के रूप में ऐसा मानव बम बना दिया जिस से सिर्फ और सिर्फ हमें ही नुक्सान होना है!

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