Thursday, February 29, 2024
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“छपाक” की असल नायिका की जडें हैं पौड़ी गढ़वाल के चैदार-पाली में।

(मनोज इष्टवाल)

चैदार-पाली न कहूँ तो और क्या कहूँ! यहीं तो उसके पुरखों की माटी है ! यहीं की माटी की राख से उसकी प्रतिभा कुंदन बनी और यह सोना जब चमका तो उसने दीपिका पादुकोण की ड्रामेदार करोड़ों के बजट की बनी फिल्म “छपाक” पर ऐसी छपाक मारी कि रंगीन परदे की चमक असली जिन्दगी के आगे फीकी साबित हुई!

उत्तराखंड के पौड़ी गढवाल के विकास खंड एकेश्वर के रीठाखाल के चैदार-पाली गाँव है जहाँ की डॉ. प्रतिभा नैथाणी उसी परिवार से है जो गढवाल नरेश के सामन्ती परिवार के पुरिया नैथाणी की तुलना चाणक्य व अकबर के दरवारी बीरबल से की जाती थी! ये चैदार पाली के उस परिवार से हैं जिसकी की बारात का रिकॉर्ड आजतक नहीं टूट पाया है!

सचिदानंद सेमवाल इस बारे में जानकारी देते हुए लिखते हैं कि गढ़वाल की सबसे बड़ी बारात जिस गाँव मेँ मैँ रहता हूँ (चैधार ,पौड़ी गढ़वाल) ! यह बारात मदन मोहन नैथानी के पिता जी की थी जो 2 मील लम्बी थी और जिसमेँ 300 सरोला ब्राह्मण (खाना बनाने वाले) थे। ये बारात टिहरी राजा के मन्त्री के घर नौगाँव (बडोला परिवार ) गई, जिन्हें पूछा गया था कि कितने मेहमान लाने तो उसने कहा जितनी मरजी…. । इस पर एक गाना अभी भी गाया जाता है –

पाणी की परात……………………………… ..2, चैधार का इना बामण जौंकि द्वी मील बारात । रोटि कु भरोळ………………………………. .2,नैथाण्यूँ कि इनि गैs बारात,जैमा 300 सर्योळ।मारिना हिलांस-हिलांस…………………….. ..2 ,नैथानी नमान ल्यालाs बल सूना का गिलास।सजला की गट्टी……….. ……………………… 2, मूशक बाजा अयाँन बल बिजनौर बट्टी ।

सचिदानंद सेमवाल लिखते हैं-मेरे पास पूरा गीत व इस बात के प्रमाण भी हैं । एक आदमी दुल्हन के घर व अन्तिम दूल्हे के घर । क्योँकि राजा के मन्त्री ने गर्व से कहा कि जितनी मरजी मेहमान लाना।

सेमवाल जी की बात में सत्यता भी है क्योंकि नौगाँव बलोड़ी गयी इस बारात के किस्से आज भी आम हैं! बहरहाल हम बात करते हैं इसी परिवार की डॉ. प्रतिभा नैथानी पर! डॉ. प्रतिभा नैथानी का जन्म मायानगरी के नाम से मशहूर मुंबई शहर में हुआ! इनके पिता डॉ. एस.एस.नैथानी मुंबई विश्वविद्यालय व सैंट ज़ेवियर कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर रहे! डॉ. प्रतिभा नैथानी भी वर्तमान में मुंबई के सैंट ज़ेवियर कॉलेज में राजनीति शास्त्र की हेड ऑफ़ द डिपार्टमेंट हैं! वह वर्तमान में रिकंस्ट्रटिव सर्जरी फाउंडेशन की सदस्य भी हैं!

डॉ. प्रतिभा नैथानी के बारे में जानकारी दे दें कि वह उत्तराखंड के जनजातीय लोगों को मुख्य धारा से जोड़ने व उनके हक़ अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा आवाज़ बुलंद करती रहती हैं! उन्होंने कई ऐसे नीतिगत सुझाव भी रखें हैं जिन पर सरकार को अमल करने की आवश्यकता है! वह जबर्दस्त राजनीति लोकगायिका भी हैं व राजस्थान के झूमर नृत्य ग्रुप को अभी तक विश्व के 16 देशों में प्रदर्शित कर चुकी हैं!

डॉ. प्रतिभा नैथानी उन सात महिलाओं में शुमार है जिन्होंने सन 2000 में पहली बार उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद आयोजित नंदा राज जात में शिरकत की! 2005 में उन्हें इंडिया टुडे समूह द्वारा “पॉवर ऑफ़ गॉडेसेस ऑफ़ इंडिया” व सन 2007 में “आउटस्टेंडिंग वुमन ऑफ़ मुंबई सिटी” पुरस्कार से अलंकृत किया गया!

ऐसा नहीं है कि प्रतिभा की प्रतिभा को उत्तराखण्डी नहीं पहचान पाये हों। उन्ही के पौड़ी गढ़वाल में उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. प्रतिभा नैथानी ऐसिड की मार से प्रभावित बेटियों की मदद के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती हैं और वे इस देश की ऐसी समाज सेविका हैं बेटियों की इस पीड़ा में उनके साथ खड़ी होती हैं। वे अपने इस अनूठे सेवा कार्य को मुम्बई से कर रही हैं लेकिन उनके घर गाँव के समाज की अपनी बहिन-बेटी के सेवाभाव के इस अभियान पर पूरी नजर रही है। उनके इस काम के लिए 4 नवम्बर 2017 को शतचण्डी जनकल्याण समिति पौड़ी गढ़वाल द्वारा प्रतिभा नैथानी को “देवभूमि प्रतिभा सम्मान” से सम्मानित किया गया।

वरिष्ठ पत्रकार वेद विलास लिखते हैं-

दीपिका पादुकोणे को तो जानते हैं पर क्या प्रो प्रतिभा को भी जानते हैं!

दीपिका पादुकौण को तो आप जान गए। छपाक, जेएनयू पर हो गई चर्चा और सिनेमा हालों पर आ गई फिल्म । हो गया करोडो का वारा न्यारा। लेकिन….। आप शायद प्रो प्रतिभा नैथानी को नहीं जानेंगे। शायद इसकी जरूरत न हो क्योंकि न तो वह फिल्मी दुनिया की हैं न किसी आजादी के नारे लगाते टुकडे गैग की सदस्य। फिर भला उनका क्या महत्व।

जेएनयू में आजादी के नारेबाजों को इस नाम में ग्लैमर नहीं दिखता. प्रतिमा का नाम उनके लिए हुडदंग और शोशेबाजी में मददगार नहीं। न दिपिका पादुकोणे को प्रतिभा नैथानी से मतलब न इन नारेबाजों को । न सस्ते प्रचार के भूखे फिल्म जगत के लोगों को । अनुराग कश्चपों को इससे मतलब नहीं होता कि प्रतिभा के बारे में जाना जाए। अगर लक्ष्मी की जिंदगी को भावुकता से समझा होता तो दिपिका पादुकोण से पहले प्रतिभा नैथानी के लिए बडी कद्र होती।

मगर प्रोफेसर प्रतिभा नैथानी के बारे में ज़रूर जान लीजिए। उत्तराखंड की प्रतिभा नैथानी ने एसिड अटैक सर्वाइवर को न्याय दिलाने के लिए ढाई साल तक लॉ मिनिस्ट्री, होम मिनिस्ट्री और वीमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट मिनिस्ट्री के चक्कर लगाए और एसिड अटैक के दोषी की सज़ा बढ़वाईयही नहीं पीडित महिला को पांच लाख रुपये तक का मुआवज़ा दिलवाने के लिए जद्दोजहद की

डॉ. प्रतिभा नैथानी मूल रूप से पौड़ी के चैदार-पाली की रहने वाली है। और मुंबई के सेंट झेवियर्स कालेज में राजनीति शास्त्र पढ़ाती है। डॉक्टर प्रतिभा नैथानी को लोग टेलीविजन पर अश्लीलता और हिंसा के खिलाफ लड़ाई के लिए जानते है। प्रतिभा नैथानी ने मुंबई हाई कोर्ट में PIL डाल कर सभी टेलीविजन चैनल पर सेंसर लागू करवाया और अश्लील फिल्मों के प्रसारण को बंद करवाया। प्रतिभा नैथानी के कारण ही आज सभी विदेशी चैनल को हमारे देश का क़ानून मानना पड़ा। मुम्बई के मेयर ने उनके उत्क्रष्ट सामाजिक कार्य को लेकर भी उन्हें सम्मानित किया प्रतिभा नैथानी उन पहली महिलाओं में से है जिन्होंने नंदा देवी राजजात यात्रा पूरी की थी।

प्रतिभा नैथानी को जानना जरूरी है। यही असली संघर्ष है । यही असली जद्दोजहद है। फिल्मी लोग पैसा कमाने के लिए किसी घटना का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी हद तक नाटकीय हो सकते हैं। लोगों की भावनाओं से खेलने और घटनाओं में अपनी सौदेबाजी करने में भी इन्हें गुरेज नहीं। लेकिन असल नायक या नायिका वो है जो धरातल पर उतर कर लोगों की मदद करते हैं।

अब इन दोनों में अर्थात डॉ. प्रतिभा नैथानी व दीपिका पादुकोण में मुझे किसी एक को असली अभिनेत्री का खिताब देने की बात कही जाय तो दोनों ही अपने अपने क्षेत्र में महारथी हैं ! एक रुपहले परदे पर तो दूसरी कर्मभूमि पर..! दीपिका पादुकोण “छपाक” फिल्म के माध्यम से पैंसा शोहरत कमाकर वही संदेश देना चाह रही हैं जिसे धरातल पर डॉ. प्रतिभा नैथानी पसीना व पैंसा बहाकर ऐसे लोगों की मसीहा बन रही है!

सच कहूँ तो मैं असली अभिनेत्री के चुनाव में डॉ. प्रतिभा को सौ बट्टे सौ नम्बर दूंगा क्योंकि वह समाज से उस दुर्गन्ध को मिटाने का काम कर रही है जो पर्दे पर पोर्न व अश्लीलता परोस रहे हैं या फिर असिड अटैक के माध्यम से गुनाहों को परोस रहे हैं! काश….हम असली छपाक की नायिका डॉ. प्रतिभा नैथानी का इकबाल बुलंद करने के लिए एकजुट होते!

मैं नहीं जानता कि मुंबई में जन्मी यह बेटी कितनी बार अपने पिता डॉ. एस.एस.नैथानी की जन्मभूमि व अपने पैतृक गाँव चैदार गई हैं लेकिन इतना जरुर जानता हूँ कि आने वाले बर्षों में इस बिटिया पर उत्तराखंडी समाज का कोई चितेरा जरुर फिल्म बनाना पसंद करेगा व चैदार पाली को डॉ. प्रतिभा नैथानी के पुरखों की धरोहर के रूप में इस्तेमाल करना पसंद करेगा!

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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